दिवाली की लक्ष्मी पूजा के लिए मुख्य रूप से छह तरह का सामान चाहिए: लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति और चौकी, पूजा थाली की सामग्री, भोग (ख़ासकर खील-बताशे), दीये और तेल-घी, बही-खाता का सामान, और कलश। नीचे हर हिस्से की पूरी सूची है, साथ में यह भी कि कोई चीज़ न मिले तो क्या करें। 2026 में दिवाली 8 नवंबर को है, और धनतेरस (6 नवंबर) की खरीदारी में ही ज़्यादातर सामान आ जाता है। पर्व की तिथियाँ दिवाली पृष्ठ पर देखें।
मूर्ति, चौकी और आसन
- लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति (मिट्टी, पीतल या चांदी की) या चित्र। लक्ष्मी जी कमल पर बैठी मुद्रा में और गणेश जी की सूँड़ बाईं ओर मुड़ी हुई लेना अच्छा माना जाता है।
- सरस्वती जी की मूर्ति या चित्र (कई घरों में तीनों एक ही चित्र में होते हैं)
- कुबेर जी का चित्र या कुबेर यंत्र (व्यापारी परिवारों में)
- लकड़ी की चौकी या पटरा
- चौकी के लिए लाल कपड़ा, और नीचे बिछाने के लिए पीला कपड़ा (वैकल्पिक)
- बैठने के लिए ऊनी या कुश का आसन, हर सदस्य के लिए
- कलश (ताँबे, पीतल या मिट्टी का), आम के 5 पत्ते, पानी वाला नारियल, लाल कपड़ा
पिछले साल की मिट्टी की मूर्ति का क्या करें, यह सवाल हर घर में आता है। ज़्यादातर परिवार नई मूर्ति स्थापित करके पुरानी को सम्मान से किसी पेड़ के नीचे रख देते हैं या मिट्टी में विसर्जित कर देते हैं। धातु की मूर्ति हर साल दोबारा पूजी जाती है।
पूजा थाली की सामग्री
| सामग्री | मात्रा (अंदाज़न) | न मिले तो |
|---|---|---|
| रोली या कुमकुम | एक पुड़िया | हल्दी में चूना मिलाकर |
| अक्षत (साबुत चावल) | एक कटोरी | — |
| हल्दी, चंदन | थोड़ा-थोड़ा | चंदन की जगह इत्र |
| मौली (कलावा) | एक गुच्छा | लाल धागा |
| सिंदूर | एक डिब्बी | — |
| कमलगट्टे | 11 या 21 | मखाने |
| कमल का फूल | 1–2 | लाल गुलाब |
| गेंदे की माला और खुले फूल | 2–3 माला | जो फूल मिलें |
| दूर्वा (गणेश जी के लिए) | एक मुट्ठी | — |
| पान के पत्ते, सुपारी, लौंग, इलायची | 5–5 | सुपारी और लौंग काफ़ी |
| जनेऊ | 1 | मौली का धागा |
| इत्र, धूप, अगरबत्ती, कपूर | एक-एक पैकेट | — |
| लक्ष्मी जी के लिए चुनरी, चूड़ी, बिंदी | एक सेट | सिर्फ़ चुनरी |
| पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) | एक कटोरी | गंगाजल मिला दूध |
| गंगाजल | एक छोटी बोतल | साफ़ जल में तुलसी पत्ता |
| चांदी के सिक्के, कौड़ी, गोमती चक्र, साबुत धनिया | जितने हों | नए सिक्के या नोट |
भोग: खील-बताशे, मिठाई, फल
- खील: धान की खील, कम से कम आधा किलो।
- बताशे और चीनी के खिलौने (हाथी, घोड़ा, मछली जैसे), जो उत्तर भारत के बाज़ारों में दिवाली पर ही मिलते हैं।
- मिठाई: लड्डू (गणेश जी के लिए), बर्फ़ी, घर की बनी गुझिया या कोई भी सात्विक मिठाई।
- फल: केला, सेब, अनार, सिंघाड़ा, गन्ना (कई घरों में), सीताफल।
- मखाने और मेवे
खील-बताशे क्यों चढ़ाते हैं
