छठ का ठेकुआ और प्रसाद कैसे बनाएं

छठ का ठेकुआ गेहूँ के आटे, गुड़, घी, सूखे नारियल और इलायची से बनता है: गुड़ के पानी से कड़ा आटा गूँधकर साँचे पर छापते हैं और धीमी आँच पर घी में सुनहरा-भूरा होने तक तलते हैं। खरना में गुड़ की खीर और घी लगी रोटी, और अर्घ्य के सूप में ठेकुआ, कसार और फल चढ़ते हैं।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 5 मिनट का पाठ
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छठ का ठेकुआ गेहूँ के आटे, गुड़ और घी से बनने वाला कड़क, मीठा प्रसाद है, जिसे लकड़ी के साँचे पर छापकर धीमी आँच पर तला जाता है। यह अर्घ्य के सूप का सबसे ज़रूरी प्रसाद है, और इसके साथ खरना की गुड़ वाली खीर और चावल के कसार लड्डू भी बनते हैं। नीचे घर की रसोई के हिसाब से पूरी विधि दी गई है।

छठ प्रसाद की शुद्धता के नियम

बिहार, पूर्वांचल और झारखंड में छठ का प्रसाद बनाना अपने आप में पूजा है। स्वाद से पहले शुद्धता गिनी जाती है:

  • गेहूँ की तैयारी: कई घरों में गेहूँ धोकर छत पर सुखाया जाता है और कोई न कोई पास बैठकर पहरा देता है, ताकि चिड़िया उसे जूठा न करे। फिर साफ़ चक्की पर पिसवाया जाता है।
  • अलग चूल्हा और बर्तन: गाँवों में नया मिट्टी का चूल्हा और आम की लकड़ी इस्तेमाल होती है। शहरों में गैस चूल्हा अच्छी तरह धोकर, नए या सिर्फ़ छठ के लिए रखे बर्तनों में प्रसाद बनता है।
  • नमक, प्याज़, लहसुन नहीं: नहाय-खाय से पारण तक रसोई में ये चीज़ें नहीं आतीं।
  • स्नान करके बनाएँ: प्रसाद बनाने वाले नहाकर साफ़ कपड़े पहनते हैं और बनाते समय कुछ खाते-पीते नहीं।
  • चखना मना: अर्घ्य से पहले प्रसाद को कोई नहीं चखता। मिठास का अंदाज़ा अनुभव से ही लगाया जाता है।

चार दिन का पूरा क्रम, नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक, छठ पूजा विधि में पढ़ें। इस साल की तिथियाँ छठ पूजा पृष्ठ पर हैं।

ठेकुआ की सामग्री

लगभग 25 से 30 ठेकुआ के लिए:

सामग्रीमात्राध्यान दें
गेहूँ का आटा500 ग्रामथोड़ा दरदरा आटा हो तो ठेकुआ ज़्यादा खस्ता बनता है
गुड़200 से 250 ग्रामसाफ़, हल्के रंग का गुड़; कुछ घरों में चीनी भी चलती है
पानीकरीब आधा कपसिर्फ़ गुड़ घोलने के लिए
देसी घी (मोयन)4 बड़े चम्मचयही ठेकुए को खस्ता बनाता है
सूखा नारियल, कसा हुआ2 से 3 बड़े चम्मचवैकल्पिक, पर ज़्यादातर घरों में डलता है
इलायची पाउडर1 छोटा चम्मचकुछ लोग सौंफ भी डालते हैं
कटे मेवेमुट्ठी भरवैकल्पिक
तलने के लिए घी या तेलज़रूरत भरपारंपरिक रूप से घी; कई घरों में रिफाइंड

साँचा न हो तो चिंता न करें। स्टील की कटोरी के पीछे, कांटे से या जाली वाली प्लेट पर दबाकर भी डिज़ाइन बन जाता है।

ठेकुआ बनाने की विधि

  1. गुड़ का पानी: गुड़ को तोड़कर आधा कप गुनगुने पानी में घोल लें। आँच पर चाशनी नहीं बनानी है, बस घुल जाए। छान लें ताकि कंकड़ न रहे, और ठंडा होने दें।
  2. मोयन: परात में आटा लें, उसमें घी डालकर हथेलियों से अच्छी तरह मसलें। मुट्ठी में दबाने पर आटा लड्डू की तरह बँधने लगे तो मोयन सही है।
  3. मसाला: नारियल, इलायची और मेवे मिला दें।
  4. गूँधना: गुड़ का पानी थोड़ा-थोड़ा डालकर कड़ा आटा गूँधें, पूड़ी के आटे से भी सख्त। नरम आटा होगा तो ठेकुआ तेल पिएगा और फैल जाएगा।
  5. आराम: आटे को ढककर 10 से 15 मिनट रख दें।
  6. छापना: नींबू जितनी लोई लें, हल्की गोल करें और साँचे पर रखकर हथेली से दबाएँ। करीब आधा सेंटीमीटर मोटा रखें, बहुत पतला नहीं।
  7. तलना: कढ़ाई में घी मध्यम गरम करें, फिर आँच धीमी कर दें। एक बार में 4-5 ठेकुआ डालें और हर तरफ़ 3 से 4 मिनट, गहरा सुनहरा-भूरा होने तक तलें। तेज़ आँच पर बाहर से जल जाएगा और अंदर कच्चा रहेगा।
  8. ठंडा करना: जाली या छलनी पर निकालें। गरम में नरम लगेगा, ठंडा होकर कड़क हो जाएगा।

