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- श्री चन्द्रमौळीश्वर परब्रह्मणे नमः !
- ॐ श्रीनाथादितनूत्थश्रीमहाक्ष्म्यै नमो नमः
- ॐ भवभावित चित्तेजः स्वरूपिण्यै नमो नमः
- ॐ कृतानङ्गवधूकोटि सौन्दर्यायै नमो नमः
- ॐ उद्यदादित्यसाहस्रप्रकाशायै नमो नमः
- ॐ देवतार्पितशस्त्रास्त्रभूषणायै नमो नमः
- ॐ शरणागत सन्त्राणनियोगायै नमो नमः
- ॐ सिंहराजवरस्कन्धसंस्थितायै नमो नमः
- ॐ अट्टहासपरित्रस्तदैत्यौघायै नमो नमः
- ॐ महामहिषदैत्येन्द्रविघातिन्यै नमो नमः
- ॐ पुरन्दरमुखामर्त्यवरदायै नमो नमः ॥ 10 ॥
- ॐ कोलर्षिप्रवरध्यानप्रत्ययायै नमो नमः
- ॐ श्रीकण्ठक्लृप्तश्रीचक्रमध्यस्थायै नमो नमः
- ॐ मिथुनाकारकलितस्वभावायै नमो नमः
- ॐ इष्टानुरूपप्रमुखदेवतायै नमो नमः
- ॐ तप्तजाम्बूनदप्रख्यशरीरायै नमो नमः
- ॐ केतकीमालतीपुष्पभूषितायै नमो नमः
- ॐ विचित्ररत्नसंयुक्तकिरीटायै नमो नमः
- ॐ रमणीयद्विरेफालिकुन्तलायै नमो नमः
- ॐ अर्धशुभ्रांशु विभ्राजल्ललाटायै नमो नमः
- ॐ मुखचन्द्रान्तकस्तूरीतिलकयै नमो नमः ॥ 20 ॥
- ॐ मनोज्ञवक्रभ्रूवल्लीयुगलायै नमो नमः
- ॐ रजनीशदिनेशाग्निलोचनायै नमो नमः
- ॐ करुणारससंसिक्तनेत्रान्तायै नमो नमः
- ॐ चाम्पेयकुसुमोद्भासिनासिकायै नमो नमः
- ॐ तारकाभनसारत्नभासुरायै नमो नमः
- ॐ सद्रत्नखचितस्वर्णताटङ्कायै नमो नमः
- ॐ रत्नादर्शप्रतीकाशकपोलायै नमो नमः
- ॐ ताम्बूलशोभितवरस्मितास्यायै नमो नमः
- ॐ कुन्दकुट्मलसङ्काशदशनायै नमो नमः
- ॐ फुल्लप्रवालरदनवसनायै नमो नमः ॥ 30 ॥
- ॐ स्वकान्तस्वान्तविक्षोभिचिबुकायै नमो नमः
- ॐ मुक्ताहारलसत्कम्बुकन्धरायै नमो नमः
- ॐ साष्टापदाङ्गदभुजचतुष्कायै नमो नमः
- ॐ शङ्खचक्रवराभीतिकराब्जायै नमो नमः
- ॐ मतङ्गजमहाकुम्भवक्षोजायै नमो नमः
- ॐ कुचभारनमन्मञ्जुमध्यमायै नमो नमः
- ॐ तटित्पुञ्जाभकौशेयसुचेलायै नमो नमः
- ॐ रम्यकिङ्किणिकाकाञ्चीरञ्जितायै नमो नमः
- ॐ अतिमञ्जुलरम्भोरुद्वितयायै नमो नमः
- ॐ माणिक्यमुकुटाष्ठीवसंयुक्तायै नमो नमः ॥ 40 ॥
- ॐ देवेशमुकुटोद्दीप्तपदाब्जायै नमो नमः
- ॐ भार्गवाराध्यगाङ्गेयपादुकायै नमो नमः
- ॐ मत्तदन्तावलोत्तंसगमनायै नमो नमः
- ॐ कुङ्कुमागरुभद्रश्रीचर्चिताङ्ग्यै नमो नमः
- ॐ सचामरामरीरत्नवीजितायै नमो नमः
- ॐ प्रणताखिलसौभाग्यप्रदायिन्यै नमो नमः
- ॐ दानवार्दितशक्रादिसन्नुतायै नमो नमः
- ॐ धूम्रलोचन दैतेयदहनायै नमो नमः
- ॐ चण्डमुण्डमहाशीर्षखण्डनायै नमो नमः
- ॐ रक्तबीजमहादैत्यशिक्षकायै नमो नमः ॥ 50 ॥
- ॐ मदोद्धतनिशुम्भाख्यभञ्जनायै नमो नमः
- ॐ घोरशुम्भासुराधीशनाशनायै नमो नमः
- ॐ मधुकैटभसंहारकारणायै नमो नमः
- ॐ विरिञ्चिमुखसङ्गीतसमज्ञायै नमो नमः
- ॐ सर्वबाधाप्रशमनचरित्रायै नमो नमः
- ॐ समाधिसुरथक्ष्माभृदर्चितायै नमो नमः
- ॐ मार्कण्डेयमुनिश्रेष्ठसंस्तुतायै नमो नमः
- ॐ व्यालासुरद्विषद्विष्णुस्वरूपिण्यै नमो नमः
- ॐ क्रूरवेत्रासुरप्राणमारणायै नमो नमः
- ॐ लक्ष्मीसरस्वतीकालीवेषाढ्यायै नमो नमः ॥ 60 ॥
- ॐ सृष्टिस्थितिलयक्रीडातत्परायै नमो नमः
- ॐ ब्रह्मोपेन्द्रगिरीशादिप्रतीक्षायै नमो नमः
- ॐ अमृताब्धिमणिद्वीपनिवासिन्यै नमो नमः
- ॐ निखिलानन्दसन्दोहविग्रहायै नमो नमः
- ॐ महाकदम्बविपिनमध्यगायै नमो नमः
