लक्ष्मी और कुबेर मंत्र: अर्थ और जाप विधि

सबसे सरल और प्रचलित लक्ष्मी मंत्र “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” है और कुबेर का प्रमुख मंत्र “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा” है। इनका जाप शुक्रवार, दिवाली की रात या धनतेरस को, स्नान के बाद पूर्व या उत्तर मुख होकर कमलगट्टे की माला से 108 बार किया जाता है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 5 मिनट का पाठ
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घर में सबसे ज़्यादा बोला जाने वाला लक्ष्मी मंत्र “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” है, और धन के रक्षक कुबेर का प्रमुख मंत्र “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय…” है। इनका जाप दिवाली की रात, धनतेरस और हर शुक्रवार को विशेष रूप से किया जाता है। मंत्र का असर तब है जब उसका अर्थ समझकर, साफ़ मन और मेहनत की कमाई के साथ जाप किया जाए; इसे कोई जादू-टोना न समझें।

लक्ष्मी पूजा में मंत्रों की जगह

लक्ष्मी जी को चंचला कहा गया है, जो वहीं ठहरती हैं जहाँ सफ़ाई, सच्चाई, मेहनत और आपसी प्रेम हो। पूजा में मंत्र इसी भाव को शब्द देते हैं। दिवाली पूजन में हर सामग्री चढ़ाते समय एक छोटा नाम-मंत्र बोला जाता है, पूजा के आखिर में स्तुति या श्री सूक्त पढ़ा जाता है, और फिर ॐ जय लक्ष्मी माता आरती होती है। पूजन का पूरा क्रम दिवाली लक्ष्मी पूजन विधि में दिया गया है।

एक बात साफ़ रहे: बीज मंत्र, जैसे श्रीं, ह्रीं, क्लीं, वाले लंबे मंत्र कई परंपराओं में गुरु से दीक्षा लेकर जपे जाते हैं। साधारण गृहस्थ के लिए नाम मंत्र, गायत्री और स्तुति के श्लोक बिना किसी संकोच के पढ़े जा सकते हैं।

प्रमुख लक्ष्मी मंत्र और अर्थ

मंत्रसरल अर्थकब बोलें
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः“श्रीं” लक्ष्मी का बीज अक्षर है; अर्थ है, महालक्ष्मी को नमस्काररोज़, शुक्रवार, दिवाली; सबसे सरल मंत्र
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि। तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥हम महालक्ष्मी को जानें, विष्णु की पत्नी का ध्यान करें; वे लक्ष्मी हमारी बुद्धि को प्रेरित करेंसुबह की पूजा, दिवाली पर 108 बार
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते॥हे महामाया, श्रीपीठ पर विराजमान, देवताओं से पूजित, शंख-चक्र-गदा धारण करने वाली महालक्ष्मी, आपको नमस्कारमहालक्ष्मी अष्टक का पहला श्लोक; पूजा पूरी होने पर
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥जो देवी सब प्राणियों में लक्ष्मी रूप में स्थित हैं, उन्हें बार-बार नमस्कारदुर्गा सप्तशती से; नवरात्रि और शुक्रवार
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥हे कमल पर रहने वाली कमला, प्रसन्न हों, प्रसन्न हों; महालक्ष्मी को नमस्कारदिवाली की रात; बीज मंत्र होने से कई लोग गुरु की सलाह से जपते हैं

महालक्ष्मी अष्टक पद्म पुराण से जुड़ा माना जाता है, जिसमें इंद्र देवी की स्तुति करते हैं। उत्तर भारत के घरों में श्री लक्ष्मी चालीसा भी इसी भाव से पढ़ी जाती है।

कुबेर मंत्र और अर्थ

कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष और उत्तर दिशा के स्वामी हैं, जिन्हें यक्षों का राजा भी कहा जाता है। लक्ष्मी धन देने वाली हैं, तो कुबेर उसकी रक्षा और बढ़ोतरी के देवता माने जाते हैं। इसीलिए धनतेरस और दिवाली पर दोनों की साथ पूजा होती है।

  • ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
    अर्थ: यक्षराज, विश्रवा के पुत्र कुबेर, जो धन और अन्न के स्वामी हैं, मुझे धन-धान्य की समृद्धि दें और दिलवाएँ। यह सबसे प्रचलित कुबेर मंत्र है।
  • ॐ कुबेराय नमः
    अर्थ: कुबेर को नमस्कार। तिजोरी, बही-खाते या दुकान के गल्ले की पूजा करते समय यही छोटा मंत्र बोला जाता है।

