2026

महागौरी पूजा 2026

सोमवार, अक्टूबर 19, 2026

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

महागौरी पूजा

माँ महागौरी कौन हैं

नवरात्रि के आठवें दिन, आश्विन शुक्ल अष्टमी को, माँ महागौरी की पूजा होती है। यही दिन दुर्गाष्टमी या महाअष्टमी कहलाता है, और उत्तर भारत के ज़्यादातर घरों में कन्या पूजन भी आज ही होता है।

कथा है कि शिव को पाने के लंबे तप में पार्वती का शरीर धूल-मिट्टी से काला पड़ गया था। प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें गंगाजल से स्नान कराया, तो उनका रूप शंख और चंद्रमा जैसा उजला हो गया — इसी से नाम पड़ा महागौरी। माँ सफ़ेद वस्त्र पहनती हैं, सफ़ेद बैल पर सवार हैं, चार भुजाओं में त्रिशूल और डमरू हैं, बाकी दो अभय और वरद मुद्रा में। शास्त्रों में उनकी आयु आठ वर्ष बताई गई है, इसलिए अष्टमी पर छोटी कन्याओं में उन्हीं का रूप देखा जाता है।

ध्यान मंत्र

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

पूजा, भोग और कन्या पूजन

महागौरी को नारियल का भोग लगता है। सुबह की पूजा के बाद नौ कन्याओं और एक बालक (लांगुर या भैरव रूप) को घर बुलाकर पैर धोए जाते हैं, तिलक लगाकर हलवा, पूरी और काले चने खिलाए जाते हैं, फिर दक्षिणा और चुनरी देकर विदा किया जाता है। पूरी विधि कन्या पूजन विधि में है। जो परिवार नवमी को कन्या पूजते हैं, वे आज कुलदेवी की पूजा करते हैं।

क्षेत्रीय परंपराएँ

पंजाब, दिल्ली और हरियाणा में "अष्टमी पूजन" सबसे बड़ा दिन है — सुबह से ही गली-मोहल्ले में कन्याओं को बुलाने की दौड़ रहती है। बिहार और बंगाल में अष्टमी और नवमी के मिलन के 48 मिनट में संधि पूजा होती है, जिसमें 108 दीपक और 108 कमल चढ़ाए जाते हैं। अष्टमी का यह नियम हर महीने भी निभाया जाता है — मासिक दुर्गाष्टमी देखें। अगले दिन सिद्धिदात्री पूजा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि की अष्टमी को किस देवी की पूजा होती है?
आश्विन शुक्ल अष्टमी को माँ महागौरी की पूजा होती है। इसे दुर्गाष्टमी या महाअष्टमी भी कहते हैं।
माँ महागौरी को क्या भोग लगाएं?
नारियल का भोग लगाया जाता है। कन्या पूजन में हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद बनता है।
कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?
दोनों दिन मान्य हैं और यह परिवार की परंपरा पर निर्भर है। उत्तर भारत में बहुत से घर अष्टमी को और कई नवमी को कन्या पूजन करते हैं।
कन्या पूजन में कितनी कन्याएँ बुलानी चाहिए?
परंपरा से दो से दस वर्ष की नौ कन्याएँ और एक बालक (लांगुर)। नौ न मिलें तो जितनी कन्याएँ आ सकें, उतनी श्रद्धा से पूजें।
संधि पूजा क्या है?
अष्टमी के आख़िरी 24 मिनट और नवमी के पहले 24 मिनट के बीच की पूजा, जो बिहार और बंगाल में विशेष रूप से 108 दीपक और कमल के साथ की जाती है।

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