आरती, चालीसा और भजन
ॐ जय जगदीश हरे, हनुमान चालीसा, शिव चालीसा, आरती कुंजबिहारी की से लेकर मीरा, सूर और तुलसी के भजन तक — पारंपरिक पाठ शुद्ध रूप में, हर पंक्ति के अर्थ और पढ़ने की विधि के साथ।
आरती
- श्री कृष्णआरती कुंजबिहारी कीआरती कुंजबिहारी की भगवान श्रीकृष्ण की सबसे लोकप्रिय आरती है, जो जन्माष्टमी, एकादशी और रोज़ की संध्या पूजा में गाई जाती है। इसमें कृष्ण के रूप, मुरली, मोर मुकुट और गंगा-उत्पत्ति वाले चरणों का वर्णन है।
- गंगा माँॐ जय गंगे माता आरतीॐ जय गंगे माता माँ गंगा की घर-घर गाई जाने वाली आरती है, जो गंगा दशहरा, गंगा सप्तमी, कार्तिक पूर्णिमा के स्नान और घाटों की संध्या आरती में गाई जाती है। इसमें राजा सगर के पुत्रों के उद्धार का ज़िक्र है।
- हनुमान जीआरती कीजै हनुमान लला कीआरती कीजै हनुमान लला की हनुमान जी की सबसे प्रसिद्ध आरती है, जो मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती और हनुमान चालीसा के पाठ के बाद गाई जाती है। इसमें लंका-दहन, संजीवनी और अहिरावण-वध जैसे प्रसंग आते हैं।
- माँ दुर्गाजय अम्बे गौरी आरतीजय अम्बे गौरी माँ दुर्गा की सबसे प्रसिद्ध आरती है, जो नवरात्रि के नौ दिन, दुर्गाष्टमी और हर शुक्रवार की देवी पूजा में गाई जाती है। इसमें माँ के श्रृंगार, सिंह वाहन और शुंभ-निशुंभ, महिषासुर, चंड-मुंड जैसे असुरों के वध का वर्णन है।
- गणेश जीजय गणेश जय गणेश देवा आरतीजय गणेश जय गणेश देवा भगवान गणेश की सबसे प्रचलित हिंदी आरती है, जो हर शुभ काम, गणेश चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी की पूजा में गाई जाती है। पूजा की शुरुआत गणेश वंदना से और अंत अक्सर इसी आरती से होता है।
- माँ लक्ष्मीॐ जय लक्ष्मी माता आरतीॐ जय लक्ष्मी माता माँ लक्ष्मी की सबसे प्रचलित आरती है, जो दीपावली की लक्ष्मी पूजा, शरद पूर्णिमा और हर शुक्रवार को गाई जाती है। इसमें लक्ष्मी जी को सुख-संपत्ति, सद्गुण और समुद्र-मंथन से निकले रत्नों की दाता बताया गया है।
- भगवान विष्णुॐ जय जगदीश हरे आरतीॐ जय जगदीश हरे भगवान विष्णु की वह आरती है जो उत्तर भारत के लगभग हर घर और मंदिर में पूजा के अंत में गाई जाती है। इसे 19वीं सदी में पं. श्रद्धाराम फिल्लौरी ने रचा था।
- भगवान शिवॐ जय शिव ओंकारा आरतीॐ जय शिव ओंकारा भगवान शिव की सबसे प्रचलित आरती है, जो सोमवार, सावन, प्रदोष और महाशिवरात्रि की पूजा में गाई जाती है। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और शिव को ओंकार के तीन रूप मानकर एक बताया गया है।
- माँ सरस्वतीजय सरस्वती माता आरतीजय सरस्वती माता विद्या और वाणी की देवी माँ सरस्वती की सबसे प्रचलित आरती है। बसंत पंचमी, स्कूल-कॉलेज की सरस्वती पूजा और पढ़ाई शुरू करने से पहले इसे गाया जाता है।
- सत्यनारायण भगवानजय लक्ष्मी रमणा – सत्यनारायण जी की आरतीजय लक्ष्मी रमणा भगवान सत्यनारायण की आरती है, जो सत्यनारायण व्रत कथा के पाँचों अध्याय पूरे होने के बाद गाई जाती है। इसके पदों में कथा के पात्रों, यानी गरीब ब्राह्मण, लकड़हारे, राजा चंद्रचूड़, साधु वैश्य और ग्वालों की झलक मिलती है।
