गोवर्धन पूजा
गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, आम तौर पर दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है। इस दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर उसकी पूजा होती है और भगवान कृष्ण को छप्पन भोग या अन्नकूट चढ़ाया जाता है।
क्या है और क्यों मनाते हैं
भागवत पुराण की कथा है कि ब्रज के लोग हर साल इंद्र की पूजा करते थे। बालक कृष्ण ने उन्हें समझाया कि गाय, खेत और वर्षा देने वाला गोवर्धन पर्वत ही उनका असली सहारा है। इंद्र ने नाराज़ होकर सात दिन तक मूसलाधार बारिश की, तब कृष्ण ने गोवर्धन को अपनी छोटी उँगली पर उठाकर पूरे ब्रज को उसके नीचे शरण दी। इंद्र का घमंड टूटा और तभी से यह पूजा शुरू हुई।
किस तिथि को
कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा। जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो, वही दिन लिया जाता है। कभी-कभी अमावस्या लंबी चलने से दीपावली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर आ जाता है। इसके अगले दिन भाई दूज होता है।
कैसे मनाते हैं
- आँगन में गोबर से लेटे हुए पुरुष के आकार में गोवर्धन बनाकर रुई, फूल, खील और दीयों से सजाया जाता है।
- शाम को परिवार रोली-अक्षत, दूध, बताशे से पूजा करके उसकी सात परिक्रमा करता है।
- अन्नकूट: कढ़ी-चावल, बाजरा, मिली-जुली सब्ज़ियाँ, पूड़ी और मिठाइयों का बड़ा भोग, जो बाद में सबमें बँटता है।
- गाय-बैलों को नहलाकर, सजाकर गुड़ और चारा खिलाया जाता है।
पूरी विधि गोवर्धन पूजा और अन्नकूट विधि में है। पूजा के बाद आरती कुंजबिहारी की गाई जाती है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
मथुरा के पास गोवर्धन में लाखों लोग 21 किलोमीटर की गिरिराज परिक्रमा करते हैं। नाथद्वारा में श्रीनाथजी का अन्नकूट प्रसिद्ध है, और गुजरात में यह दिन नववर्ष (बेसतु वरस) भी है। कई जगह इसी दिन विश्वकर्मा पूजा और औज़ारों की पूजा भी होती है। पूरे पाँच दिन के क्रम के लिए दीपावली पृष्ठ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोवर्धन पूजा कब होती है?
अन्नकूट क्या है?
गोवर्धन पूजा में गोबर से क्या बनाते हैं?
गोवर्धन पूजा किसकी होती है?
गोवर्धन परिक्रमा कितनी लंबी है?
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