चौघड़िया दिन और रात के शुभ-अशुभ समय को जानने का सबसे आसान तरीका है। दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक और रात को सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक आठ-आठ बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है, और हर हिस्से का नाम सात चौघड़ियों में से एक होता है। आपके शहर का आज का दिन और रात का चौघड़िया, सही सूर्योदय-सूर्यास्त के साथ, आज का पंचांग पृष्ठ पर अपने आप निकला हुआ मिलता है।
चौघड़िया क्या है
"चौघड़िया" शब्द "चार घड़ी" से बना है। पुराने समय में एक घड़ी 24 मिनट की मानी जाती थी, यानी चार घड़ी लगभग 96 मिनट। बराबर दिन-रात (12-12 घंटे) होने पर एक चौघड़िया ठीक 90 मिनट का होता है, जो चार घड़ी के क़रीब है, इसलिए यह नाम पड़ा। गुजरात और राजस्थान के व्यापारी परिवारों में दुकान खोलने, सौदा करने या यात्रा पर निकलने से पहले चौघड़िया देखने की पुरानी परंपरा है, और आज पूरे उत्तर भारत में लोग छोटे-मोटे शुभ काम के लिए इसी को देखते हैं।
विवाह, गृह प्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए पूरा मुहूर्त (तिथि, नक्षत्र, लग्न) देखा जाता है। चौघड़िया उन कामों के लिए है जिनके लिए अलग से पंडित जी से मुहूर्त नहीं निकलवाया जाता: नई गाड़ी लेना, सामान ख़रीदना, यात्रा, किसी दफ़्तर का काम, नया हिसाब शुरू करना।
सात चौघड़िया और उनके अर्थ
| चौघड़िया | स्वामी ग्रह | फल | किस काम के लिए |
|---|---|---|---|
| अमृत | चंद्र | सबसे शुभ | सभी शुभ काम |
| शुभ | गुरु | शुभ | पूजा, विवाह से जुड़े काम, पढ़ाई की शुरुआत |
| लाभ | बुध | शुभ | व्यापार, ख़रीदारी, नया हिसाब, पढ़ाई |
| चर | शुक्र | सामान्य/शुभ | यात्रा, वाहन, चलने-फिरने वाले काम |
| उद्वेग | सूर्य | अशुभ | शुभ काम टालें; कुछ लोग सरकारी काम के लिए ठीक मानते हैं |
| काल | शनि | अशुभ | नए और शुभ काम टालें |
| रोग | मंगल | अशुभ | शुभ काम टालें |
दिन और रात के चौघड़िया कैसे बनते हैं
चौघड़िया घड़ी के घंटों से नहीं, सूर्य से चलता है। इसलिए इसकी गणना हर दिन और हर शहर के लिए अलग होती है:
- अपने शहर का आज का सूर्योदय और सूर्यास्त लें।
- दिनमान निकालें: सूर्यास्त में से सूर्योदय घटाएँ।
- दिनमान को 8 से भाग दें। यही एक दिन के चौघड़िया की अवधि है।
- सूर्योदय से शुरू करके यह अवधि जोड़ते जाएँ; आठवाँ चौघड़िया ठीक सूर्यास्त पर ख़त्म होगा।
- रात के लिए सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक का समय (रात्रिमान) लेकर उसे भी 8 से भाग दें।
उदाहरण: मान लीजिए सूर्योदय सुबह 6:00 और सूर्यास्त शाम 6:00 है। दिनमान 12 घंटे, यानी हर चौघड़िया 90 मिनट: 6:00–7:30, 7:30–9:00, 9:00–10:30 और इसी तरह। अब सर्दियों का दिन लें, सूर्योदय 7:00 और सूर्यास्त 5:30: दिनमान साढ़े दस घंटे (630 मिनट), तो हर दिन का चौघड़िया लगभग 79 मिनट का होगा, और रात का हर चौघड़िया लगभग 101 मिनट का। यही कारण है कि दिल्ली और मुंबई, या जून और दिसंबर के चौघड़िया अलग दिखते हैं।
ध्यान रखें कि हिंदू पंचांग में दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है। इसलिए सोमवार रात 2 बजे का समय "सोमवार की रात" का चौघड़िया माना जाएगा, मंगलवार का नहीं।
