छठ पूजा सामग्री लिस्ट

छठ पूजा के लिए बाँस का सूप और दउरा, ईख, डाभ नींबू, सुथनी, सिंघाड़ा, केला, नारियल, हल्दी-अदरक के पौधे, ठेकुआ के लिए आटा-गुड़-घी, अर्घ्य के लिए दूध और लोटा, व्रती के नए कपड़े और घाट के लिए दीये चाहिए। नीचे दिन-वार पूरी चेकलिस्ट है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 5 मिनट का पाठ
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छठ पूजा की सामग्री में सबसे ज़रूरी हैं बाँस के सूप और दउरा, मौसमी फल-सब्ज़ियाँ (ईख, डाभ नींबू, सुथनी, सिंघाड़ा, केला, नारियल), ठेकुआ का सामान और अर्घ्य के लिए दूध। ज़्यादातर चीज़ें छठ से दो-तीन दिन पहले ही बाज़ार में आती हैं और आख़िरी दिन बहुत महँगी हो जाती हैं, इसलिए यह सूची मिलाकर पहले से ख़रीदारी कर लें।

किस दिन कौन-सा काम होता है, यह छठ पूजा विधि में क्रम से बताया गया है। इस साल की तारीख़ छठ पूजा पृष्ठ पर देखें।

सूप, दउरा और बर्तन

  • बाँस का सूप: हर व्रती के लिए कम से कम 2 (संध्या और उषा अर्घ्य के लिए), बहुत से घरों में 5, 7 या 11 सूप मन्नत के हिसाब से। पीतल का सूप भी चलता है।
  • दउरा (बाँस की बड़ी टोकरी): 1 या 2, जिसमें सारा सामान घाट तक जाता है।
  • पीतल या ताँबे का लोटा: दूध और जल से अर्घ्य देने के लिए। जितने लोग अर्घ्य देंगे, उतने लोटे हों तो अच्छा।
  • मिट्टी का चूल्हा और आम की लकड़ी: खरना और प्रसाद बनाने के लिए। गैस पर बनाना हो तो नए बर्तन अलग रखें।
  • पीतल की कड़ाही, नया बेलन-चौकी, छलनी, बड़ी परात।
  • केले के पत्ते, खरना का भोग परोसने के लिए।
  • मिट्टी के दीये (कम से कम 12–24), रुई की बाती, घी या सरसों का तेल।
  • मिट्टी का हाथी और कलश, अगर कोसी भरनी है।

सूप नया खरीदें तो उसे एक बार धोकर धूप में सुखा लें, फिर उस पर सिंदूर और हल्दी से टीका लगाएँ।

अर्घ्य के फल-सब्ज़ियाँ: ईख, डाभ नींबू, सुथनी, सिंघाड़ा

छठ में वही फल चढ़ते हैं जो इस मौसम में खेत से आते हैं। इसीलिए इसे प्रकृति का पर्व भी कहते हैं।

  • ईख (गन्ना): पत्तों समेत, कम से कम 5 डंठल। कोसी भरनी हो तो 5 या 7 और।
  • डाभ नींबू (बड़ा नींबू/चकोतरा): छठ का ख़ास फल, हर सूप में एक।
  • सुथनी: शकरकंद जैसा कंद, बिहार में ख़ूब मिलता है। न मिले तो शकरकंद रख लें।
  • सिंघाड़ा (पानी फल), केले का घौद (कच्चा या पका), पानी वाला नारियल (जटा समेत)।
  • हल्दी और अदरक के हरे पौधे जड़ समेत, मूली पत्ते समेत।
  • अमरूद, शरीफ़ा, सेब, संतरा, अनार, नाशपाती: जो मिल जाए।
  • सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची।

फल पूरे हों, कटे या दागी न हों। किसी शहर में डाभ नींबू या सुथनी न मिले तो चिंता न करें, जो मौसमी फल श्रद्धा से मिल सकें वही चढ़ाएँ। छठी मइया भाव देखती हैं, सूची नहीं।

प्रसाद का सामान

  • ठेकुआ के लिए: गेहूँ का आटा (घर में पिसा हो तो बेहतर), गुड़, घी, सूखा नारियल का बुरादा, सौंफ, इलायची। विधि छठ का ठेकुआ और प्रसाद में है।
  • कसार (चावल के लड्डू): अरवा चावल का आटा, गुड़ या चीनी, घी।
  • खरना के लिए: अरवा चावल, गुड़, दूध, गेहूँ का आटा, घी।
  • नहाय-खाय के लिए: अरवा चावल, चने की दाल, लौकी, सेंधा नमक या साफ़ नमक, घी।
  • अर्घ्य के लिए कच्चा दूध (गाय का हो तो अच्छा), गंगाजल।
  • मिठाई (अगर घर की परंपरा हो), बताशे, मखाना, किशमिश।

व्रती के कपड़े और श्रृंगार

  • महिला व्रती: बिना सिली नई साड़ी, अक्सर पीली, केसरिया या लाल। सुबह और शाम के अर्घ्य के लिए अलग साड़ी रखें, क्योंकि पानी में भीगेगी।
  • पुरुष व्रती: धोती और गमछा।
  • नारंगी (पीला) सिंदूर, जो नाक से माँग तक लगाया जाता है; आलता, चूड़ी, बिंदी।
  • सूखे कपड़े, शॉल और तौलिया, क्योंकि कार्तिक की सुबह पानी बहुत ठंडा होता है।

