2026

दीपावली 2026

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मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

दीपावली

दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है, जब शाम के प्रदोष काल में माँ लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा होती है और पूरा घर दीयों से सजता है। उत्तर भारत में यह भगवान राम के लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने की खुशी का पर्व है।

क्या है और क्यों मनाते हैं

रामायण की परंपरा में अयोध्यावासियों ने राम, सीता और लक्ष्मण के स्वागत में घी के दीप जलाए थे। पुराणों में इसी रात समुद्र मंथन से निकली लक्ष्मी की पूजा का विधान है। जैन समाज इसे भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में और सिख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाता है।

किस तिथि को

पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार कार्तिक अमावस्या; अमांत पंचांग में यही आश्विन अमावस्या कहलाती है, पर दिन वही रहता है। जिस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद लगभग ढाई घंटे) में अमावस्या हो, उसी दिन दीपावली मानी जाती है। पूजा के लिए स्थिर लग्न, खासकर वृषभ लग्न, को उत्तम मानते हैं।

पाँच दिन का उत्सव

  • धनतेरस: बर्तन या धातु की खरीद और यम दीपदान।
  • नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): अभ्यंग स्नान और यम के नाम दीया।
  • दीपावली: लक्ष्मी-गणेश पूजन, खील-बताशे, दीपदान।
  • गोवर्धन पूजा और अन्नकूट।
  • भाई दूज।

कैसे मनाते हैं

हफ़्तों पहले से घर की सफ़ाई और रंगाई होती है, क्योंकि मान्यता है कि लक्ष्मी स्वच्छ घर में आती हैं। शाम को चौकी पर लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति, कलश, बही-खाते और सिक्के रखकर पूजा होती है, फिर घर के हर कोने में दीये रखे जाते हैं। पूरी विधि दिवाली लक्ष्मी पूजन विधि और सामान दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट में है। व्यापारी इस दिन नई बही शुरू करते हैं। बंगाल, ओडिशा और मिथिला में इसी रात काली पूजा होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीपावली किस तिथि को होती है?
कार्तिक अमावस्या को, जिस दिन प्रदोष काल में अमावस्या हो। अमांत पंचांग में इसे आश्विन अमावस्या कहते हैं, पर दिन एक ही है।
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कब करें?
सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में, और हो सके तो स्थिर वृषभ लग्न में। इस साल का मुहूर्त इसी पृष्ठ पर ऊपर दिया गया है।
दिवाली पर किसकी पूजा होती है?
माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की, साथ में कुबेर, सरस्वती और बही-खातों की पूजा भी की जाती है।
दीपावली के पाँच दिन कौन से हैं?
धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली (लक्ष्मी पूजा), गोवर्धन पूजा और भाई दूज।
दिवाली पर कितने दीये जलाने चाहिए?
कोई तय संख्या ज़रूरी नहीं है। परंपरा में पूजा स्थान, मुख्य द्वार, तुलसी, रसोई और पानी के स्थान पर दीया अवश्य रखा जाता है।

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