भाई दूज
भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, दीपावली के दो दिन बाद मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई को तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई बहन के घर भोजन करता है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।
क्या है और क्यों मनाते हैं
कथा के अनुसार यमराज बहुत समय बाद अपनी बहन यमुना के घर गए। यमुना ने उनका आदर से तिलक किया और भोजन कराया। प्रसन्न होकर यम ने वर दिया कि इस दिन जो भाई बहन के घर तिलक करवाकर भोजन करेगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। पूरी कहानी भाई दूज की कथा में है। इसी कारण मथुरा के विश्राम घाट पर इस दिन भाई-बहन साथ यमुना स्नान करते हैं।
किस तिथि को
कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष, द्वितीया। तिलक के लिए अपराह्न (दोपहर बाद) का समय सबसे उचित माना जाता है, इसलिए जिस दिन अपराह्न में द्वितीया हो वही दिन लिया जाता है। यह गोवर्धन पूजा के अगले दिन आता है।
कैसे मनाते हैं
- थाली में रोली, अक्षत, दीया, मिठाई, नारियल का गोला और कलावा।
- भाई को पूर्व या उत्तर मुख बिठाकर तिलक, आरती और मिठाई; भाई उपहार देता है।
- बहन के हाथ का बना भोजन, यही इस दिन का असली नियम है।
तिलक की थाली और क्रम भाई दूज तिलक विधि में विस्तार से है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
बिहार और पूर्वांचल में "गोधन कूटना" होता है: बहनें गोबर से गोधन बनाकर कूटती हैं, भाइयों को पहले श्राप देती हैं और फिर रेंगनी के काँटे से जीभ छूकर प्रायश्चित करते हुए उनकी लंबी उम्र माँगती हैं। कायस्थ परिवार इसी दिन चित्रगुप्त पूजा और कलम-दवात पूजन करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाई दूज किस तिथि को होता है?
भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?
भाई दूज पर तिलक कैसे करें?
अगर भाई दूर हो तो क्या करें?
गोधन कूटना क्या है?
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