दिवाली लक्ष्मी पूजन विधि: घर पर पूरी पूजा क्रम से

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन कार्तिक अमावस्या की शाम प्रदोष काल में, संभव हो तो स्थिर लग्न में किया जाता है। चौकी पर लक्ष्मी-गणेश स्थापित करके संकल्प, गणेश पूजन, कलश पूजन, लक्ष्मी जी का षोडशोपचार पूजन, बही-खाता और दीपमालिका पूजन के बाद आरती की जाती है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 6 मिनट का पाठ
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दिवाली का लक्ष्मी पूजन कार्तिक अमावस्या की शाम, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में किया जाता है, और सबसे अच्छा माना जाता है कि यह स्थिर लग्न (आमतौर पर वृषभ लग्न) में हो। पूजा का क्रम है: चौकी सजाना, पवित्रीकरण और संकल्प, गणेश पूजन, कलश पूजन, लक्ष्मी पूजन, सरस्वती-कुबेर (बही और तिजोरी) पूजन, दीपमालिका पूजन और फिर आरती। 2026 में दिवाली 8 नवंबर को है; अपने शहर का मुहूर्त दिवाली पृष्ठ पर देखें।

पूजा का समय: प्रदोष काल और स्थिर लग्न

शास्त्रीय परंपरा में दिवाली की लक्ष्मी पूजा के लिए तीन बातें देखी जाती हैं: अमावस्या तिथि हो, प्रदोष काल हो (सूर्यास्त के बाद लगभग ढाई घंटे), और स्थिर लग्न हो। स्थिर लग्न में की गई पूजा से लक्ष्मी का घर में "टिकना" माना जाता है। उत्तर भारत में शाम के समय वृषभ लग्न ही आमतौर पर प्रदोष काल के भीतर आता है, इसलिए वही सबसे लोकप्रिय मुहूर्त है।

  • प्रदोष काल + वृषभ लग्न: घर की पूजा के लिए सबसे उत्तम।
  • महानिशीथ काल (आधी रात के आसपास, सिंह लग्न): तांत्रिक साधना, काली पूजा और विशेष अनुष्ठान करने वालों के लिए।
  • दिन का शुभ चौघड़िया: दुकान या दफ़्तर की पूजा के लिए, अगर शाम को संभव न हो।

लक्ष्मी पूजा के मुहूर्त का पूरा विवरण लक्ष्मी पूजा पृष्ठ पर हर साल अपडेट होता है।

चौकी कैसे सजाएं, लक्ष्मी-गणेश किस ओर

  1. घर के उत्तर-पूर्व (ईशान) कोने या पूजा घर में चौकी रखें। पूजा करने वाला पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठे।
  2. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ और बीच में थोड़े अक्षत रखकर उन पर मूर्तियाँ स्थापित करें।
  3. पूजा करने वाले की ओर से देखें तो ज़्यादातर घरों में गणेश जी बाईं ओर और लक्ष्मी जी उनकी दाईं ओर विराजती हैं। कुछ पंडित क्रम उलटा बताते हैं, इसलिए अपने घर की परंपरा मानें। सरस्वती जी या उनका प्रतीक (बही, कलम) लक्ष्मी जी के पास रहता है।
  4. चौकी के दाईं ओर चावल की ढेरी पर जल से भरा कलश रखें। कलश में सुपारी, सिक्का, दूर्वा डालें, मुँह पर आम के पत्ते और ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें।
  5. चौकी के सामने एक बड़ा घी का दीपक (जो रात भर जलेगा) और पूजा की थाली रखें।
  6. धनतेरस पर खरीदे चांदी के सिक्के, धनिया, कौड़ी और गोमती चक्र भी चौकी पर रखें।

पूरी सामग्री की सूची एक दिन पहले मिला लें; यह दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट में तालिका के रूप में दी गई है।

संकल्प से आरती तक: क्रमवार विधि

  1. पवित्रीकरण: हाथ में जल लेकर अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़कें और भगवान विष्णु का स्मरण करें।
  2. आचमन: तीन बार थोड़ा जल पिएँ: "ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः", फिर हाथ धो लें।
  3. संकल्प: हाथ में जल, अक्षत, फूल और एक सिक्का लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान और दिन बोलें, और कहें कि "घर में सुख, समृद्धि और शांति के लिए मैं सपरिवार लक्ष्मी-गणेश का पूजन कर रहा/रही हूँ।" जल चौकी के पास छोड़ दें।
  4. गणेश पूजन: गणेश जी को जल, रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल, जनेऊ, धूप-दीप और लड्डू अर्पित करें। "ॐ गं गणपतये नमः" बोलें।
  5. कलश पूजन: कलश पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ, मौली बाँधें, अक्षत-फूल चढ़ाएँ और उसमें वरुण देव व सभी तीर्थों का आवाहन करें।
  6. लक्ष्मी जी का आवाहन: हाथ जोड़कर लक्ष्मी जी को घर में पधारने का निमंत्रण दें और आसन के रूप में फूल चढ़ाएँ।
  7. स्नान: मूर्ति धातु की हो तो जल, फिर पंचामृत, फिर शुद्ध जल से स्नान कराएँ। मिट्टी की मूर्ति या चित्र हो तो फूल से जल के छींटे दें।
  8. वस्त्र और श्रृंगार: लाल चुनरी, मौली, सिंदूर, कुमकुम, हल्दी, इत्र और चूड़ी चढ़ाएँ।
  9. पुष्प और पत्र: कमल का फूल मिले तो सबसे उत्तम, नहीं तो लाल गुलाब या गेंदे की माला। कमलगट्टे भी चढ़ाएँ।
  10. धूप-दीप: धूप और घी का दीपक दिखाएँ।
  11. नैवेद्य: खील-बताशे, मिठाई, फल, सिंघाड़ा, मखाने और पान-सुपारी का भोग लगाएँ, फिर जल अर्पित करें।
  12. दक्षिणा और मंत्र: सिक्के या नोट अर्पित करें और कम से कम 11 या 108 बार "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का जप करें। लक्ष्मी और कुबेर के और मंत्र अर्थ सहित लक्ष्मी-कुबेर मंत्र लेख में हैं।
  13. दीपमालिका पूजन: थाली में 11, 21 या जितने दीये हों, जलाकर रखें, उन पर रोली-अक्षत चढ़ाएँ। फिर इन्हीं दीयों से घर के हर कोने को रोशन करें।
  14. आरती: पहले गणेश जी की आरती, फिर लक्ष्मी जी की आरती गाएँ। पूरा परिवार साथ खड़ा हो।
  15. पुष्पांजलि और क्षमा प्रार्थना: हाथ में फूल लेकर चढ़ाएँ और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें।

