शारदीय नवरात्रि तिथियाँ 2026

वर्ष 2026 की सभी तिथियाँ, New Delhi, India के समय सहित।

2026 में शारदीय नवरात्रि रविवार, अक्टूबर 11, 2026 को प्रारम्भ होकर मंगलवार, अक्टूबर 20, 2026 को समाप्त होंगी (कुल 9 दिन)। विजयादशमी (दशहरा): मंगलवार, अक्टूबर 20, 2026। ये तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय (IST) के आधार पर गणना की गई हैं; अपने शहर के लिए स्थान बदलें।

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2026
  1. दिन 1: घटस्थापना, शैलपुत्री पूजा
  2. दिन 2: ब्रह्मचारिणी पूजा
  3. दिन 3: चंद्रघंटा पूजा
  4. दिन 4: कूष्मांडा पूजा
  5. दिन 5: स्कंदमाता पूजा
  6. दिन 6: कात्यायनी पूजा
  7. दिन 7: कालरात्रि पूजा
  8. दिन 8: महागौरी पूजा
  9. दिन 9: सिद्धिदात्री पूजा, नवरात्रि पारण

शारदीय नवरात्रि

शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाला माँ दुर्गा का सबसे बड़ा उत्सव है। नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की पूजा होती है और दसवें दिन विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाती है। साल की चार नवरात्रियों में यही सबसे प्रसिद्ध है, इसलिए इसे महानवरात्रि भी कहते हैं।

क्या है और क्यों मनाते हैं

मार्कण्डेय पुराण के देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) में माँ दुर्गा के महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ और दूसरे असुरों पर विजय की कथा है। रामायण की परंपरा में श्रीराम ने रावण से युद्ध से पहले शरद ऋतु में देवी की आराधना की थी, जिसे "अकाल बोधन" कहा जाता है। इसी कारण नवरात्रि के बाद दशहरा आता है।

नौ दिन, नौ देवियाँ

  1. प्रतिपदा: शैलपुत्री
  2. द्वितीया: ब्रह्मचारिणी
  3. तृतीया: चंद्रघंटा
  4. चतुर्थी: कूष्मांडा
  5. पंचमी: स्कंदमाता
  6. षष्ठी: कात्यायनी
  7. सप्तमी: कालरात्रि
  8. अष्टमी: महागौरी
  9. नवमी: सिद्धिदात्री

हर दिन के भोग और रंग नवदुर्गा के नौ रूप लेख में देखें। तिथि घटने-बढ़ने से कभी नवरात्रि आठ या दस दिन की भी हो जाती है; नीचे की सूची में हर दिन की सही तारीख दी गई है।

घटस्थापना

घटस्थापना प्रतिपदा तिथि में, दिन के पहले एक-तिहाई भाग में की जाती है। उस समय चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग हो, या प्रतिपदा जल्दी खत्म हो रही हो, तो दोपहर का अभिजित मुहूर्त लिया जाता है। मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उस पर जल भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है और अखंड दीपक जलाया जाता है। पूरी विधि कलश स्थापना विधि में है।

इस साल का मुहूर्त घटस्थापना पृष्ठ पर देखें।

अष्टमी, नवमी और पारण

कई घरों में अष्टमी को और कई में नवमी को कन्या पूजन और हवन होता है। पूरे नौ दिन व्रत रखने वाले ज़्यादातर नवमी खत्म होने के बाद दशमी को पारण करते हैं, जबकि कुछ परिवार नवमी के हवन और कन्या भोज के बाद ही व्रत खोल लेते हैं। व्रत में क्या खाएं, यह नवरात्रि व्रत में क्या खाएं में है। दसवें दिन विजयादशमी पर रावण दहन होता है। रोज़ शाम जय अम्बे गौरी आरती गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शारदीय नवरात्रि कब शुरू होती है?
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से, और नवमी तक चलती है। इस साल की तारीखें इसी पृष्ठ पर दी गई हैं।
घटस्थापना का सही समय क्या है?
प्रतिपदा तिथि में दिन का पहला एक-तिहाई भाग; बाधा हो तो अभिजित मुहूर्त। अपने शहर का मुहूर्त घटस्थापना पृष्ठ पर देखें।
नवरात्रि का पारण कब करें?
ज़्यादातर परंपराओं में नवमी तिथि खत्म होने के बाद दशमी को; कुछ परिवार नवमी के हवन और कन्या पूजन के बाद व्रत खोलते हैं।
कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?
दोनों मान्य हैं; यह कुल की परंपरा पर निर्भर है।
नवरात्रि कभी आठ या दस दिन की क्यों होती है?
किसी तिथि के क्षय या वृद्धि के कारण दिनों की संख्या बदल जाती है, पर पूजा नौ तिथियों की ही होती है।

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