दिवाली कार्तिक में आती है, जब खरीफ़ की नई धान की फ़सल घर आती है। धान से बनी खील नई फ़सल का पहला अन्न है, और उसे लक्ष्मी जी को अर्पित करना अन्न-धन के लिए आभार है। बताशे मिठास और शुभता के प्रतीक हैं। सफ़ेद खील और बताशे को शुक्र ग्रह से भी जोड़ा जाता है, जो वैभव का कारक माना जाता है। पूजा के बाद यही प्रसाद पड़ोस और मेहमानों में बाँटा जाता है।
दीपक, तेल-घी और बत्ती
- पूजा के लिए एक बड़ा पीतल या मिट्टी का दीपक (रात भर जलने वाला), देसी घी के साथ
- मिट्टी के दीये, 21, 51 या घर के हिसाब से। धनतेरस पर खरीदकर एक दिन पानी में भिगो दें
- सरसों का तेल (बाहर के दीयों के लिए), तिल का तेल (वैकल्पिक)
- रुई की गोल और लंबी बत्तियाँ, घर पर बनाई जा सकती हैं
- माचिस, और दीये रखने के लिए एक बड़ी थाली या ट्रे
- मोमबत्तियाँ और बिजली की झालर, अगर लगानी हों
किस जगह कितने दीये रखें, इसकी पूरी गिनती दिवाली पर कितने दीपक जलाएं और कहाँ रखें लेख में है।
बही-खाता और व्यापार पूजन का सामान
- नई बही (लाल कपड़े की जिल्द वाली) या नया रजिस्टर
- नई कलम या पेन, लाल स्याही
- तिजोरी या कैश बॉक्स के लिए रोली, हल्दी, अक्षत और कमलगट्टे
- तराज़ू या मशीन पर बाँधने के लिए मौली
- व्यापार स्थल के लिए छोटा लक्ष्मी-गणेश चित्र, अगर वहाँ अलग पूजा होती है
- कर्मचारियों के लिए मिठाई के डिब्बे
बही पर क्या लिखें और किस क्रम में पूजा करें, यह दिवाली लक्ष्मी पूजन विधि में चरण-दर-चरण दिया गया है।
एक दिन पहले की चेकलिस्ट
| काम | कब तक |
|---|---|
| घर की सफ़ाई और पूजा की जगह तय करना | छोटी दिवाली तक |
| मूर्ति, चौकी, कपड़ा, कलश | धनतेरस पर |
| दीये पानी में भिगोना, बत्तियाँ बनाना | एक दिन पहले |
| खील, बताशे, चीनी के खिलौने, मिठाई | एक दिन पहले या सुबह |
| फूल, माला, कमल, पान के पत्ते | दिवाली की सुबह (ताज़ा) |
| पंचामृत | पूजा से ठीक पहले |
| रंगोली और द्वार का तोरण | दिवाली की दोपहर |
| मुहूर्त का समय नोट करना | एक दिन पहले |
अगर बाज़ार जाना मुश्किल हो और कुछ चीज़ें न मिल पाएँ, तो घबराएँ नहीं। लक्ष्मी-गणेश का चित्र, एक दीपक, रोली-अक्षत, फूल और घर की कोई मिठाई भी पूजा के लिए पर्याप्त है; भाव ही मुख्य है। धनतेरस पर किन चीज़ों की खरीदारी शुभ मानी जाती है, यह धनतेरस पर क्या खरीदें में देखें। पूजा पूरी होने पर लक्ष्मी जी की आरती ज़रूर गाएँ।
पूजा के बाद सामग्री का क्या करें
- खील-बताशे और मिठाई: अगले दिन प्रसाद के रूप में परिवार, पड़ोसियों और घर आने वालों में बाँटें।
- चांदी के सिक्के, कौड़ी, गोमती चक्र, कमलगट्टे: लाल कपड़े में बाँधकर तिजोरी या अलमारी में रखें। अगले साल की पूजा में यही सिक्के फिर रखे जाते हैं।
- साबुत धनिया: कुछ दाने गमले या बगीचे में बो दें, बाकी तिजोरी में रख दें।
- फूल और मालाएँ: सूखने पर किसी पेड़ के नीचे या गमले की मिट्टी में डाल दें; कूड़े में न फेंकें।
- कलश का जल: घर में छिड़क दें और बचा हुआ तुलसी या किसी पौधे में डाल दें। नारियल प्रसाद के रूप में बाँट दें।
- मिट्टी के दीये: धोकर संभाल लें; देव दीपावली और कार्तिक के दीपदान में फिर काम आएँगे।

