विजयादशमी (दशहरा)
विजयादशमी या दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। यह श्रीराम की रावण पर और माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय का पर्व है, जो शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों के बाद आता है। उत्तर भारत में इस शाम रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं।
क्या है और क्यों मनाते हैं
रामायण की परंपरा में दशमी के दिन श्रीराम ने लंका में रावण का वध किया था, इसलिए यह अधर्म पर धर्म की जीत का दिन है। देवी पुराणों के अनुसार माँ दुर्गा ने नौ दिन युद्ध कर दसवें दिन महिषासुर का अंत किया। महाभारत से जुड़ी मान्यता है कि अज्ञातवास के बाद पांडवों ने शमी के पेड़ में छिपाए अपने शस्त्र इसी दिन निकाले थे।
किस तिथि को
आश्विन शुक्ल दशमी। जिस दिन अपराह्न (दोपहर बाद का भाग) में दशमी हो, वही दिन विजयादशमी माना जाता है; श्रवण नक्षत्र का साथ हो तो और शुभ है। अपराह्न के भीतर का विजय मुहूर्त शमी पूजा और नए कामों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इसे अबूझ मुहूर्त भी माना जाता है।
कैसे मनाते हैं
- सुबह देवी प्रतिमा और कलश का विसर्जन; नवरात्रि में उगे जौ (जवारे) कान के पीछे या टोपी में लगाए जाते हैं।
- दोपहर बाद शमी वृक्ष और अपराजिता देवी की पूजा, शस्त्र और औज़ारों की पूजा, और बहीखाते या वाहनों की पूजा।
- शाम को रामलीला मैदान में रावण दहन; लौटते समय शमी के पत्ते "सोना" कहकर बड़ों को देकर आशीर्वाद लेना।
- इस दिन नीलकंठ पक्षी का दिखना शुभ माना जाता है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
कुल्लू का दशहरा इसी दिन से सात दिन चलता है, बंगाल में सिंदूर खेला के साथ दुर्गा विसर्जन होता है और मैसूर का दशहरा अपनी शोभा यात्रा के लिए प्रसिद्ध है। नौ दिनों की पूजा के लिए शारदीय नवरात्रि और महानवमी देखें। पूजा के बाद श्री राम जी की आरती गाएँ; ठीक बीस दिन बाद दिवाली आती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दशहरा किस तिथि को मनाया जाता है?
दशहरे पर शमी की पूजा क्यों करते हैं?
दशहरे पर क्या करें?
दशहरा और विजयादशमी में क्या अंतर है?
क्या दशहरे पर नया काम शुरू कर सकते हैं?
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