लक्ष्मी पूजा
लक्ष्मी पूजा दीपावली की मुख्य पूजा है, जो कार्तिक अमावस्या की शाम प्रदोष काल में की जाती है। इसमें माँ लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश, कुबेर और माँ सरस्वती की पूजा होती है, ताकि घर में धन के साथ बुद्धि और विवेक भी बना रहे।
क्यों करते हैं
पुराणों के अनुसार लक्ष्मी जी समुद्र मंथन से प्रकट हुईं और भगवान विष्णु को वरण किया। मान्यता है कि दीपावली की अमावस्या की रात वे पृथ्वी पर आती हैं और साफ़-सुथरे, प्रकाशित घरों में वास करती हैं। गणेश जी की पूजा पहले इसलिए होती है कि हर शुभ काम उन्हीं से शुरू होता है।
किस समय करें
पूर्णिमांत पंचांग में कार्तिक अमावस्या (अमांत में आश्विन अमावस्या)। जिस दिन प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद लगभग ढाई घंटे, में अमावस्या हो, उसी दिन पूजा होती है। इस अवधि में जब वृषभ लग्न हो, वह सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि स्थिर लग्न में की गई पूजा से लक्ष्मी स्थिर रहती हैं। व्यापारी कई बार निशीथ काल में भी पूजा करते हैं।
पूजा कैसे होती है
- पूजा स्थान साफ़ करके लाल या पीले कपड़े की चौकी पर लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्ति, गणेश जी को लक्ष्मी जी के बाईं ओर।
- जल से भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल; चावल से नवग्रह या स्वस्तिक।
- सिक्के, गहने, बही-खाते, कलम और तिजोरी की चाबी पूजा में रखें।
- संकल्प, गणेश पूजन, फिर लक्ष्मी पूजन: रोली, अक्षत, कमल या गुलाब, खील-बताशे, मिठाई।
- ॐ जय लक्ष्मी माता आरती, फिर घर भर में दीये।
हर चरण के मंत्र और विस्तार दिवाली लक्ष्मी पूजन विधि में, सामान की सूची दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट में और जप के लिए लक्ष्मी-कुबेर मंत्र में है। कई घरों में पूजा के बाद लक्ष्मी चालीसा भी पढ़ी जाती है। पूरे पर्व की जानकारी के लिए दीपावली पृष्ठ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कब करें?
लक्ष्मी जी के साथ किन देवताओं की पूजा होती है?
लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति कैसे रखें?
लक्ष्मी पूजा में कौन सा भोग लगाएं?
क्या पूजा के बाद मूर्ति बदलनी चाहिए?
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