राहुकाल क्या है, आज का राहुकाल कैसे जानें

राहुकाल सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन का आठवाँ भाग है (लगभग डेढ़ घंटा), जिसे राहु का समय मानकर नए और शुभ काम के लिए टाला जाता है। यह हर वार को दिन के अलग भाग में पड़ता है: सोमवार को दूसरा, शनिवार को तीसरा, शुक्रवार को चौथा, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, मंगलवार को सातवाँ और रविवार को आठवाँ भाग।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 5 मिनट का पाठ
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राहुकाल हर दिन का लगभग डेढ़ घंटे का वह हिस्सा है जिसे छाया ग्रह राहु का समय माना जाता है, और इसमें नया या शुभ काम शुरू नहीं किया जाता। इसकी गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बाँटकर होती है, इसलिए हर शहर और हर दिन का राहुकाल थोड़ा अलग होता है। अपने शहर का आज का राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल आज का पंचांग में सही समय के साथ मिल जाता है।

राहुकाल क्या है

ज्योतिष में राहु को छाया ग्रह माना गया है, जिसका अपना कोई वार नहीं है। सातों वार सात ग्रहों के नाम पर हैं, इसलिए दिन के आठ भागों में से हर भाग किसी ग्रह को मिलता है और एक भाग राहु के हिस्से आता है। यही राहुकाल (राहु काल या राहु कालम्) है। मान्यता है कि इस समय शुरू किए काम में रुकावट, देरी या उलझन आती है।

राहुकाल सिर्फ़ दिन के समय (सूर्योदय से सूर्यास्त) का देखा जाता है। कुछ परंपराओं में रात का राहुकाल भी गिना जाता है, पर आम व्यवहार में दिन का ही विचार होता है।

वार के अनुसार राहुकाल

नीचे की तालिका में दिन के आठ भागों में राहुकाल का भाग, और उदाहरण के लिए सूर्योदय सुबह 6 बजे, सूर्यास्त शाम 6 बजे मानकर समय दिया गया है:

वारदिन का कौन-सा भागउदाहरण समय (6 से 6 के दिन में)
सोमवारदूसरासुबह 7:30 – 9:00
मंगलवारसातवाँदोपहर 3:00 – 4:30
बुधवारपाँचवाँदोपहर 12:00 – 1:30
गुरुवारछठादोपहर 1:30 – 3:00
शुक्रवारचौथासुबह 10:30 – 12:00
शनिवारतीसरासुबह 9:00 – 10:30
रविवारआठवाँशाम 4:30 – 6:00

याद रखने के लिए क्रम सोमवार से इस तरह चलता है: सोम (2), शनि (3), शुक्र (4), बुध (5), गुरु (6), मंगल (7), रवि (8)। ये समय सिर्फ़ उदाहरण हैं; असली राहुकाल रोज़ के सूर्योदय-सूर्यास्त से निकलता है।

गणना: सूर्योदय-सूर्यास्त के आठ भाग

  1. अपने शहर का आज का सूर्योदय और सूर्यास्त देखें।
  2. दोनों के बीच का समय (दिनमान) मिनटों में निकालें।
  3. दिनमान को 8 से भाग दें। यह एक भाग की अवधि है।
  4. वार के हिसाब से भाग संख्या लें (जैसे शुक्रवार = 4)।
  5. राहुकाल शुरू = सूर्योदय + (भाग संख्या − 1) × एक भाग की अवधि। इसमें एक भाग जोड़ दें तो राहुकाल का अंत मिल जाता है।

उदाहरण: दिसंबर में दिल्ली का सूर्योदय लगभग 7:00 और सूर्यास्त लगभग 5:30 बजे मान लें। दिनमान 630 मिनट, एक भाग लगभग 79 मिनट। सोमवार को राहुकाल दूसरा भाग है, यानी 7:00 + 79 मिनट = लगभग 8:19 से 9:38 तक। वहीं जून में, जब दिन लंबा होता है, (सूर्योदय लगभग 5:25, सूर्यास्त लगभग 7:20) एक भाग लगभग 105 मिनट का हो जाता है और सोमवार का राहुकाल लगभग 7:10 से 8:55 तक पड़ता है। इसीलिए "सोमवार को 7:30 से 9 बजे" जैसी स्थायी सूची हर बार सही नहीं होती।

अलग-अलग कैलेंडर में समय क्यों थोड़ा अलग दिखता है

कभी-कभी दो कैलेंडरों या ऐप्स में राहुकाल के समय में दो-चार मिनट का फ़र्क दिखता है। इसकी वजह सूर्योदय की परिभाषा है: कोई सूर्य के ऊपरी किनारे के क्षितिज पर दिखने को सूर्योदय मानता है, कोई सूर्य के केंद्र को, और वायुमंडल में रोशनी के मुड़ने का हिसाब भी अलग-अलग जोड़ा जाता है। शहर के अक्षांश-देशांतर का फ़र्क भी असर डालता है; पटना और जयपुर का सूर्योदय लगभग आधे घंटे अलग होता है। इसलिए हमेशा अपने शहर के हिसाब से निकला राहुकाल ही देखें।

