अच्युतं केशवं (अच्युताष्टकम्)
संक्षेप में:अच्युतं केशवं रामनारायणं आदि शंकराचार्य के नाम से प्रसिद्ध अच्युताष्टकम् का पहला श्लोक है, जिसमें राम और कृष्ण के नामों की माला गूँथी गई है। भजन के रूप में इसका पहला श्लोक टेक की तरह गाया जाता है, खासकर एकादशी और जन्माष्टमी पर।
पाठ
अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम् ।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे ॥ १॥
अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम् ।
इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दनं सन्दधे ॥ २॥
विष्णवे जिष्णवे शङ्खिने चक्रिणे रुक्मिणिरागिणे जानकीजानये ।
वल्लवीवल्लभायाऽर्चितायात्मने कंसविध्वंसिने वंशिने ते नमः ॥ ३॥
कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे ।
अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक ॥ ४॥
राक्षसक्षोभितः सीतया शोभितो दण्डकारण्यभूपुण्यताकारणः ।
लक्ष्मणेनान्वितो वानरैः सेवितोऽगस्त्यसम्पूजितो राघवः पातु माम् ॥ ५॥
धेनुकारिष्टकोऽनिष्टकृद्द्वेषिणां केशिहा कंसहृद्वंशिकावादकः ।
पूतनाकोपकः सूरजाखेलनो बालगोपालकः पातु माम् सर्वदा ॥ ६॥
विद्युदुद्योतवत्प्रस्फुरद्वाससं प्रावृडम्भोदवत्प्रोल्लसद्विग्रहम् ।
वन्यया मालया शोभितोरःस्थलं लोहिताङ्घ्रिद्वयं वारिजाक्षं भजे ॥ ७॥
कुञ्चितैः कुन्तलैर्भ्राजमानाननं रत्नमौलिं लसत्कुण्डलं गण्डयोः ।
हारकेयूरकं कङ्कणप्रोज्ज्वलं किङ्किणीमञ्जुलं श्यामलं तं भजे ॥ ८॥
अच्युतस्याष्टकं यः पठेदिष्टदं प्रेमतः प्रत्यहं पूरुषः सस्पृहम् ।
वृत्ततः सुन्दरं कर्तृ विश्वम्भरस्तस्य वश्यो हरिर्जायते सत्वरम् ॥ ९॥
अच्युतं केशवं: अच्युताष्टकम्
"अच्युतं केशवं रामनारायणं" आदि शंकराचार्य के नाम से प्रसिद्ध अच्युताष्टकम् का पहला श्लोक है। आठवीं सदी के आचार्य शंकर ने अद्वैत दर्शन के साथ-साथ भक्ति के कई सरल स्तोत्र भी रचे, और यह उनमें सबसे ज़्यादा गाया जाने वाला है। इसमें विष्णु के राम और कृष्ण, दोनों अवतारों के नाम एक माला की तरह गूँथे गए हैं। आठ श्लोक स्तुति के हैं और नौवाँ फलश्रुति है।
आज भजन के रूप में इसका पहला श्लोक ही टेक की तरह गाया जाता है, और कई गायक "अच्युतम् केशवम् कृष्ण दामोदरम्, राम नारायणम् जानकी वल्लभम्" के क्रम में इसे गाते हैं। इसके साथ अक्सर सुनाई देने वाली "कौन कहता है भगवान आते नहीं" जैसी पंक्तियाँ बाद की, आधुनिक रचना हैं, शंकराचार्य के स्तोत्र का हिस्सा नहीं; इसलिए उन्हें यहाँ शामिल नहीं किया गया है।
श्लोक-दर-श्लोक भाव
श्लोक 1: नामों की माला
मैं अच्युत, केशव, राम, नारायण, कृष्ण, दामोदर, वासुदेव, हरि, श्रीधर, माधव, गोपियों के प्रिय और जानकी के स्वामी रामचंद्र का भजन करता हूँ। "अच्युत" का अर्थ है जो कभी अपने स्थान से न गिरे, जो सदा एक-सा रहे।
श्लोक 2–3: कृष्ण और राम को प्रणाम