- ॐ अनेककोटिब्रह्माण्डजनन्यै नमो नमः
- ॐ मुमुक्षुजनसन्मार्गदर्शिकायै नमो नमः
- ॐ द्वादशान्तषडम्भोजविहारायै नमो नमः
- ॐ सहस्रारमहापद्मसदनायै नमो नमः
- ॐ जन्मप्रमुखषड्भाववर्जितायै नमो नमः ॥ 70 ॥
- ॐ मूलाधारादिषट्चक्रनिलयायै नमो नमः
- ॐ चराचरात्मकजगत्सम्प्रोतायै नमो नमः
- ॐ महायोगिजनस्वान्तनिशान्तायै नमो नमः
- ॐ सर्ववेदान्तसत्सारसंवेद्यायै नमो नमः
- ॐ हृदिनिक्षिप्तनिःशेषब्रह्माण्डायै नमो नमः
- ॐ राजराजेश्वरप्राणवल्लभायै नमो नमः
- ॐ तुषाराचलराजन्यतनयायै नमो नमः
- ॐ सर्वात्मपुण्डरीकाक्षसहोदर्यै नमो नमः
- ॐ मूकीकृतमहामूकदानवायै नमो नमः
- ॐ दुष्टमूकशिरः शैलकुलिशायै नमो नमः ॥ 80 ॥
- ॐ कुटजोपत्यकामुख्यनिवासायै नमो नमः
- ॐ वरेण्यदक्षिणार्धाङ्गमहेशायै नमो नमः
- ॐ ज्योतिश्चक्रासनाभिख्यपीठस्थायै नमो नमः
- ॐ नवकोटिमहदुर्गासंवृतायै नमो नमः
- ॐ विघ्नेशस्कन्दवीरेशवत्सलायै नमो नमः
- ॐ कलिकल्मषविध्वंससमर्थायै नमो नमः
- ॐ षोडशार्णमहामन्त्रमन्दिरायै नमो नमः
- ॐ पञ्चप्रणवलोलम्बपङ्कजायै नमो नमः
- ॐ मिथुनार्चनसंहृष्टहृदयायै नमो नमः
- ॐ वसुदेवमनोभीष्टफलदायै नमो नमः ॥ 90 ॥
- ॐ कंसासुरवरारातिपूजितायै नमो नमः
- ॐ रुक्मिणीसत्यभामादिवन्दितायै नमो नमः
- ॐ नन्दगोपप्रियागर्भसम्भूतायै नमो नमः
- ॐ कंसप्राणापहरणसाधनायै नमो नमः
- ॐ सुवासिनीवधूपूजासुप्रीतायै नमो नमः
- ॐ शशाङ्कशेखरोत्सङ्गविष्ठरायै नमो नमः
- ॐ विभुधारिकुलारण्यकुठारायै नमो नमः
- ॐ सञ्जीवनौषधत्रातत्रिदशायै नमो नमः
- ॐ मातृसौख्यार्थि पक्षीशसेवितायै नमो नमः
- ॐ कटाक्षलब्धशक्रत्व प्रद्युम्नायै नमो नमः ॥ 100 ॥
- ॐ इन्द्रक्लृप्तोत्सवोत्कृष्टप्रहृष्टायै नमो नमः
- ॐ दारिद्र्यदुःखविच्छेदनिपुणायै नमो नमः
- ॐ अनन्यभावस्वर्गापवर्गदायै नमो नमः
- ॐ अप्रपन्न भवत्रासदायकायै नमो नमः
- ॐ निर्जिताशेषपाषण्डमण्डलायै नमो नमः
- ॐ शिवाक्षिकुमुदाह्लादचन्द्रिकायै नमो नमः
- ॐ प्रवर्तितमहाविद्याप्रधानायै नमो नमः
- ॐ सर्वशक्त्यैकरूप श्रीमूकाम्बायै नमो नमः ॥ 108 ॥
|| इति श्री मूकांबिक शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री मूकांबिक अष्टोत्तर शतनामावलि एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है जो कोल्लूर श्री मूकांबिका देवी के 108 दिव्य नामों का गुणगान करता है। यह नामावलि देवी की अनंत शक्ति, सौंदर्य, करुणा और पराक्रम का वर्णन करती है। यह भक्तों के लिए देवी की उपस्थिति का अनुभव करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का एक उत्कृष्ट माध्यम है। आदि शंकराचार्य द्वारा प्रतिष्ठित कोल्लूर मूकांबिका देवी ज्ञान, शक्ति और धन की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली कल्पवृक्ष के समान हैं।
इस अष्टोत्तर शतनामावलि का प्रत्येक नाम देवी के एक स्वरूप, गुण या लीला को दर्शाता है। यह केवल नामों का संग्रह नहीं है, बल्कि देवी के दिव्य व्यक्तित्व का एक समग्र दर्शन है। इन नामों का जाप करने से भक्त देवी के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़ते हैं, आंतरिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करते हैं। देवी सृष्टि, स्थिति और संहार की अधिष्ठात्री हैं, और सभी जीवों का आधार हैं। उनके नाम का स्मरण पापों को नष्ट करता है और पुण्य बढ़ाता है।
