पंचक वे लगभग पाँच दिन हैं जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के दूसरे आधे भाग से लेकर रेवती नक्षत्र के अंत तक चलता है, यानी जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में होता है। ऐसा हर महीने लगभग एक बार होता है। इन दिनों में दक्षिण दिशा की यात्रा, लकड़ी-ईंधन जमा करना, छत डालना, चारपाई बुनना और बिना विधि के दाह संस्कार करना टालने की परंपरा है। बाकी रोज़ के काम सामान्य रूप से चलते रहते हैं।
पंचक कब लगता है: धनिष्ठा से रेवती
आसमान को 27 बराबर हिस्सों में बाँटा गया है, जिन्हें नक्षत्र कहते हैं; हर नक्षत्र 13 अंश 20 कला का होता है। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है। धनिष्ठा नक्षत्र का पहला आधा भाग मकर राशि में और दूसरा आधा भाग कुंभ राशि में पड़ता है। जैसे ही चंद्रमा कुंभ राशि में, यानी धनिष्ठा के तीसरे चरण में, प्रवेश करता है, पंचक शुरू हो जाता है। रेवती नक्षत्र खत्म होते ही, जब चंद्रमा मीन से निकलकर मेष में आता है, पंचक खत्म होता है।
चंद्रमा एक राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है, इसलिए दो राशियों का पंचक करीब साढ़े चार से पाँच दिन चलता है। यह किसी भी वार को, दिन या रात के किसी भी समय शुरू हो सकता है। चूँकि चंद्रमा लगभग 27 दिन में एक चक्कर पूरा करता है, अगला पंचक भी लगभग 27 दिन बाद आता है। पूरे 27 नक्षत्रों के नाम, स्वामी और राशि 27 नक्षत्रों की सूची में दिए हैं।
पंचक के पाँच नक्षत्र
| क्रम | नक्षत्र | स्वामी ग्रह | राशि |
|---|---|---|---|
| 1 | धनिष्ठा (उत्तरार्ध, चरण 3-4) | मंगल | कुंभ |
| 2 | शतभिषा | राहु | कुंभ |
| 3 | पूर्वा भाद्रपद | गुरु | कुंभ (3 चरण), मीन (1 चरण) |
| 4 | उत्तरा भाद्रपद | शनि | मीन |
| 5 | रेवती | बुध | मीन |
पाँच नक्षत्रों का समूह होने से ही इसका नाम पंचक पड़ा। ज्योतिष ग्रंथ इन्हें "धनिष्ठा पंचक" भी कहते हैं।
वार के अनुसार पंचक के प्रकार
पंचक जिस वार से शुरू होता है, उसी के हिसाब से उसका नाम और स्वभाव माना जाता है:
- रविवार से — रोग पंचक: सेहत को लेकर सावधानी का समय माना जाता है।
- सोमवार से — राज पंचक: इसे शुभ माना जाता है। सरकारी काम, संपत्ति से जुड़े काम में बाधा नहीं मानी जाती।
- मंगलवार से — अग्नि पंचक: आग, बिजली और मशीनरी के काम, निर्माण शुरू करने से बचने की सलाह। कोर्ट-कचहरी के काम के लिए ठीक माना जाता है।
- बुधवार और गुरुवार से: इनका कोई खास नाम नहीं है और इन्हें कम दोष वाला माना जाता है।
- शुक्रवार से — चोर पंचक: यात्रा, लेन-देन और बड़े सौदे टालने की सलाह।
- शनिवार से — मृत्यु पंचक: सबसे कठिन माना जाता है; जोखिम वाले काम और लंबी यात्रा से बचें।
यह वर्गीकरण लोक-ज्योतिष की परंपरा है और अलग-अलग पंचांगों में इसके फल थोड़े अलग लिखे मिलते हैं। इसे डर की नज़र से नहीं, सावधानी की याद की तरह देखें। गाँवों में बुज़ुर्ग इन नियमों के पीछे व्यावहारिक कारण भी बताते हैं: सूखी लकड़ी और घास का ढेर आग का खतरा था और जल्दबाज़ी में डाली छत टिकती नहीं थी।
पंचक में वर्जित काम
पुराने ग्रंथों में पंचक के दौरान पाँच काम खास तौर पर मना किए गए हैं:
- दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण को यम की दिशा माना गया है। ज़रूरी हो तो निकलने से पहले हनुमान जी को प्रणाम करें या कुछ कदम उल्टी दिशा में चलकर यात्रा शुरू करें, ऐसी लोक-रीति है।
- लकड़ी, घास या ईंधन इकट्ठा करना: पुराने समय में इसे आग के खतरे से जोड़ा गया था।
- घर की छत डालना: लिंटर या छत ढलाई की तारीख पंचक से बाहर रखी जाती है।
- चारपाई, पलंग बनवाना या बुनना: गाँवों में आज भी यह नियम खूब माना जाता है।
- शव का दाह संस्कार बिना विधि के: इसका उपाय नीचे बताया गया है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि पंचक में "सब कुछ" मना नहीं है। उत्तरा भाद्रपद और रेवती तो विवाह के शुभ नक्षत्रों में गिने जाते हैं, और गृह प्रवेश, नामकरण, खरीदारी जैसे कई काम इन नक्षत्रों में होते रहते हैं। मुहूर्त का फैसला पूरे पंचांग को देखकर होता है, सिर्फ पंचक देखकर नहीं।
पंचक में मृत्यु होने पर परंपरा
किसी की मृत्यु पर कोई इंतज़ार नहीं करता, और करना भी नहीं चाहिए। गरुड़ पुराण की परंपरा में पंचक के दौरान मृत्यु होने पर दाह संस्कार रोका नहीं जाता, बल्कि एक उपाय के साथ किया जाता है। मान्यता है कि पंचक में बिना शांति के दाह होने से परिवार पर और कष्ट आ सकते हैं, इसलिए:
- आटे या कुश (दर्भ घास) के पाँच पुतले बनाए जाते हैं, जो पाँच नक्षत्रों के प्रतीक माने जाते हैं।
- इन पुतलों को भी विधि से अर्थी के साथ रखकर शव के साथ ही अग्नि दी जाती है।
- कई परिवार बाद में पंचक शांति की पूजा या दान भी करवाते हैं।
यह काम परिवार के पुरोहित या श्मशान के आचार्य को बता दें, वे सामान्यतः इसकी व्यवस्था जानते हैं। इस समय परिवार को डराने वाली बातें करने के बजाय सहारा देना ही सबसे बड़ा धर्म है।
पंचक कैसे देखें
पंचक का समय हमेशा तारीख और घंटे-मिनट के साथ देखना चाहिए, क्योंकि यह आधी रात या दोपहर में भी शुरू हो सकता है। सबसे आसान तरीका है आज का पंचांग खोलकर उस दिन का नक्षत्र और चंद्र राशि देखना। अगर चंद्र राशि कुंभ या मीन है, तो पंचक चल रहा है। नक्षत्र का समय कैसे पढ़ते हैं, यह पंचांग कैसे पढ़ें में आसान भाषा में समझाया गया है।
पंचक के अलावा रोज़ के अशुभ समय के लिए राहुकाल और विष्टि करण वाली भद्रा भी देखी जाती है। तीनों अलग चीज़ें हैं: राहुकाल हर दिन डेढ़ घंटे का होता है, भद्रा तिथि के आधे हिस्से से जुड़ी है, और पंचक चंद्रमा के नक्षत्र से।

