सत्यनारायण पूजा सामग्री और विधि

सत्यनारायण पूजा के लिए चौकी, पीला कपड़ा, केले के पत्ते, कलश, पंचामृत, तुलसी, पंजीरी, केले, फल-फूल, धूप-दीप और कथा की पुस्तक चाहिए। पूजा आम तौर पर पूर्णिमा की शाम, गृह प्रवेश या मनौती पूरी होने पर होती है और इसमें गणेश पूजन, संकल्प, भगवान का पूजन, पाँच अध्याय की कथा, आरती और प्रसाद वितरण होता है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 6 मिनट का पाठ
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सत्यनारायण पूजा भगवान विष्णु के सत्य स्वरूप की पूजा है, जिसकी कथा स्कन्द पुराण के रेवा खंड से ली जाती है। इसके लिए बहुत बड़ा तामझाम नहीं चाहिए: एक साफ़ चौकी, केले के पत्तों का छोटा-सा मंडप, कलश, पंचामृत, तुलसी और पंजीरी का प्रसाद ही इसकी जान है। नीचे पूरी सामग्री लिस्ट, पूजा का क्रम और घर पर खुद करने का तरीका दिया गया है।

कब कराते हैं: पूर्णिमा, गृह प्रवेश, मनौती

उत्तर भारत के ज़्यादातर घरों में सत्यनारायण भगवान की कथा हर महीने की पूर्णिमा को होती है। कई परिवार इसे महीने का नियम बना लेते हैं, तो कई साल में एक-दो बार ही कराते हैं। हर महीने की पूर्णिमा की तिथि आप पूर्णिमा व्रत कैलेंडर में और सत्यनारायण पूजा के दिन सत्यनारायण पूजा कैलेंडर में देख सकते हैं।

पूर्णिमा के अलावा ये मौके भी बहुत आम हैं:

  • गृह प्रवेश के बाद नए घर में पहली कथा
  • शादी के बाद, जब नई बहू घर आती है
  • बच्चे का जन्म, मुंडन या नौकरी लगने पर
  • कोई मनौती पूरी होने पर, जैसे परीक्षा में सफलता या बीमारी से ठीक होना
  • एकादशी, संक्रांति या किसी भी शुभ दिन, जब मन हो

कथा का सबसे प्रचलित समय शाम का है, सूर्यास्त के आसपास, जब घर के सब लोग इकट्ठा हो सकें। सुबह करने में भी कोई दोष नहीं है।

सत्यनारायण पूजा सामग्री लिस्ट

पूजा से एक दिन पहले यह लिस्ट मिलाकर सामान जुटा लें, ताकि ऐन वक्त पर भागदौड़ न हो।

सामग्रीकितना / कैसान मिले तो
चौकी या पाटाएक, साफ़ धुला हुआसाफ़ लकड़ी का तख्ता या ऊँची थाली
पीला या लाल कपड़ाचौकी पर बिछाने लायककोई भी नया, साफ़ कपड़ा
केले के पत्ते और तने4 खंभे या 4-5 पत्तेआम के पत्तों की बंदनवार
सत्यनारायण भगवान की तस्वीर या शालिग्रामएकविष्णु जी या लक्ष्मी-नारायण की तस्वीर
कलश, आम के पत्ते, नारियलएक तांबे या मिट्टी का कलशस्टील का लोटा
गणेश-गौरी के लिए सुपारी2 साबुत सुपारीगणेश जी की छोटी मूर्ति
रोली, चंदन, हल्दी, अक्षतथोड़ा-थोड़ाकुमकुम और साबुत चावल काफ़ी हैं
मौली (कलावा), जनेऊएक-एकसिर्फ़ मौली
पंचामृतदूध, दही, घी, शहद, शक्करकच्चा दूध और गंगाजल
तुलसी दलकम से कम 11 पत्तेतुलसी के बिना भोग अधूरा माना जाता है, पड़ोस से माँग लें
पंजीरीसवा पाव से सवा किलो, घर की परंपरा अनुसारसूजी का हलवा या बूरा-चने
केले और मौसमी फलकम से कम 5 केलेजो फल मौसम में हों
पान, सुपारी, लौंग, इलायची5-5लौंग-इलायची काफ़ी हैं
फूल, माला, दूर्वापीले फूल अच्छे माने जाते हैंगेंदे के फूल
धूप, अगरबत्ती, घी का दीपक, कपूरआरती के लिएसरसों के तेल का दीपक भी चलता है
गंगाजलथोड़ा सासाफ़ पानी में तुलसी पत्ता डाल लें
दक्षिणा और वस्त्रपंडित जी के लिए, श्रद्धा अनुसारबिना पंडित पूजा में मंदिर में दान
कथा की पुस्तकसत्यनारायण व्रत कथाहमारी वेबसाइट पर पूरी कथा