वार के अनुसार क्रम
दिन का पहला चौघड़िया उस वार के स्वामी ग्रह का होता है: रविवार को सूर्य का उद्वेग, सोमवार को चंद्र का अमृत, मंगलवार को मंगल का रोग, बुधवार को बुध का लाभ, गुरुवार को गुरु का शुभ, शुक्रवार को शुक्र का चर और शनिवार को शनि का काल। इसके बाद दिन में क्रम हमेशा यही चलता है: उद्वेग → चर → लाभ → अमृत → काल → शुभ → रोग → फिर उद्वेग। आठवाँ चौघड़िया पहले वाला ही दोहराता है।
दिन का चौघड़िया (सूर्योदय से)
| वार | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रविवार | उद्वेग | चर | लाभ | अमृत | काल | शुभ | रोग | उद्वेग |
| सोमवार | अमृत | काल | शुभ | रोग | उद्वेग | चर | लाभ | अमृत |
| मंगलवार | रोग | उद्वेग | चर | लाभ | अमृत | काल | शुभ | रोग |
| बुधवार | लाभ | अमृत | काल | शुभ | रोग | उद्वेग | चर | लाभ |
| गुरुवार | शुभ | रोग | उद्वेग | चर | लाभ | अमृत | काल | शुभ |
| शुक्रवार | चर | लाभ | अमृत | काल | शुभ | रोग | उद्वेग | चर |
| शनिवार | काल | शुभ | रोग | उद्वेग | चर | लाभ | अमृत | काल |
रात का पहला चौघड़िया उस वार से पाँचवें वार के स्वामी का होता है (रविवार की रात गुरु का शुभ, सोमवार की रात शुक्र का चर, इसी तरह)। रात में क्रम बदल जाता है: शुभ → अमृत → चर → रोग → काल → लाभ → उद्वेग → फिर शुभ।
रात का चौघड़िया (सूर्यास्त से)
| वार | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रविवार | शुभ | अमृत | चर | रोग | काल | लाभ | उद्वेग | शुभ |
| सोमवार | चर | रोग | काल | लाभ | उद्वेग | शुभ | अमृत | चर |
| मंगलवार | काल | लाभ | उद्वेग | शुभ | अमृत | चर | रोग | काल |
| बुधवार | उद्वेग | शुभ | अमृत | चर | रोग | काल | लाभ | उद्वेग |
| गुरुवार | अमृत | चर | रोग | काल | लाभ | उद्वेग | शुभ | अमृत |
| शुक्रवार | रोग | काल | लाभ | उद्वेग | शुभ | अमृत | चर | रोग |
| शनिवार | लाभ | उद्वेग | शुभ | अमृत | चर | रोग | काल | लाभ |
किस काम के लिए कौन-सा चौघड़िया
- ख़रीदारी, सोना-चाँदी, बर्तन: लाभ, अमृत या शुभ। धनतेरस पर लोग इसी हिसाब से समय चुनते हैं, देखें धनतेरस पर क्या ख़रीदें।
- यात्रा पर निकलना, नई गाड़ी: चर, लाभ या अमृत।
- दुकान खोलना, नया खाता, सौदा: लाभ या अमृत।
- पूजा, कथा, बच्चे की पढ़ाई शुरू करना: शुभ या अमृत।
- टालने योग्य: काल, रोग और उद्वेग में नए शुभ काम शुरू नहीं करते। पहले से चल रहे रोज़ के काम पर इसका कोई असर नहीं माना जाता।
चौघड़िया, राहुकाल और मुहूर्त में अंतर
चौघड़िया और राहुकाल दोनों दिन को आठ भागों में बाँटकर बनते हैं, पर दोनों अलग चीज़ें हैं। राहुकाल हर दिन का सिर्फ़ एक भाग है, जिसे दक्षिण भारत में ख़ास तौर पर टाला जाता है; इसकी पूरी गणना राहुकाल क्या है में है। कई बार लाभ या शुभ चौघड़िया के बीच राहुकाल भी पड़ जाता है; ऐसे में सावधान लोग उतना हिस्सा छोड़कर बाकी समय चुनते हैं।
मुहूर्त इससे बड़ा विचार है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और लग्न सब देखे जाते हैं। पंचांग के इन पाँच अंगों को पढ़ना पंचांग कैसे पढ़ें में समझाया गया है। किसी पुरानी या आने वाली तारीख़ का पूरा पंचांग और चौघड़िया देखना हो तो दिन का पंचांग पर तारीख़ चुनें।