हवाबंद डिब्बे में ठेकुआ दस-पंद्रह दिन आराम से चलता है। यही वजह है कि बिहार से दूर बैठे बेटे-बेटियों तक कूरियर से ठेकुआ पहुँचाने का चलन भी खूब है।

खरना की गुड़ वाली खीर और रोटी

छठ के दूसरे दिन, पंचमी की शाम को खरना होता है। व्रती दिन भर निर्जल रहकर शाम को यही प्रसाद ग्रहण करते हैं, और उसके बाद 36 घंटे का निर्जल व्रत शुरू होता है।

रसियाव (गुड़ की खीर)

  1. अरवा चावल (बिना उबाला चावल) धोकर आधा घंटा भिगो दें।
  2. पीतल या मिट्टी के बर्तन में दूध उबालें और चावल डालकर धीमी आँच पर पकाएँ।
  3. चावल गल जाए तो आँच बंद करके थोड़ा ठंडा होने दें, फिर कसा हुआ गुड़ मिलाएँ। उबलते दूध में गुड़ डालने से दूध फट सकता है, इसलिए यह क्रम ज़रूरी है।
  4. ऊपर से इलायची डाल दें।

रोटी

गेहूँ के आटे की सादी रोटी या पूड़ी, ऊपर से घी लगाकर, केले के पत्ते पर खीर और केले के साथ रखी जाती है। व्रती पूजा के बाद एकांत में यह प्रसाद लेते हैं, फिर घर के लोग और पड़ोसी खरना का प्रसाद पाने आते हैं।

कसार (चावल के लड्डू)

  1. अरवा चावल धोकर कपड़े पर फैलाकर हल्का सुखा लें, जब तक नमी थोड़ी रहे।
  2. मिक्सी में दरदरा पीसें, सूजी जैसा।
  3. कढ़ाई में धीमी आँच पर हल्का भूनें, रंग बदलने न दें।
  4. कसा गुड़ और थोड़ा घी मिलाएँ। चाहें तो भुना तिल और नारियल डालें।
  5. गरम-गरम में ही हथेली से दबाकर लड्डू बाँध लें।

कुछ घरों में कसार आटे से भी बनता है। सूप में ठेकुआ और कसार के साथ केला, गन्ना, बड़ा नींबू, नारियल, सिंघाड़ा, शकरकंद और हल्दी-अदरक के पौधे रखे जाते हैं। पूरी लिस्ट छठ पूजा सामग्री लिस्ट में है।

प्रसाद बाँटने की रीत

  • उषा अर्घ्य के बाद व्रती घाट पर ही थोड़ा प्रसाद और जल लेकर पारण करते हैं।
  • घाट पर लोग खुद आगे बढ़कर प्रसाद माँगते हैं। छठ का प्रसाद माँगना शर्म नहीं, सौभाग्य माना जाता है, और व्रती किसी को खाली हाथ नहीं लौटाते।
  • घर लौटकर पड़ोस, रिश्तेदारों और काम करने वालों के घर ठेकुआ भेजा जाता है।
  • प्रसाद ज़मीन पर न गिरे, न फेंका जाए। बच जाए तो गाय को खिला दें।

छठी मैया और राजा प्रियव्रत की कहानी संक्षेप में यह है कि संतान-सुख के लिए षष्ठी देवी की पूजा से उनके घर खुशी लौटी। पूरी कथा छठ पूजा व्रत कथा में पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ठेकुआ में गुड़ और आटा कितना लें?

500 ग्राम गेहूँ के आटे में 200 से 250 ग्राम गुड़ और 4 बड़े चम्मच घी का मोयन ठीक रहता है। इससे करीब 25 से 30 ठेकुआ बनते हैं।

ठेकुआ नरम क्यों हो जाता है?

आटा ढीला गूँधने, मोयन कम होने या तेज़ आँच पर तलने से ठेकुआ अंदर से नरम रह जाता है। कड़ा आटा और धीमी आँच ज़रूरी है।

खरना में क्या बनता है?

खरना में अरवा चावल, दूध और गुड़ की खीर (रसियाव), घी लगी रोटी या पूड़ी और केला प्रसाद के रूप में बनता है, बिना नमक के।

ठेकुआ कितने दिन तक चलता है?

अच्छी तरह तला और ठंडा किया हुआ ठेकुआ हवाबंद डिब्बे में दस-पंद्रह दिन तक ठीक रहता है।

क्या ठेकुआ चीनी से बना सकते हैं?

हाँ, कई घरों में चीनी वाला ठेकुआ भी बनता है, लेकिन पारंपरिक रूप से छठ के लिए गुड़ वाला ठेकुआ ही पसंद किया जाता है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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