- ॐ सत्यदेवाय नमः
- ॐ सत्यात्मने नमः
- ॐ सत्यभूताय नमः
- ॐ सत्यपुरुषाय नमः
- ॐ सत्यनाथाय नमः
- ॐ सत्यसाक्षिणे नमः
- ॐ सत्ययोगाय नमः
- ॐ सत्यज्ञानाय नमः
- ॐ सत्यज्ञानप्रियाय नमः
- ॐ सत्यनिधये नमः
- ॐ सत्यसंभवाय नमः
- ॐ सत्यप्रभुवे नमः
- ॐ सत्येश्वराय नमः
- ॐ सत्यकर्मणे नमः
- ॐ सत्यपवित्राय नमः
- ॐ सत्यमंगळाय नमः
- ॐ सत्यगर्भाय नमः
- ॐ सत्यप्रजापतये नमः
- ॐ सत्यविक्रमाय नमः
- ॐ सत्यसिद्धाय नमः
- ॐ सत्याच्युताय नमः
- ॐ सत्यवीराय नमः
- ॐ सत्यबोधाय नमः
- ॐ सत्यधर्माय नमः
- ॐ सत्यग्रजाय नमः
- ॐ सत्यसंतुष्टाय नमः
- ॐ सत्यवराहाय नमः
- ॐ सत्यपारायणाय नमः
- ॐ सत्यपूर्णाय नमः
- ॐ सत्यौषधाय नमः
- ॐ सत्यशाश्वताय नमः
- ॐ सत्यप्रवर्धनाय नमः
- ॐ सत्यविभवे नमः
- ॐ सत्यज्येष्ठाय नमः
- ॐ सत्यश्रेष्ठाय नमः
- ॐ सत्यविक्रमिणे नमः
- ॐ सत्यधन्विने नमः
- ॐ सत्यमेधाय नमः
- ॐ सत्याधीशाय नमः
- ॐ सत्यक्रतवे नमः
- ॐ सत्यकालाय नमः
- ॐ सत्यवत्सलाय नमः
- ॐ सत्यवसवे नमः
- ॐ सत्यमेघाय नमः
- ॐ सत्यरुद्राय नमः
- ॐ सत्यब्रह्मणे नमः
- ॐ सत्यामृताय नमः
- ॐ सत्यवेदांगाय नमः
- ॐ सत्यचतुरात्मने नमः
- ॐ सत्यभोक्त्रे नमः
- ॐ सत्यशुचये नमः
- ॐ सत्यार्जिताय नमः
- ॐ सत्येंद्राय नमः
- ॐ सत्यसंगराय नमः
- ॐ सत्यस्वर्गाय नमः
- ॐ सत्यनियमाय नमः
- ॐ सत्यमेधाय नमः
- ॐ सत्यवेद्याय नमः
- ॐ सत्यपीयूषाय नमः
- ॐ सत्यमायाय नमः
- ॐ सत्यमोहाय नमः
- ॐ सत्यसुरानंदाय नमः
- ॐ सत्यसागराय नमः
- ॐ सत्यतपसे नमः
- ॐ सत्यसिंहाय नमः
- ॐ सत्यमृगाय नमः
- ॐ सत्यलोकपालकाय नमः
- ॐ सत्यस्थिताय नमः
- ॐ सत्यदिक्पालकाय नमः
- ॐ सत्यधनुर्धराय नमः
- ॐ सत्यांबुजाय नमः
- ॐ सत्यवाक्याय नमः
- ॐ सत्यगुरवे नमः
- ॐ सत्यन्यायाय नमः
- ॐ सत्यसाक्षिणे नमः
- ॐ सत्यसंवृताय नमः
- ॐ सत्यसंप्रदाय नमः
- ॐ सत्यवह्नये नमः
- ॐ सत्यवायवे नमः
- ॐ सत्यशिखराय नमः
- ॐ सत्यानंदाय नमः
- ॐ सत्याधिराजाय नमः
- ॐ सत्यश्रीपादाय नमः
- ॐ सत्यगुह्याय नमः
- ॐ सत्योदराय नमः
- ॐ सत्यहृदयाय नमः
- ॐ सत्यकमलाय नमः
- ॐ सत्यनाळाय नमः
- ॐ सत्यहस्ताय नमः
- ॐ सत्यबाहवे नमः
- ॐ सत्यमुखाय नमः
- ॐ सत्यजिह्वाय नमः
- ॐ सत्यदौंष्ट्राय नमः
- ॐ सत्यनाशिकाय नमः
- ॐ सत्यश्रोत्राय नमः
- ॐ सत्यचक्षुषे नमः
- ॐ सत्यशिरसे नमः
- ॐ सत्यमुकुटाय नमः
- ॐ सत्यांबराय नमः
- ॐ सत्याभरणाय नमः
- ॐ सत्यायुधाय नमः
- ॐ सत्यश्रीवल्लभाय नमः
- ॐ सत्यगुप्ताय नमः
- ॐ सत्यपुष्कराय नमः
- ॐ सत्यदृढाय नमः
- ॐ सत्यभामावतारकाय नमः
- ॐ सत्यगृहरूपिणे नमः
- ॐ सत्यप्रहरणायुधाय नमः
- ॐ सत्यनारायणदेवताभ्यो नमः
|| श्री सत्यनारायण अष्टोत्तर शतनामावळी संपूर्णं ||
अर्थ
श्री सत्यनारायण अष्टोत्तर शतनामावली भगवान विष्णु के सत्य स्वरूप श्री सत्यनारायण को समर्पित 108 पवित्र नामों का स्तोत्र है। 'अष्टोत्तर शत' का अर्थ है 108, और 'नामावली' का अर्थ है नामों की सूची। यह दिव्य नामावली भगवान के विभिन्न गुणों, लक्षणों और दिव्य शक्तियों की स्तुति करती है। विशेष रूप से सत्यनारायण व्रत और पूजा के समय इस नामावली का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह भक्तों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।
