धनतेरस पर नए बर्तन, चांदी या सोना, झाड़ू, साबुत धनिया, मिट्टी के दीये और दिवाली पूजन के लिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है। यह दिन कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को आता है और यहीं से पाँच दिन का दीपोत्सव शुरू होता है। 2026 में धनतेरस 6 नवंबर को है; पूरे पर्व की तिथियाँ दिवाली पृष्ठ पर देखें।
धनतेरस क्यों: धन्वंतरि, कुबेर और यम
धनतेरस नाम "धन" और "तेरस" (त्रयोदशी) से बना है, पर इसका पहला संबंध सेहत से है। पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन में इसी तिथि को भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं, इसलिए इस दिन को धन्वंतरि जयंती भी कहते हैं। उनके हाथ में कलश था, और इसी से इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा जुड़ी।
दूसरा संबंध कुबेर से है, जो धन के रक्षक हैं। व्यापारी परिवार इस शाम कुबेर और लक्ष्मी की पूजा करते हैं। तीसरा संबंध यमराज से है। स्कन्द पुराण में कहा गया है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की शाम घर के बाहर यम के लिए दीपक रखने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। राजा हिम के पुत्र की कथा इसी से जुड़ी है, जिसे धनतेरस की कथा पृष्ठ पर पढ़ सकते हैं।
क्या खरीदना शुभ माना जाता है
| चीज़ | क्यों खरीदते हैं | ध्यान रखें |
|---|---|---|
| पीतल, ताँबे या स्टील के बर्तन | धन्वंतरि के कलश की याद, घर में अन्न-धन की बढ़ोतरी की कामना | बर्तन खाली घर न लाएँ; उसमें चावल, मिठाई या पानी भरकर लाएँ |
| चांदी का सिक्का, गहना या बर्तन | चांदी को चंद्रमा और शीतलता से जोड़ा जाता है; लक्ष्मी पूजन में सिक्का रखा जाता है | लक्ष्मी-गणेश की छवि वाला सिक्का पूजा में काम आता है |
| सोना | स्थायी धन का प्रतीक | बजट के अनुसार; छोटी चीज़ भी उतनी ही शुभ है |
| झाड़ू | झाड़ू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है, जो घर से दरिद्रता और गंदगी बाहर करती है | नई झाड़ू पर सफ़ेद धागा बाँधकर रखें, पैर न लगाएँ |
| साबुत धनिया | "धन" से जुड़ा शब्द, खेती और समृद्धि का प्रतीक | दिवाली पूजा में चढ़ाकर बाद में गमले में बो दें |
| मिट्टी के दीये | पाँच दिन के दीपोत्सव के लिए | एक दिन पहले पानी में भिगो लें ताकि तेल कम सोखें |
| लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति | दिवाली पूजन के लिए | गणेश जी की सूँड़ बाईं ओर मुड़ी हुई और लक्ष्मी जी बैठी मुद्रा में लें |
| बही-खाता, कलम | व्यापारियों के नए हिसाब की शुरुआत | दिवाली की शाम पूजा के बाद ही पहला लेख लिखें |
| गोमती चक्र, कौड़ी, कमलगट्टे | लक्ष्मी पूजन की पारंपरिक सामग्री | पूजा के बाद तिजोरी में रखे जाते हैं |
दिवाली पूजा की पूरी सूची एक साथ चाहिए तो दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट देखें, ताकि धनतेरस की खरीदारी में ही सब आ जाए।
किन चीज़ों से लोग परहेज़ करते हैं
ये बातें शास्त्र के नियम कम, लोक-मान्यता ज़्यादा हैं। हर परिवार इन्हें नहीं मानता, पर उत्तर भारत में ये काफ़ी प्रचलित हैं:
- लोहे की धारदार चीज़ें: चाकू, कैंची, कुल्हाड़ी। लोहे को शनि से जोड़ा जाता है और धार को कलह से।
- काँच का सामान: टूटने वाली चीज़ को घर की स्थिरता के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
- काले रंग की चीज़ें: कई परिवार इस दिन काले कपड़े या काला सामान नहीं लेते।
- खाली बर्तन घर लाना: बर्तन लें तो उसमें कुछ भरकर लाएँ।
- तेल और घी उधार लेना या देना: कई घरों में इस दिन उधार देने से बचते हैं।
अगर कोई ज़रूरी चीज़, जैसे गाड़ी या इलेक्ट्रॉनिक सामान, इसी दिन लेनी पड़े तो उसे शुभ समय में लें और घर लाकर उस पर रोली से स्वस्तिक बना दें। कर्ज़ लेकर दिखावे की खरीदारी करना इस पर्व की भावना के उलट है; एक छोटा चम्मच भी पूरी श्रद्धा से लिया जाए तो वही शुभ है।
बजट कम हो तो क्या खरीदें
धनतेरस का असली संदेश घर में कुछ नया और शुभ लाना है, महँगा सामान नहीं। अगर इस साल हाथ तंग है, तो एक स्टील की कटोरी या चम्मच, एक नई झाड़ू, सौ ग्राम साबुत धनिया और कुछ मिट्टी के दीये ले आएँ। यही सामान ज़्यादातर घरों में पीढ़ियों से खरीदा जाता रहा है। गाँवों में आज भी लोग इस दिन बस एक नया बर्तन और झाड़ू लेकर आते हैं और उसी से संतोष मानते हैं।
शाम की धनतेरस पूजा
- सूर्यास्त से पहले घर और मुख्य द्वार साफ़ करें, द्वार पर रंगोली बनाएँ।
- पूजा की जगह चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान धन्वंतरि, कुबेर और लक्ष्मी-गणेश का चित्र रखें।
- दिन में खरीदे बर्तन, सिक्के और धनिया चौकी के पास रखें।
- गणेश जी, फिर धन्वंतरि जी को रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप चढ़ाएँ। परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
- कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा करें, मिठाई और फल का भोग लगाएँ।
- घर में तेरह दीपक जलाने की भी परंपरा है, जिन्हें आँगन, रसोई, पानी के स्थान और द्वार पर रखा जाता है।
यम दीपक: दिशा और समय
धनतेरस की शाम, प्रदोष काल में, घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके एक दीपक रखा जाता है। इसे यम दीपक कहते हैं।
- आटे का या मिट्टी का चौमुखा दीपक लें, चार बत्तियाँ लगाएँ।
- सरसों या तिल का तेल डालें।
- दीपक जलाकर दक्षिण की ओर रखें और यमराज को प्रणाम करें।
कई परिवारों में यम दीपक नरक चतुर्दशी की रात को भी जलाया जाता है। इसकी पूरी विधि नरक चतुर्दशी और यम दीपक वाले लेख में है।
खरीदारी का समय: प्रदोष काल और चौघड़िया
त्रयोदशी तिथि जिस समय चल रही हो, उसी में खरीदारी अच्छी मानी जाती है, और उसमें भी प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद लगभग ढाई घंटे) सबसे शुभ माना जाता है। दिन में खरीदारी करनी हो तो शुभ, लाभ, अमृत या चर चौघड़िया देखकर करें। चौघड़िया कैसे पढ़ें, यह चौघड़िया कैसे देखें लेख में समझाया गया है, और आज का चौघड़िया व राहुकाल पंचांग में मिल जाएगा।
धनतेरस के दो दिन बाद दिवाली की बड़ी पूजा होती है। उसकी तैयारी के लिए दिवाली लक्ष्मी पूजन विधि पहले ही पढ़ लें।

