सुनते हुए पाठ करें
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- ॐ गोदायै नमः
- ॐ श्रीरंगनायक्यै नमः
- ॐ विष्णुचित्तात्मजायै नमः
- ॐ सत्यै नमः
- ॐ गोपीवेषधरायै नमः
- ॐ देव्यै नमः
- ॐ भूसुतायै नमः
- ॐ भोगदायिन्यै नमः
- ॐ तुलसीवासज्ञायै नमः
- । श्री तन्वीपुरवासिन्यै नमः
- ॐ भट्टनाथप्रियकर्यै नमः
- ॐ श्री कृष्णायुधभोगिन्यै नमः
- ॐ आमुक्तमाल्यदायै नमः
- ॐ बालायै नमः
- ॐ रंगनाथप्रियायै नमः
- ॐ वरायै नमः
- ॐ विश्वंभरायै नमः
- ॐ यतिराजसहोदर्यै नमः
- ॐ कलालापायै नमः
- ॐ कृष्णासुरक्तायै नमः
- ॐ सुभगायै नमः
- ॐ दुर्लभ श्री सुलक्षणायै नमः
- ॐ लक्ष्मीप्रियसख्यै नमः
- ॐ श्यामायै नमः
- ॐ फल्गुण्या विर्भवायै नमः
- ॐ रम्यायै नमः
- ॐ धनुर्मासकृतवृतायै नमः
- ॐ चंपकाशोकपुन्नागै नमः
- ॐ मालाविरसत् कचायै नमः
- ॐ आकारत्रयसंपन्नायै नमः
- ॐ नारायणपदांघ्रितायै नमः
- ॐ राजस्थित मनोरथायै नमः
- ॐ मोक्ष प्रधाननिपुणायै नमः
- ॐ मनुरक्तादिदेवतायै नमः
- ॐ ब्राह्मण्यै नमः
- ॐ लोकजनन्यै नमः
- ॐ लीलामानुष रूपिण्यै नमः
- ॐ ब्रह्मज्ञानप्रदायै नमः
- ॐ मायायै नमः
- ॐ सच्चिदानंदविग्रहायै नमः
- ॐ महापतिव्रतायै नमः
- ॐ विष्णुगुण कीर्तनलोलुपायै नमः
- ॐ प्रसन्नार्तिहरायै नमः
- ॐ नित्यायै नमः
- ॐ वेदसौधविहारिण्यै नमः
- ॐ श्रीरंगनाधमाणिक्यमंजर्यै नमः
- ॐ मंजुभाषिण्यै नमः
- ॐ पद्मप्रियायै नमः
- ॐ पद्महस्तायै नमः
- ॐ वेदांतद्वयभोधिन्यै नमः
- ॐ सुप्रसन्नायै नमः
- ॐ भगवत्यै नमः
- ॐ जनार्धनदीपिकायै नमः
- ॐ सुगंधावयवायै नमः
- ॐ चारुरंगमंगळदीपिकायै नमः
- ॐ ध्वजवज्रांकुशाब्द्बांगय नमः
- ॐ मृदुपादकलांजितायै नमः
- ॐ तारकाकारनखरायै नमः
- ॐ कूर्मोपमेयपादोर्ध्वभागामै नमः
- ॐ शोभनपार्षिकायै नमः
- ॐ वेदार्थभावतत्वज्ञायै नमः
- ॐ लोकाराध्यांघ्रिपंकजायै नमः
- ॐ परमासंकायै नमः
- ॐ कुज्जासुद्वयाढ्यायै नमः
- ॐ विशालजघनायै नमः
- ॐ पीनसुश्रोण्यै नमः
- ॐ मणिमेखलायै नमः
- ॐ आनंदसागरावर्त्रॆ नमः
- ॐ गंभीराभोजनाभिकायै नमः
- ॐ भास्वतवल्लित्रिकायै नमः
- ॐ नववल्लीरोमराज्यै नमः
- ॐ सुधाकुंभायितस्तनायै नमः
- ॐ कल्पशाखानिदभुजायै नमः
- ॐ कर्णकुंडलकांचितायै नमः
- ॐ प्रवाळांगुलिविन्यस्तमयै नमः
- ॐ हारत्नांगुलियकायै नमः
- ओंओं कंबुकंठ्यै नमः
- ओंओं सुचुंबकायै नमः
- ॐ बिंबोष्ठ्यै नमः
- ॐ कुंददंतयुते नमः
- ॐ कमनीय प्रभास्वच्चयै नमः
- ॐ चांपेयनिभनासिकायै नमः
- ॐ यांचिकायै नमः
- ॐ अनंदार्कप्रकाशोत्पद्मणि नमः
- ॐ ताटंकशोभितायै नमः
- ॐ कोटिसूर्याग्निसंकाशै नमः
- ॐ नानाभूषणभूषितायै नमः
- ॐ सुगंधवदनायै नमः
- ॐ सुभ्रुवे नमः
- ॐ अर्थचंद्रललाटकायै नमः
- ॐ पूर्णचंद्राननायै नमः