इस नामावली का प्रत्येक नाम 'सत्य' के मूलभूत सिद्धांत पर आधारित है। 'सत्य' का अर्थ है शाश्वत, सार्वभौमिक और अपरिवर्तनीय सत्य। भगवान सत्यनारायण इसी सत्य का साकार रूप हैं। इस स्तोत्र का पाठ भक्तों को बाहरी दुनिया की मिथ्या से दूर रखकर, आंतरिक सत्य की अनुभूति कराता है। यह केवल शब्दों का पाठ नहीं, बल्कि भगवान के सत्य स्वरूप के साथ हमारी आत्मा को जोड़ने का एक गहरा आध्यात्मिक अभ्यास है। सत्य को समझने और सत्य में स्थित होने से जीवन में शांति, संतोष और समृद्धि प्राप्त करने में यह सहायक है।
इस नामावली में आने वाले 'ॐ सत्यदेवाय नमः' (सत्य के अधिपति को नमस्कार), 'ॐ सत्यात्मने नमः' (जिसका सत्य ही आत्मा है उसे नमस्कार), 'ॐ सत्यभूताय नमः' (जो सत्य से ही उत्पन्न हुआ है उसे नमस्कार), 'ॐ सत्यपुरुषाय नमः' (सत्यमय पुरुष को नमस्कार), 'ॐ सत्यनाथाय नमः' (सत्य के स्वामी को नमस्कार), 'ॐ सत्यसाक्षिणे नमः' (सत्य के साक्षी को नमस्कार) जैसे नाम बताते हैं कि भगवान किस प्रकार सत्य के विभिन्न आयामों में निवास करते हैं। प्रत्येक नाम भगवान के सत्य स्वरूप के एक विशिष्ट गुण को उजागर करता है, उनकी सर्वव्यापकता और सर्वज्ञता का बखान करता है। इन नामों का पाठ करने से हमारा मन शुद्ध होता है और सत्य के प्रति झुकाव बढ़ता है।
श्री सत्यनारायण अष्टोत्तर शतनामावली का भक्तिपूर्वक पाठ करने से भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। यह नकारात्मक शक्तियों को दूर करके शुभता लाता है। भगवान के सत्य स्वरूप का निरंतर स्मरण करने से मन में शांति, संतोष और धैर्य बढ़ता है। यह कठिन समय में साहस प्रदान करता है और समस्याओं का सामना करने की शक्ति देता है। यह भक्तों को आध्यात्मिक रूप से उन्नत करके मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
लाभ (Benefits):
- समृद्धि और सुख: सत्यनारायण के 108 नामों का पाठ करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। सभी प्रकार की कमी दूर होती है और आर्थिक उन्नति होती है।
- मनोकामना पूर्ति: भक्तिपूर्वक इस नामावली का पाठ करने वाले भक्तों की सभी सद्इच्छाएँ और मनोकामनाएँ सत्यनारायण की कृपा से पूरी होती हैं।
- मानसिक शांति और धैर्य: इन नामों का जाप करने से मन की चिंता, भय और तनाव कम होते हैं, जिससे आंतरिक शांति और धैर्य प्राप्त होता है। कठिन समय में मानसिक स्थिरता बनी रहती है।
- पाप मुक्ति और शुद्धिकरण: सत्यनारायण के नाम स्मरण से जाने-अनजाने में किए गए पाप धुल जाते हैं और मन तथा शरीर शुद्ध होता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: यह सत्य के ज्ञान को बढ़ाता है और आत्मज्ञान को प्रेरित करता है। यह भक्तों को मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने में सहायता करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री सत्यनारायण अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
श्री सत्यनारायण अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस नामावली का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
कौन इस नामावली का पाठ कर सकता है?
इस नामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तोत्र का मूल क्या है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
