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रघुपति राघव राजा राम (राम धुन)

भजनश्री रामरचना: पारंपरिक (राम धुन)

संक्षेप में:रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम उत्तर भारत की पारंपरिक राम धुन है, जिसका मूल रूप सीता-राम के नाम-जप पर टिका है। इसे प्रभात फेरी, कीर्तन, राम नवमी और दशहरा की शोभायात्राओं में गाया जाता है।

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पाठ

रघुपति राघव राजा राम

पतित पावन सीता राम

सीता राम सीता राम

भज प्यारे तू सीता राम

रघुपति राघव राजा राम: पारंपरिक राम धुन

"रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीता राम" उत्तर भारत की सबसे जानी-पहचानी राम धुन है। इसके रचयिता के बारे में पक्की जानकारी नहीं है। एक परंपरा इसे श्री लक्ष्मणाचार्य के श्री नाम रामायणम् से जोड़ती है, दूसरी तुलसीदास या समर्थ रामदास की परंपरा से। स्वतंत्रता आंदोलन के समय पं. विष्णु दिगंबर पलुस्कर की धुन में यह गाँव-गाँव पहुँची और महात्मा गांधी की प्रार्थना सभाओं का हिस्सा बनी।

यहाँ धुन का पारंपरिक रूप दिया गया है, जो "...सीता राम" पर ही टिका है। गांधी जी के समय इसमें "ईश्वर अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान" जैसी पंक्तियाँ जोड़ी गईं, जो बाद का राजनीतिक-सामाजिक रूप है, मूल भजन का हिस्सा नहीं। कुछ भजन-संग्रहों में इसके साथ "सुंदर विग्रह मेघश्याम, गंगा तुलसी शालग्राम" जैसी नाम-माला वाली पंक्तियाँ भी मिलती हैं, जिन्हें लक्ष्मणाचार्य की परंपरा से जोड़ा जाता है। धुन गाते समय कई मंडलियाँ "भज प्यारे तू" की जगह "भज मन प्यारे सीता राम" भी गाती हैं।

पंक्ति-दर-पंक्ति अर्थ

रघुपति राघव राजा राम

रघुकुल के स्वामी, रघु के वंशज, राजा राम। तीनों नाम एक ही राम के हैं: वे रघुवंश की मर्यादा के रक्षक भी हैं और प्रजा का पालन करने वाले आदर्श राजा भी।

पतित पावन सीता राम

गिरे हुए, भटके हुए लोगों को पवित्र करने वाले सीता-राम। धुन में राम का नाम सीता के साथ लिया जाता है, क्योंकि उत्तर भारत की भक्ति में सीता-राम युगल रूप में पूजे जाते हैं।

सीता राम सीता राम, भज प्यारे तू सीता राम

यह पंक्ति मन को पुकार है: हे प्यारे, बस सीता-राम का भजन कर। नाम-जप की परंपरा में यही दोहराव धुन की शक्ति है; जितनी बार नाम आता है, मन उतना ही उसमें रमता है।

कब और कैसे गाएँ

राम धुन प्रभात फेरी, संध्या-भजन और अखंड कीर्तन में गाई जाती है। राम नवमी और विजयादशमी की शोभायात्राओं में भी यह गूँजती है। धुन को धीरे शुरू करके धीरे-धीरे लय बढ़ाना पारंपरिक तरीका है। धुन के बाद श्री राम जी की आरती करें, और समय हो तो श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन की स्तुति भी गाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रघुपति राघव राजा राम किसने लिखा?

इसके रचयिता के बारे में निश्चित जानकारी नहीं है। परंपरा इसे श्री लक्ष्मणाचार्य के नाम रामायणम् से, तो कुछ लोग तुलसीदास या समर्थ रामदास की परंपरा से जोड़ते हैं।

क्या 'ईश्वर अल्लाह तेरो नाम' मूल भजन का हिस्सा है?

नहीं, यह पंक्ति स्वतंत्रता आंदोलन के समय गांधी जी की प्रार्थना सभाओं में जोड़ी गई थी। पारंपरिक धुन 'पतित पावन सीता राम' और 'भज प्यारे तू सीता राम' पर टिकी है।

'पतित पावन' का अर्थ क्या है?

पतित पावन यानी गिरे हुए या पाप में फँसे लोगों को पवित्र करने वाले।

राम धुन कब गाई जाती है?

प्रभात फेरी, संध्या भजन, अखंड कीर्तन और राम नवमी व विजयादशमी की शोभायात्राओं में राम धुन गाई जाती है।

इस धुन की प्रसिद्ध धुन किसने बनाई?

आज जो धुन सबसे प्रचलित है, उसे पं. विष्णु दिगंबर पलुस्कर से जोड़ा जाता है।