नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली)
नरक चतुर्दशी क्या है और क्यों मनाते हैं
नरक चतुर्दशी दीपावली से एक दिन पहले आने वाला पर्व है, जिसे उत्तर भारत में छोटी दीपावली, रूप चौदस और नरक चौदस भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय से पहले तेल-उबटन लगाकर स्नान किया जाता है और शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी तिथि पर नरकासुर का वध करके उसकी कैद से सोलह हज़ार स्त्रियों को मुक्त कराया था।
किस तिथि को मनाते हैं
पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार यह कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी है; अमांत पंचांग (गुजरात, महाराष्ट्र, दक्षिण भारत) में यही तिथि आश्विन कृष्ण चतुर्दशी कहलाती है। दिन तय करने में अरुणोदय काल निर्णायक है, यानी सूर्योदय से पहले के लगभग डेढ़ घंटे में चतुर्दशी होनी चाहिए, क्योंकि अभ्यंग स्नान उसी समय होता है। इसलिए कई बार यह पर्व दीपावली वाले दिन ही सुबह पड़ जाता है।
कैसे मनाते हैं
- अभ्यंग स्नान: भोर में तिल के तेल की मालिश, फिर बेसन-हल्दी के उबटन से स्नान। कई घरों में स्नान के समय अपामार्ग (चिरचिटा) की टहनी सिर के ऊपर घुमाई जाती है।
- यम दीपक: शाम को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके चौमुखा या आटे का दीया जलाया जाता है। पूरी विधि यम दीपक और रूप चौदस की विधि में दी गई है।
- रूप चौदस: राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में महिलाएँ इस दिन विशेष श्रृंगार करती हैं, इसलिए इसे रूप निखारने का दिन भी माना जाता है।
- घर की सफ़ाई पूरी करके शाम को छोटे-छोटे दीये जलाए जाते हैं, इसी से नाम पड़ा छोटी दीपावली।
क्षेत्रीय परंपराएँ
अयोध्या और उत्तर भारत के कई हनुमान मंदिरों में इसी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जयंती भी मनाई जाती है, जबकि बहुत से स्थानों पर चैत्र पूर्णिमा वाली हनुमान जयंती प्रचलित है। बंगाल में इसी रात भूत चतुर्दशी मनाई जाती है और चौदह दीये जलाए जाते हैं। दक्षिण भारत में यही दिन मुख्य दीपावली की तरह मनता है।
पाँच दिन के उत्सव का क्रम समझने के लिए धनतेरस की कथा, फिर दीपावली और गोवर्धन पूजा के पृष्ठ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली क्यों कहते हैं?
नरक चतुर्दशी किस तिथि को होती है?
यम दीपक कब और किस दिशा में जलाएं?
अभ्यंग स्नान कैसे करें?
क्या नरक चतुर्दशी पर हनुमान जयंती भी होती है?
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