राहुकाल में क्या न करें, क्या कर सकते हैं

आम तौर पर टालते हैं:

  • नया व्यापार, दुकान या दफ़्तर का उद्घाटन
  • गृह प्रवेश, सगाई, विवाह से जुड़ी रस्में
  • नई गाड़ी, ज़मीन, सोना जैसी बड़ी ख़रीदारी
  • किसी ज़रूरी यात्रा पर निकलना, इंटरव्यू या अनुबंध पर हस्ताक्षर

बिना चिंता कर सकते हैं:

  • रोज़ के काम, नौकरी, पढ़ाई, जो पहले से चल रहे हैं
  • रोज़ की पूजा, जप और भजन
  • दक्षिण भारत में मंगलवार और शुक्रवार के राहुकाल में माँ दुर्गा की पूजा और नींबू के दीये जलाने की परंपरा भी है

राहुकाल किसी काम को "बिगाड़ने" का डर नहीं, बल्कि नई शुरुआत के लिए बेहतर समय चुनने का एक संकेत है। काम बहुत ज़रूरी हो और समय न बदला जा सके, तो भगवान का नाम लेकर काम करें; अनावश्यक डर न पालें।

यमगंड और गुलिक काल

दक्षिण भारतीय पंचांगों में राहुकाल के साथ दो और काल दिए जाते हैं। ये भी दिन के आठ भागों में से एक-एक भाग हैं:

वारयमगंड (भाग)गुलिक काल (भाग)
रविवार5 (12:00 – 1:30)7 (3:00 – 4:30)
सोमवार4 (10:30 – 12:00)6 (1:30 – 3:00)
मंगलवार3 (9:00 – 10:30)5 (12:00 – 1:30)
बुधवार2 (7:30 – 9:00)4 (10:30 – 12:00)
गुरुवार1 (6:00 – 7:30)3 (9:00 – 10:30)
शुक्रवार7 (3:00 – 4:30)2 (7:30 – 9:00)
शनिवार6 (1:30 – 3:00)1 (6:00 – 7:30)

यमगंड (यमघंट) को यम का समय मानकर शुभ काम में टाला जाता है। गुलिक काल शनि के पुत्र गुलिक का समय है; मान्यता है कि इसमें जो काम होता है वह दोहराया जाता है, इसलिए अंतिम संस्कार जैसे काम इसमें नहीं करते, पर कुछ लोग इसे संपत्ति ख़रीदने के लिए अच्छा मानते हैं।

उत्तर और दक्षिण भारत में मान्यता का अंतर

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में राहुकाल बहुत गंभीरता से माना जाता है; विवाह, गृह प्रवेश, यहाँ तक कि नई गाड़ी की डिलीवरी भी राहुकाल देखकर तय होती है। उत्तर भारत की पारंपरिक पद्धति में शुभ समय के लिए चौघड़िया, भद्रा, पंचक और मुहूर्त ज़्यादा देखे जाते रहे हैं। पिछले कुछ दशकों में कैलेंडरों और ऐप्स के कारण उत्तर भारत में भी राहुकाल देखना आम हो गया है।

दोनों पद्धतियाँ साथ चल सकती हैं: किसी काम के लिए लाभ या अमृत चौघड़िया चुनें और उसमें से राहुकाल वाला हिस्सा छोड़ दें। पंचांग के बाकी अंग, जैसे तिथि, नक्षत्र और योग कैसे पढ़ें, यह पंचांग कैसे पढ़ें में है, और किसी भी तारीख़ का राहुकाल दिन का पंचांग पर देखा जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुकाल कितनी देर का होता है?

राहुकाल दिनमान का आठवाँ भाग होता है। 12 घंटे के दिन में यह 90 मिनट का होता है; सर्दियों में छोटा और गर्मियों में थोड़ा लंबा।

आज का राहुकाल कैसे निकालें?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 से भाग दें और वार के हिसाब से भाग लें: सोमवार 2, शनिवार 3, शुक्रवार 4, बुधवार 5, गुरुवार 6, मंगलवार 7, रविवार 8। Bhaktise के आज का पंचांग पर यह अपने आप मिलता है।

राहुकाल में क्या नहीं करना चाहिए?

नया व्यापार, गृह प्रवेश, सगाई, बड़ी ख़रीदारी, ज़रूरी यात्रा या अनुबंध जैसे नए काम राहुकाल में शुरू नहीं करते। पहले से चल रहे रोज़ के काम पर कोई रोक नहीं है।

क्या राहुकाल में पूजा कर सकते हैं?

हाँ, रोज़ की पूजा और जप किए जा सकते हैं। दक्षिण भारत में तो मंगलवार-शुक्रवार के राहुकाल में दुर्गा पूजा की विशेष परंपरा है।

यमगंड और गुलिक काल क्या हैं?

ये भी दिन के आठ भागों में से एक-एक भाग हैं, जो दक्षिण भारतीय पंचांगों में राहुकाल के साथ दिए जाते हैं। यमगंड शुभ काम में टाला जाता है, गुलिक में किया काम दोहराया जाता है ऐसी मान्यता है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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