सत्यनारायण पूजा तिथियाँ 2026
वर्ष 2026 की सभी तिथियाँ, New Delhi, India के समय सहित।
सत्यनारायण पूजा
सत्यनारायण पूजा भगवान विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा और कथा है, जो उत्तर भारत में ज़्यादातर हर महीने की पूर्णिमा को की जाती है। गृह प्रवेश, विवाह, जन्मदिन या कोई मन्नत पूरी होने पर भी परिवार इसे करवाते हैं।
क्या है और क्यों करते हैं
इसकी कथा स्कन्द पुराण के रेवा खंड से ली गई मानी जाती है। कथा में बताया गया है कि नारद जी के पूछने पर स्वयं भगवान विष्णु ने कलियुग में दुख दूर करने का सरल उपाय यही व्रत बताया। पाँच अध्यायों में गरीब ब्राह्मण, लकड़हारे, राजा उल्कामुख, साधु वैश्य और राजा तुंगध्वज की कहानियाँ हैं, जिनका सार यह है कि संकल्प लेकर भूलना नहीं चाहिए और प्रसाद का अनादर नहीं करना चाहिए।
किस दिन करें
सबसे प्रचलित दिन पूर्णिमा है; जिस दिन पूर्णिमा तिथि हो, उस शाम पूजा रखी जाती है। कथा में यह भी कहा गया है कि श्रद्धा हो तो किसी भी दिन यह पूजा की जा सकती है, इसलिए संक्रांति, एकादशी या पारिवारिक शुभ अवसरों पर भी इसे रखा जाता है।
पूजा कैसे होती है
- चौकी पर पीला कपड़ा, केले के पत्तों या खंभों से छोटा मंडप, बीच में कलश और सत्यनारायण भगवान का चित्र या शालिग्राम।
- गणेश, गौरी, नवग्रह का पूजन कर पंचामृत से अभिषेक, तुलसी दल, पीले फूल, फल और पान-सुपारी।
- प्रसाद में भुने आटे की पंजीरी, केला, पंचामृत और तुलसी; कई घरों में सूजी का हलवा भी बनता है।
- पाँचों अध्याय की सत्यनारायण व्रत कथा सुनना, फिर जय लक्ष्मी रमणा आरती और सबको प्रसाद।
पूरी सामग्री सूची और क्रम सत्यनारायण पूजा सामग्री और विधि में दिया गया है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सत्यनारायण पूजा कब करनी चाहिए?
सत्यनारायण पूजा का प्रसाद क्या होता है?
सत्यनारायण कथा किस पुराण से है?
क्या सत्यनारायण पूजा में व्रत रखना ज़रूरी है?
सत्यनारायण पूजा घर पर खुद कर सकते हैं?
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