व्यापारी परिवारों में दिवाली पर नए बही-खाते पर रोली से स्वस्तिक और “शुभ-लाभ” लिखकर कुबेर और लक्ष्मी का पूजन करने की पुरानी रीत है। धनतेरस पर क्या खरीदें और कुबेर पूजन की बात धनतेरस पर क्या खरीदें में भी है।

श्री सूक्त का परिचय

श्री सूक्त लक्ष्मी की सबसे पुरानी स्तुति है, जो ऋग्वेद के खिल भाग में मिलती है। इसमें 15 ऋचाएँ हैं, और आगे फलश्रुति के श्लोक जुड़ते हैं। पहली ऋचा है:

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्।
चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

अर्थ: हे अग्निदेव, सोने जैसी आभा वाली, सोने-चाँदी की माला पहनने वाली, चंद्रमा जैसी शीतल और स्वर्णमयी लक्ष्मी को मेरे घर बुलाइए।

पूरे सूक्त में लक्ष्मी को अग्नि के माध्यम से बुलाया जाता है और “अलक्ष्मी”, यानी दरिद्रता, भूख-प्यास और गंदगी को घर से दूर करने की प्रार्थना है। दक्षिण और महाराष्ट्र में शुक्रवार को श्री सूक्त का पाठ आम है, और उत्तर भारत में दिवाली व शरद पूर्णिमा के पूजन में पंडित जी इसे पढ़ते हैं। संस्कृत न पढ़ सकें तो इसका हिंदी अर्थ पढ़ना भी अच्छा है।

जाप विधि: समय, माला, संख्या

  1. समय: सुबह स्नान के बाद, या शाम को दीपक जलाकर। दिवाली की रात प्रदोष काल और उसके बाद का समय सबसे शुभ माना जाता है।
  2. आसन और दिशा: लाल या पीले कपड़े के आसन पर, पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठें। उत्तर कुबेर की दिशा भी है।
  3. सामने: लक्ष्मी जी की तस्वीर या श्री यंत्र, घी का दीपक, लाल फूल या कमल, और खीर या मिश्री का भोग।
  4. माला: लक्ष्मी के लिए कमलगट्टे की माला पारंपरिक है; स्फटिक या तुलसी की माला भी ली जाती है।
  5. संख्या: एक माला यानी 108 बार। शुरुआत में रोज़ एक माला काफ़ी है; दिवाली पर 11 या 21 माला का संकल्प लिया जा सकता है।
  6. नियम: माला दाहिने हाथ में, अंगूठे और मध्यमा से फेरें; सुमेरु (बड़ा मनका) पार न करें, वहाँ से माला उलट लें।
  7. अंत: जाप के बाद आरती करें और जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा माँगें।

दिवाली और शुक्रवार के लिए

  • दिवाली की रात: लक्ष्मी पूजन के बाद महालक्ष्मी गायत्री या “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” की कम से कम एक माला, और तिजोरी के पास “ॐ कुबेराय नमः”। मुहूर्त लक्ष्मी पूजा पृष्ठ पर देखें।
  • धनतेरस: शाम को कुबेर मंत्र और धन्वंतरि का स्मरण।
  • शरद पूर्णिमा (कोजागरी): रात जागकर लक्ष्मी मंत्र का जाप बंगाल, बिहार और ओडिशा में खास परंपरा है।
  • हर शुक्रवार: घर साफ़ करके शाम को घी का दीया, एक माला जाप और लक्ष्मी चालीसा। उत्तर भारत में शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत भी बहुत रखा जाता है, जिसमें घर की सुख-शांति की ही कामना होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्ष्मी जी का सबसे आसान मंत्र कौन सा है?

“ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” सबसे सरल और प्रचलित मंत्र है, जिसे कोई भी रोज़ 108 बार जप सकता है।

कुबेर मंत्र क्या है?

प्रमुख कुबेर मंत्र है “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा”। छोटा रूप “ॐ कुबेराय नमः” है।

लक्ष्मी मंत्र का जाप किस माला से करें?

परंपरा में कमलगट्टे की माला लक्ष्मी जाप के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। स्फटिक या तुलसी की माला भी ली जाती है।

श्री सूक्त क्या है?

श्री सूक्त ऋग्वेद के खिल भाग में मिलने वाली लक्ष्मी की 15 ऋचाओं की स्तुति है, जो दिवाली, शुक्रवार और शरद पूर्णिमा पर पढ़ी जाती है।

क्या बीज मंत्र बिना गुरु के जप सकते हैं?

कई परंपराएँ बीज मंत्र गुरु से दीक्षा लेकर जपने की सलाह देती हैं। सामान्य गृहस्थ के लिए नाम मंत्र, लक्ष्मी गायत्री और स्तुति के श्लोक सरल और सुरक्षित विकल्प हैं।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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