- शनि देवजय जय श्री शनिदेव आरतीजय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी शनि देव की प्रचलित आरती है, जो शनिवार, शनि जयंती और शनि त्रयोदशी को गाई जाती है। इसमें शनि देव को सूर्य और छाया का पुत्र बताया गया है और उन्हें चढ़ने वाली चीज़ें गिनाई गई हैं।
- श्री रामआरती कीजै श्री रघुवर जी कीआरती कीजै श्री रघुवर जी की भगवान श्रीराम की प्रचलित आरती है, जो राम नवमी, विजयादशमी, दीपावली और रामायण या सुंदरकांड के पाठ के बाद गाई जाती है। इसमें राम को सत्-चित्-आनंद, मर्यादा पुरुषोत्तम और शरणागत-वत्सल कहा गया है।
- तुलसी माताजय जय तुलसी माता आरतीजय जय तुलसी माता तुलसी जी की प्रचलित आरती है, जो कार्तिक मास में रोज़ शाम तुलसी के पास दीया जलाकर और देवउठनी एकादशी के तुलसी विवाह पर गाई जाती है। इसमें तुलसी को हरि की प्रिया और रोग-दोष से रक्षा करने वाली बताया गया है।
चालीसा
- माँ दुर्गाश्री दुर्गा चालीसादुर्गा चालीसा देवीदास की रचना मानी जाती है, जिसमें माँ दुर्गा के अलग-अलग रूपों, असुर-संहार और भक्तों पर कृपा का वर्णन है। नवरात्रि, अष्टमी और शुक्रवार को इसका पाठ विशेष रूप से होता है।
- गणेश जीश्री गणेश चालीसागणेश चालीसा में दोहे के बाद चौपाइयों में गणपति का रूप, उनके जन्म और गजमुख मिलने की कथा, और प्रथम पूज्य बनने का प्रसंग गाया गया है। इसे बुधवार, संकष्टी चतुर्थी और गणेश चतुर्थी पर पढ़ा जाता है।
- हनुमान जीश्री हनुमान चालीसाहनुमान चालीसा गोस्वामी तुलसीदास की रचना है, जिसमें दो दोहों के बाद चालीस चौपाइयों में हनुमान जी के बल, बुद्धि और राम-भक्ति का गुणगान है। इसे रोज़, खासकर मंगलवार और शनिवार को, सुबह या शाम पढ़ा जाता है।
- माँ लक्ष्मीश्री लक्ष्मी चालीसालक्ष्मी चालीसा रामदास की रचना है, जिसमें दोहे और सोरठे के बाद चालीस चौपाइयों में सिंधु-सुता लक्ष्मी की स्तुति और पाठ का फल बताया गया है। इसे शुक्रवार, दीपावली और शरद पूर्णिमा पर पढ़ा जाता है।
- शनि देवश्री शनि चालीसाशनि चालीसा में दोहों के बाद चालीस चौपाइयों में शनि देव का रूप, उनके नाम, उनकी दशा से जुड़ी पौराणिक कथाएँ और वाहनों का फल बताया गया है। इसे शनिवार को, खासकर पीपल पूजा के समय, पढ़ा जाता है।
- भगवान शिवश्री शिव चालीसाशिव चालीसा अयोध्यादास की रचना है, जिसमें दोहे के बाद चालीस चौपाइयों में भोलेनाथ के रूप, लीलाओं और कृपा का वर्णन है। इसे सोमवार, प्रदोष, सावन और महाशिवरात्रि पर शिवलिंग के सामने पढ़ा जाता है।
स्तुति और अष्टक
- हनुमान जीश्री बजरंग बाणबजरंग बाण हनुमान जी की आग्रह भरी स्तुति है, जिसे परंपरा से तुलसीदास की रचना माना जाता है; इसमें भक्त हनुमान जी को राम की शपथ देकर तुरंत रक्षा के लिए पुकारता है। इसे मंगलवार या शनिवार को हनुमान चालीसा के बाद पढ़ा जाता है।