सत्यभामा के पति, राधा द्वारा पूजित, लक्ष्मी के निवास, देवकी और नंद के लाल को मैं मन में धारण करता हूँ। विष्णु, विजयी, शंख-चक्रधारी, रुक्मिणी के प्रिय, जानकी के पति, गोपियों के प्रिय, कंस का नाश करने वाले और बाँसुरी बजाने वाले को नमस्कार।
श्लोक 4: पुकार
हे कृष्ण, गोविंद, राम, नारायण, लक्ष्मीपति, वासुदेव, अजेय, अनंत, माधव, अधोक्षज, द्वारका के स्वामी और द्रौपदी के रक्षक! यह पूरा श्लोक संबोधन है, जैसे भक्त एक साँस में सारे नाम पुकार रहा हो।
श्लोक 5–6: रक्षा की प्रार्थना
राक्षसों को विचलित करने वाले, सीता के साथ शोभित, दंडकारण्य को पवित्र करने वाले, लक्ष्मण के साथ, वानरों से सेवित और अगस्त्य मुनि से पूजित राघव मेरी रक्षा करें। धेनुकासुर और अरिष्टासुर को मारने वाले, केशी और कंस का अंत करने वाले, बाँसुरी बजाने वाले, पूतना पर क्रोध करने वाले और यमुना किनारे खेलने वाले बाल-गोपाल सदा मेरी रक्षा करें।
श्लोक 7–8: श्याम रूप का ध्यान
बिजली जैसे चमकते पीतांबर वाले, वर्षा के बादल जैसे श्याम शरीर वाले, वनमाला से सजी छाती वाले, लाल चरणों और कमल-नयनों वाले प्रभु को भजता हूँ। घुँघराले बालों से शोभित मुख, रत्न-मुकुट, गालों पर झूलते कुंडल, हार, बाजूबंद, कंगन और करधनी की घुँघरियों से सजे श्यामसुंदर को भजता हूँ।
श्लोक 9: फलश्रुति
जो इस सुंदर छंद वाले, मनोकामना देने वाले अच्युताष्टक को प्रेम और लगन से रोज़ पढ़ता है, विश्व का भरण करने वाले हरि जल्दी ही उसके वश में हो जाते हैं, यानी उस पर प्रसन्न होते हैं।
कब और कैसे पढ़ें
अच्युताष्टकम् सुबह की पूजा में, एकादशी के दिन और कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष रूप से पढ़ा जाता है। एकादशी का व्रत रखने वाले एकादशी व्रत कथा के बाद इसे गाते हैं, फिर ॐ जय जगदीश हरे की आरती करते हैं। संस्कृत के उच्चारण पर ध्यान दें; शुरुआत में केवल पहला श्लोक भी रोज़ गाया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अच्युतं केशवं किसने लिखा?
यह अच्युताष्टकम् का पहला श्लोक है, जिसे परंपरा में आदि शंकराचार्य की रचना माना जाता है।
'अच्युत' का अर्थ क्या है?
अच्युत यानी जो कभी अपने स्थान या स्वभाव से न गिरे, जो सदा अटल रहे। यह विष्णु का एक नाम है।
क्या 'कौन कहता है भगवान आते नहीं' अच्युताष्टकम् का हिस्सा है?
नहीं, ये पंक्तियाँ बाद की आधुनिक रचना हैं। शंकराचार्य के अच्युताष्टकम् में आठ स्तुति-श्लोक और एक फलश्रुति श्लोक हैं।
अच्युताष्टकम् कब पढ़ना चाहिए?
रोज़ सुबह की पूजा में, और विशेष रूप से एकादशी व कृष्ण जन्माष्टमी पर इसे पढ़ा या गाया जाता है।
इस स्तोत्र में राम और कृष्ण दोनों के नाम क्यों हैं?
दोनों विष्णु के अवतार हैं। अच्युताष्टकम् विष्णु के इन दोनों रूपों को एक ही परमात्मा मानकर उनकी स्तुति करता है।