नामावलि "ॐ श्रीनाथादिसनूत्थश्रीमहाक्ष्म्यै नमो नमः" नाम से शुरू होती है, जो बताता है कि देवी श्री महालक्ष्मी का स्वरूप हैं। "भवभावित चित्तेजः स्वरूपिण्यै" नाम उनके शुद्ध चैतन्य स्वरूप को दर्शाता है। "कृतनंगवधूकोटि सौंदर्य्यायै" उनके अनुपम सौंदर्य का वर्णन करता है, जबकि "उद्यदादित्यसाहस्रप्रकाशायै" हजारों उगते सूर्यों के समान उनकी दिव्य चमक को उजागर करता है। देवी "देवता अर्पित शस्त्रास्त्रभूषणायै" हैं, देवताओं द्वारा अर्पित शस्त्रों और अस्त्रों से सुशोभित हैं, और "शरणगत संत्राण नियोगयै" हैं, जो शरण में आए हुए लोगों की रक्षा करती हैं। "सिंहराजवरस्कंधसंस्थितायै" नाम उनके सिंह पर विराजमान वैभव को दर्शाता है, और "महामहिषदैत्येन्द्रविघातिन्यै" महिषासुर जैसे महान राक्षसों का संहार करने वाले उनके पराक्रम को बताता है। देवी "श्रीकंठक्लिप्त श्रीचक्र मध्यस्थायै" हैं, जो श्रीचक्र के केंद्र में निवास करती हैं, और "मिथुनाकारकलित स्वभावयै" हैं, जो शिव-शक्ति स्वरूपिणी के रूप में लोक का पालन करती हैं। उनका शरीर "तप्तजाम्बूनदप्रख्यशरीरायै" है, जो पिघले हुए सोने की तरह चमकता है, और "विचित्ररत्नसंयुक्तकिरीटायै" हैं, जो रत्नों से जड़े मुकुट से सुशोभित हैं।
लाभ (Benefits):
- आंतरिक शुद्धि और शांति: नामावलि के पाठ से मन शुद्ध होता है और आंतरिक शांति स्थापित होती है। यह मानसिक तनाव को कम कर आंतरिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
- ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि: देवी ज्ञान स्वरूपिणी हैं, अतः उनके नाम स्मरण से ज्ञान, बुद्धि और एकाग्रता में वृद्धि होती है। विद्यार्थियों को विशेष रूप से लाभ होता है।
- संकटों का निवारण: जीवन में आने वाले कष्ट, बाधाएं, रोग और नकारात्मक शक्तियां देवी की कृपा से दूर होती हैं। भय और चिंताएं समाप्त होती हैं।
- मनोकामना पूर्ति: भक्तों की सद्भावित मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सभी शुभ लाभ प्राप्त होते हैं। पारिवारिक सुख और संतोष की प्राप्ति होती है।
- स्वास्थ्य और समृद्धि: देवी की कृपा से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, धन और समृद्धि प्राप्त होती है। आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
- आध्यात्मिक उन्नति: देवी के नाम का स्मरण आध्यात्मिक प्रगति में सहायक होता है और मोक्ष के मार्ग को सुगम बनाता है। भक्तों को दिव्य अनुभव प्राप्त होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री मूकांबिक अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
श्री मूकांबिक अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस नामावलि का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
श्री मूकांबिक अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री मूकांबिक अष्टोत्तर शतनामावलि का उद्गम या स्रोत क्या है?
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