चौकी और केले के पत्तों का मंडप

सत्यनारायण पूजा की पहचान केले का मंडप है। केला विष्णु जी को प्रिय माना जाता है और बृहस्पति से भी जुड़ा है, इसलिए यह पीले रंग वाली पूजा है।

  1. पूजा की जगह पूर्व या उत्तर की ओर चुनें, ताकि आप पूर्व मुख होकर बैठ सकें।
  2. ज़मीन पोंछकर चौकी रखें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएँ।
  3. चौकी के चारों कोनों पर केले के तने बाँध दें या पत्ते खड़े कर दें। ऊपर से पत्ते मिलाकर छोटी छतरी जैसी बनावट हो जाती है।
  4. चौकी के बीच में भगवान की तस्वीर, उसके सामने अक्षत की ढेरी पर कलश, और बाईं ओर सुपारी के रूप में गणेश जी रखें।
  5. मंडप पर आम के पत्तों की बंदनवार और फूलों की माला लगा दें। बच्चों को रंगोली बनाने दें, घर में अपनापन आता है।

पूजा का क्रम

पंडित जी आएँ या आप खुद करें, क्रम लगभग यही रहता है:

  1. स्नान और संकल्प: दिन में व्रत रखा हो तो अच्छा, नहीं तो कम से कम पूजा तक कुछ भारी न खाएँ। हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र और पूजा का उद्देश्य बोलें।
  2. गणेश पूजन: सुपारी वाले गणेश जी को रोली, अक्षत, दूर्वा और मिठाई चढ़ाएँ।
  3. कलश पूजन: कलश में जल, सिक्का, सुपारी डालें, ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें, मौली बाँधें।
  4. नवग्रह (वैकल्पिक): कई पंडित नवग्रह का संक्षिप्त पूजन भी कराते हैं। घर पर खुद कर रहे हों तो छोड़ सकते हैं।
  5. सत्यनारायण भगवान का पूजन: शालिग्राम या तस्वीर को पंचामृत से स्नान (तस्वीर हो तो छींटे), फिर शुद्ध जल, चंदन, जनेऊ, पीले फूल, तुलसी दल, धूप-दीप।
  6. भोग: पंजीरी, पंचामृत, केले और फल पर तुलसी पत्ता रखकर भोग लगाएँ।
  7. कथा: पाँच अध्याय की कथा सुनें। हर अध्याय के बाद शंख बजाने या जयकारा लगाने की रीत कई घरों में है।
  8. आरती: कपूर और घी के दीपक से सत्यनारायण जी की आरती “जय लक्ष्मी रमणा” गाएँ।
  9. हवन (वैकल्पिक): गृह प्रवेश जैसे मौकों पर छोटा हवन भी होता है।
  10. प्रसाद: सबको पंचामृत और पंजीरी दें, फिर व्रती भोजन करे।

कथा में साधु वैश्य, लीलावती-कलावती, राजा तुंगध्वज और लकड़हारे के प्रसंग आते हैं, जिनका सार यही है कि प्रसाद का अनादर न करें और वचन देकर पूजा टालें नहीं। पूरी कथा श्री सत्यनारायण व्रत कथा पृष्ठ पर पढ़ें।