- ॐ नीलकुटिलालकशोभितायै नमः
- ॐ सौंदर्यसीमाविलसत्यै नमः
- ॐ कस्तूरीतिलकोज्ज्वलायै नमः
- ॐ दगद्दकायमनोद्यत् मणिने नमः
- ॐ भूषणराजितायै नमः
- ॐ जाज्वल्यमानसत्र रत्न दिव्यचूडावतंसकायै नमः
- ॐ अत्यर्कानल तेजस्विमणी कंजुकधारिण्यै नमः
- ॐ नानामणिगणा कीर्घ कांचनांगद भूषितायै नमः
- ॐ कुंकुमागरु कस्तूरी दिव्यचंदनचर्चितायै नमः
- ॐ स्वोचितौज्ज्वल्य विविध विचित्र मणिहरिण्यै नमः
- ॐ शुभहारिण्यै नमः
- ॐ सर्वावयवभूषणायै नमः
- ॐ श्रीरंगनिलयायै नमः
- ॐ पूज्यायै नमः
- ॐ दिव्यदेविसु सेवितायै नमः
- ॐ श्रीमत्यैकोतायै नमः
- ॐ श्रीगोदादेव्यै नमः
|| इति श्री गोदादेवि अष्टोत्तर शतनामावळिः संपूर्णं||
अर्थ
श्री गोदादेवी अष्टोत्तर शतनामावली श्रीवैष्णव परंपरा के सबसे पवित्र स्तोत्रों में से एक है। आंडाळ के नाम से भी विख्यात गोदादेवी, भूदेवी का अवतार हैं और भक्ति तथा शरणागति का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। यह 108 नामों की नामावली उनके दिव्य गुणों, लीलाओं और श्रीरंगनाथ के प्रति उनकी अटूट प्रेम को स्तुति करती है। प्रत्येक नाम उनके जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना, उनकी अद्वितीय भक्ति और उन्होंने विश्व को दिए गए संदेश को प्रतिबिंबित करता है। इस नामावली का पाठ करने से भक्त आंडाळ की कृपा प्राप्त करते हैं और भगवान नारायण के प्रति अपनी भक्ति को गहरा करते हैं।
गोदादेवी का जन्म श्रीविल्लीपुत्तूर में पेरियाळ्वार (विष्णुचित्त) दंपत्ति को तुलसी के एक बगीचे में मिला था। उन्होंने बचपन से ही भगवान कृष्ण के प्रति असीम प्रेम विकसित कर लिया था और स्वयं को कृष्ण की पत्नी मानती थीं। 'आमुक्तमाल्यदा' (जिन्होंने स्वयं धारण करके मालाएँ अर्पित कीं) नाम उनकी विशेष सेवा को याद दिलाता है, जहाँ वे पहले स्वयं फूलों की मालाएँ पहनती थीं और फिर उन्हें श्रीरंगनाथ को अर्पित करती थीं। प्रारंभ में पेरियाळ्वार इस व्यवहार को स्वीकार नहीं करते थे, लेकिन बाद में श्रीरंगनाथ ने स्वयं प्रकट होकर बताया कि उन्हें आंडाळ द्वारा पहनी गई मालाएँ ही पसंद हैं। 'यतिराज सहोदरी' नाम उन्हें श्री रामानुजाचार्य की बहन के रूप में वर्णित करता है, जो श्रीवैष्णव परंपरा में उनके उच्च स्थान को दर्शाता है।