घाट पर ले जाने का सामान

  • चटाई या दरी, जिस पर परिवार बैठ सके।
  • माचिस, अतिरिक्त दीये, अगरबत्ती, धूप।
  • लोटा, गिलास, दूध की बोतल।
  • टॉर्च, क्योंकि उषा अर्घ्य के लिए अँधेरे में पहुँचना होता है।
  • बदलने के कपड़े और प्लास्टिक की थैली गीले कपड़ों के लिए।
  • छोटे बच्चों के लिए गर्म कपड़े और पानी।

दिन-वार चेकलिस्ट

दिनक्या तैयार रखें
नहाय-खाय से एक दिन पहलेघर की सफ़ाई, सूप-दउरा, मिट्टी का चूल्हा, गेहूँ धोकर सुखाना और पिसवाना
नहाय-खाय (चतुर्थी)अरवा चावल, चने की दाल, लौकी, घी, सेंधा नमक
खरना (पंचमी)गुड़, दूध, अरवा चावल, आटा, केले के पत्ते, आम की लकड़ी
संध्या अर्घ्य (षष्ठी)सारे फल, ठेकुआ-कसार, दीये, लोटा, दूध, सूप सजाना, कोसी का सामान
उषा अर्घ्य (सप्तमी)नए सूप सजाना, ताज़ा दूध, टॉर्च, गर्म कपड़े, पारण के लिए अदरक और गुड़

क्या न ख़रीदें, किन बातों से बचें

  • बाज़ार का तला हुआ ठेकुआ या पैकेट वाला प्रसाद अर्घ्य में न रखें। प्रसाद घर की साफ़ रसोई में, व्रत के नियम से बना हो, यही छठ की रीत है।
  • रिफ़ाइंड तेल की जगह घी या शुद्ध सरसों तेल ही इस्तेमाल करें, और प्रसाद के बर्तन में पहले कभी प्याज़-लहसुन वाला खाना न बना हो।
  • सूप और दउरा ख़रीदते समय देख लें कि बाँस कहीं से टूटा या फटा न हो।
  • फूल-माला बहुत ज़्यादा लेने की ज़रूरत नहीं; छठ में फल और प्रसाद ही मुख्य हैं, गेंदे की कुछ मालाएँ सूप सजाने के लिए काफ़ी हैं।

अगर आप पहली बार छठ कर रही हैं, तो मोहल्ले या परिवार की किसी अनुभवी व्रती से एक बार सूप सजाने का तरीका देख लें। हर गाँव-घर की अपनी छोटी-छोटी रीतें होती हैं, जैसे सूप में किस ओर क्या रखा जाए, और उनका सम्मान करना ही सही है।

कुछ काम की बातें

गेहूँ को छठ से कुछ दिन पहले धोकर छत पर सुखाया जाता है, और उस दौरान कोई चिड़िया उसे जूठा न करे, इसका ध्यान घर का कोई सदस्य रखता है। यह बात सुनने में छोटी है, पर पूर्वांचल के घरों में इसे बहुत गंभीरता से लिया जाता है।

प्लास्टिक के सूप या रेडीमेड "छठ किट" आजकल ऑनलाइन मिलती हैं। परंपरा बाँस के सामान की है, इसलिए हो सके तो बाँस का सूप ही लें। घाट पर प्लास्टिक और फूल-पत्ते पानी में न छोड़ें, उन्हें थैली में वापस ले आएँ।

पूजा के पीछे की कथा, यानी राजा प्रियव्रत और षष्ठी देवी का प्रसंग, छठ पूजा व्रत कथा में पढ़ें। घाट पर अर्घ्य का सही समय अपने शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त के हिसाब से आज का पंचांग में देख लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छठ पूजा में कितने सूप लगते हैं?

हर व्रती के लिए कम से कम दो सूप चाहिए, एक संध्या अर्घ्य और एक उषा अर्घ्य के लिए। बहुत से परिवार मन्नत के अनुसार 5, 7 या 11 सूप सजाते हैं।

छठ में कौन से फल चढ़ते हैं?

ईख, डाभ नींबू, सुथनी, सिंघाड़ा, केला, पानी वाला नारियल, मूली और हल्दी-अदरक के पौधे मुख्य हैं। साथ में अमरूद, शरीफ़ा, सेब, संतरा जैसे मौसमी फल भी रखे जाते हैं।

डाभ नींबू या सुथनी न मिले तो क्या करें?

जो मौसमी फल मिल सकें, वही पूरे और साफ़ रूप में चढ़ाएँ। सुथनी की जगह शकरकंद रखा जा सकता है।

छठ में व्रती कौन से कपड़े पहनते हैं?

महिलाएँ बिना सिली नई साड़ी, अक्सर पीली या केसरिया, और पुरुष धोती पहनते हैं। सुबह के अर्घ्य के लिए सूखे कपड़े अलग रखें।

क्या प्लास्टिक का सूप इस्तेमाल कर सकते हैं?

परंपरा बाँस या पीतल के सूप की है। जहाँ तक हो सके बाँस का सूप ही लें।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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