पंजीरी और पंचामृत

पंजीरी

उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में गेहूँ के आटे की पंजीरी सबसे आम है। कढ़ाई में देसी घी गरम करें, आटा धीमी आँच पर सुनहरा और खुशबूदार होने तक भूनें, ठंडा होने पर बूरा या पिसी चीनी मिलाएँ। ऊपर से कटे मेवे, थोड़ी इलायची और मखाने डाल सकते हैं। कई परिवार “सवा” का नियम मानते हैं, यानी सवा पाव, सवा किलो या सवा पाँच किलो प्रसाद। राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ घरों में पिसे धनिये की पंजीरी बनती है, जो व्रत में भी चल जाती है।

पंचामृत

दूध, दही, घी, शहद और शक्कर, ये पाँच चीज़ें मिलाकर पंचामृत बनता है। दूध सबसे ज़्यादा रखें, बाकी थोड़ा-थोड़ा। इसमें तुलसी के पत्ते और कटे केले डालने की रीत भी है। बनाने के सही अनुपात और चरणामृत से इसका अंतर पंचामृत कैसे बनाएं लेख में विस्तार से है।

बिना पंडित के घर पर

पंडित जी न मिलें या आप खुद करना चाहें, तो भी सत्यनारायण पूजा पूरी श्रद्धा से हो सकती है। कथा का मूल संदेश ही यह है कि भगवान भाव के भूखे हैं, धन के नहीं। कुछ बातें ध्यान रखें:

  • घर का कोई बड़ा व्यक्ति संकल्प ले और कथा पढ़े, बाकी लोग हाथ में अक्षत-फूल लेकर सुनें।
  • मंत्र न आते हों तो “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ सत्यनारायणाय नमः” बोलकर हर चीज़ चढ़ाएँ।
  • कथा बीच में छोड़कर न उठें, फ़ोन दूर रखें।
  • प्रसाद सबसे पहले मेहमानों और पड़ोसियों को दें। कथा सुनने बुलाए गए लोग प्रसाद लिए बिना न जाएँ, यह खास ध्यान रखें।
  • जो दक्षिणा पंडित जी को देते, वह किसी ज़रूरतमंद या मंदिर में दे दें।

पूजा के बाद बचे केले के पत्ते और फूल किसी पौधे की जड़ में या बहते पानी के बजाय मिट्टी में दबा दें, ताकि नदी गंदी न हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सत्यनारायण पूजा में कौन सा प्रसाद बनता है?

मुख्य प्रसाद गेहूँ के आटे की पंजीरी है, जो घी में भूनकर बूरा मिलाकर बनती है। साथ में पंचामृत, केले और मौसमी फल भी चढ़ाए जाते हैं।

क्या सत्यनारायण पूजा बिना पंडित के घर पर कर सकते हैं?

हाँ, घर का कोई सदस्य संकल्प लेकर पूजा और पाँच अध्याय की कथा पढ़ सकता है। श्रद्धा और प्रसाद का सम्मान सबसे ज़रूरी माना गया है।

सत्यनारायण कथा किस दिन करनी चाहिए?

सबसे प्रचलित दिन पूर्णिमा है, लेकिन गृह प्रवेश, विवाह, जन्मदिन, मनौती पूरी होने या किसी भी शुभ दिन कथा कराई जा सकती है।

सत्यनारायण पूजा में केले के पत्ते क्यों लगाते हैं?

केला भगवान विष्णु और बृहस्पति से जुड़ा माना जाता है, इसलिए चौकी के चारों ओर केले के तने या पत्तों का मंडप बनाया जाता है।

सत्यनारायण पूजा में तुलसी जरूरी है क्या?

हाँ, विष्णु जी के किसी भी भोग में तुलसी दल रखना ज़रूरी माना जाता है। पंजीरी, पंचामृत और फलों पर तुलसी का पत्ता रखकर ही भोग लगाएँ।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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