इस नामावली में, गोदादेवी के विभिन्न नाम जैसे 'श्रीरंगनायकी' (श्रीरंगनाथ की पत्नी), 'विष्णुचित्तात्मजा' (विष्णुचित्त की पुत्री), 'भूसुता' (भूदेवी की पुत्री), 'गोपीवेषधरा' (गोपी का वेश धारण करने वाली), और 'धनुर्मासकृतवृता' (धनुर्मास में व्रत करने वाली) आदि उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं और दिव्य संबंधों को उजागर करते हैं। उनके द्वारा रचित 'तिरुप्पावै' नामक दिव्य प्रबंध तमिल वेद के रूप में प्रसिद्ध है और भक्ति मार्ग पर चलने वालों के लिए एक मार्गदर्शक है। 'कृष्णासुरक्ता' नाम कृष्ण के प्रति उनके अखंड प्रेम को इंगित करता है, जबकि 'मोक्षप्रदाननिपुणा' नाम यह बताता है कि वे भक्तों को मोक्ष प्रदान करने की क्षमता रखती हैं।
गोदादेवी के इन 108 नामों का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से, भक्त आंडाळ जैसी निष्कलंक भक्ति विकसित करने के लिए प्रेरित होते हैं। यह नामावली केवल नामों की सूची नहीं है, बल्कि आंडाळ के संपूर्ण व्यक्तित्व और उनकी दिव्य लीलाओं का संक्षिप्त सार है। इसका पाठ करने से मन शांत होता है, नकारात्मक ऊर्जाएँ दूर होती हैं और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त करने में मदद मिलती है। श्रीरंगनाथ की कृपा प्राप्त करने और जीवन में सुख-शांति पाने के लिए यह नामावली अत्यंत प्रभावशाली है।
लाभ (Benefits):
- भक्ति की वृद्धि: श्री गोदादेवी की नामावली का पाठ करने से भगवान श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति बढ़ती है, जो आध्यात्मिक उत्थान की ओर ले जाती है।
- मोक्ष की प्राप्ति: 'मोक्ष प्रदाननिपुणा' नाम के अनुसार, इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने वालों के लिए मोक्ष का मार्ग सुगम होता है और जीवन के अंतिम लक्ष्य तक पहुँचने में सहायता मिलती है।
- मंगलमय जीवन: 'भोगदायिन्यै' और 'वरायै' नामों के अनुसार, गोदादेवी भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करती हैं और उन्हें सुख, समृद्धि तथा मंगलमय जीवन प्रदान करती हैं।
- आध्यात्मिक ज्ञान: आंडाळ के जीवन और भक्ति से संबंधित नामों का पाठ करने से भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान और विवेक प्राप्त होता है, जो सत्य की पहचान का मार्ग प्रशस्त करता है।
- संतान प्राप्ति: गोदादेवी भक्ति और मातृत्व की प्रतीक होने के कारण, संतानहीन दंपति इस नामावली का पाठ करने से उत्तम संतान की प्राप्ति करते हैं, ऐसी मान्यता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री गोदादेवी अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
गोदादेवी अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
गोदादेवी अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
इस नामावली का पाठ कौन कर सकता है?
गोदादेवी अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
गोदादेवी अष्टोत्तर शतनामावली का उद्गम क्या है?
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