- हनुमान जीसंकटमोचन हनुमान अष्टकसंकटमोचन हनुमान अष्टक तुलसीदास की परंपरा से मानी जाने वाली आठ छंदों की स्तुति है, जिसमें हनुमान जी के आठ बड़े कामों को याद करके अपने संकट हरने की प्रार्थना की जाती है। इसे मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती पर चालीसा के बाद पढ़ा जाता है।
- श्री रामश्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन (श्री राम स्तुति)श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन गोस्वामी तुलसीदास की राम-स्तुति है, जिसके पहले पाँच छंद विनय पत्रिका से और बाकी रामचरितमानस के पुष्पवाटिका प्रसंग से हैं। इसे राम नवमी, विवाह पंचमी और रोज़ की संध्या आरती से पहले गाया जाता है।
भजन
- भगवान विष्णुअच्युतं केशवं (अच्युताष्टकम्)अच्युतं केशवं रामनारायणं आदि शंकराचार्य के नाम से प्रसिद्ध अच्युताष्टकम् का पहला श्लोक है, जिसमें राम और कृष्ण के नामों की माला गूँथी गई है। भजन के रूप में इसका पहला श्लोक टेक की तरह गाया जाता है, खासकर एकादशी और जन्माष्टमी पर।
- श्री कृष्णमैया मोरी मैं नहिं माखन खायोमैया मोरी मैं नहिं माखन खायो सूरदास का वात्सल्य पद है, जिसमें माखन चुराते पकड़े गए बालकृष्ण माँ यशोदा के सामने भोली दलीलें देते हैं और आखिरकार यशोदा हँसकर उन्हें गले लगा लेती हैं। इसे जन्माष्टमी पर खूब गाया जाता है।
- श्री कृष्णमेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोईमेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई मीराबाई का पद है, जिसमें वे घोषणा करती हैं कि श्रीकृष्ण ही उनके पति और सर्वस्व हैं, और उनके लिए उन्होंने कुल-मर्यादा और राजसी वैभव छोड़ दिया। इसे जन्माष्टमी और कृष्ण भजन संध्या में गाया जाता है।
- श्री कृष्णपायो जी मैंने राम रतन धन पायोपायो जी मैंने राम रतन धन पायो मीराबाई का पद है, जिसमें वे कहती हैं कि सतगुरु की कृपा से उन्हें राम-नाम का ऐसा अनमोल धन मिला है जो न घटता है, न लुटता है। इसे सत्संग, गुरु पूर्णिमा और जन्माष्टमी की भजन संध्या में गाया जाता है।
- श्री रामरघुपति राघव राजा राम (राम धुन)रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम उत्तर भारत की पारंपरिक राम धुन है, जिसका मूल रूप सीता-राम के नाम-जप पर टिका है। इसे प्रभात फेरी, कीर्तन, राम नवमी और दशहरा की शोभायात्राओं में गाया जाता है।
- श्री रामठुमक चलत रामचंद्र बाजत पैंजनियांठुमक चलत रामचंद्र तुलसीदास का पद है, जो गीतावली के बालकांड की परंपरा से आता है और इसमें नन्हे राम के ठुमककर चलने, गिरने और माताओं के दुलार की झाँकी है। इसे राम नवमी और राम जन्मोत्सव में गाया जाता है।
- भगवान विष्णुवैष्णव जन तो तेने कहियेवैष्णव जन तो तेने कहिये गुजरात के संत कवि नरसिंह मेहता का गुजराती पद है, जो बताता है कि सच्चा वैष्णव वही है जो दूसरों की पीड़ा समझे, सच बोले और लोभ-कपट से दूर रहे। यह महात्मा गांधी का प्रिय भजन था और प्रार्थना सभाओं में गाया जाता है।