बही-खाता, तिजोरी और कलम पूजन

व्यापारी परिवारों के लिए यह पूजा उतनी ही ज़रूरी है जितनी लक्ष्मी पूजा। नई बही को सरस्वती का रूप और तिजोरी को कुबेर का स्थान माना जाता है।

  • नई बही के पहले पन्ने पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ और "श्री गणेशाय नमः" और "शुभ-लाभ" लिखें।
  • कलम या पेन पर मौली बाँधकर रोली-अक्षत चढ़ाएँ।
  • तिजोरी या अलमारी पर स्वस्तिक बनाकर कुबेर जी का स्मरण करें, और उसमें हल्दी-अक्षत, कमलगट्टे और पूजा के सिक्के रखें।
  • आजकल कई लोग लैपटॉप या कैश काउंटर पर भी स्वस्तिक बनाकर पूजा करते हैं। भाव वही है।

रात भर का दीपक और जागरण

पूजा का बड़ा घी का दीपक रात भर जलता रहे, यह कोशिश की जाती है। सोने से पहले उसमें घी भर दें और उसे किसी पीतल की थाली में या ऐसी जगह रखें जहाँ कपड़ा या पर्दा पास न हो। कई घरों में रात को भजन होते हैं या परिवार ताश-पासे खेलता है, जो दिवाली की पुरानी लोक-परंपरा है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में अगली सुबह भोर में घर की महिलाएँ पुराना सूप बजाते हुए घर के कोनों से "दलिद्दर" भगाती हैं और "ईश्वर आवें, दलिद्दर जावें" कहती हैं। पूजा की चौकी अगले दिन तक वैसी ही रहती है, और खील-बताशे का प्रसाद बाँटा जाता है।

घर और दुकान की पूजा में अंतर

बातघर की पूजादुकान/दफ़्तर की पूजा
समयप्रदोष काल, स्थिर लग्नअक्सर शाम से पहले शुभ चौघड़िया में, ताकि घर की पूजा भी हो सके
मुख्य पूजनलक्ष्मी-गणेश, कलश, दीपमालिकालक्ष्मी-गणेश के साथ बही, तराज़ू, कैश बॉक्स, मशीन
कौन करता हैपूरा परिवारमालिक और कर्मचारी साथ
बाद मेंदीपक रात भर, अगले दिन प्रसादबही में पहला लेख, कर्मचारियों को मिठाई और उपहार

गुजराती परिवारों में इसे चोपड़ा पूजन और मारवाड़ी परिवारों में बही पूजन कहते हैं, और यहीं से नया हिसाब-किताब शुरू होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन किस समय करना चाहिए?

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन अमावस्या की शाम प्रदोष काल में, संभव हो तो वृषभ जैसे स्थिर लग्न में करना सबसे अच्छा माना जाता है। हर साल का मुहूर्त अलग होता है।

लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति किस तरफ रखें?

ज़्यादातर घरों में पूजा करने वाले की ओर से गणेश जी बाईं ओर और लक्ष्मी जी उनके दाईं ओर रखी जाती हैं। कुछ परंपराओं में क्रम अलग है, इसलिए घर की रीत मानें।

लक्ष्मी पूजन में कौन सा मंत्र बोलें?

सबसे सरल और प्रचलित मंत्र है "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः"। इसे 11 या 108 बार जप सकते हैं।

क्या पंडित के बिना घर पर दिवाली पूजा कर सकते हैं?

हाँ। संकल्प, गणेश पूजन, लक्ष्मी पूजन, दीपमालिका पूजन और आरती का क्रम मानकर परिवार खुद पूरी श्रद्धा से पूजा कर सकता है।

दिवाली पूजा का दीपक रात भर जलाना ज़रूरी है?

रात भर दीपक जलाने की परंपरा है, पर ज़रूरी है कि वह सुरक्षित जगह पर हो। सोने से पहले घी भर दें और पास में कपड़ा या पर्दा न हो।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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