दिवाली पर कितने दीपक जलाएँ, इसकी शास्त्र में कोई एक तय गिनती नहीं है। उत्तर भारत में ज़्यादातर परिवार विषम संख्या में दीये जलाते हैं, जैसे 11, 21, 51 या 101, और गिनती से ज़्यादा ध्यान इस पर देते हैं कि घर का कोई कोना अँधेरा न रहे। पूजा घर का घी का दीपक, मुख्य द्वार के दो दीये, तुलसी, रसोई और पानी की जगह, ये पाँच जगहें तो लगभग हर घर में ज़रूर रोशन होती हैं।
पाँच दिनों के दीपक: धनतेरस से भाई दूज
दिवाली एक रात का नहीं, पाँच दिन का दीपोत्सव है, और हर दिन के दीये का अपना मतलब है।
| दिन | कौन सा दीपक | कहाँ और कैसे |
|---|---|---|
| धनतेरस | यम दीपक | शाम को आटे या मिट्टी का चौमुखा दीया, सरसों के तेल का, मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके |
| नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) | यम के लिए दीया और 14 दीये | कई घरों में घर के बाहर नाली या कूड़े की जगह के पास दीया रखा जाता है; बहुत से परिवार चौदह दीये जलाते हैं |
| दिवाली (अमावस्या) | लक्ष्मी पूजन का घी दीपक और दीपमाला | पूजा घर से लेकर पूरे घर, छत और दरवाज़े तक |
| गोवर्धन पूजा | गोवर्धन और गायों के पास दीपक | गोबर के गोवर्धन पर, गौशाला या आँगन में |
| भाई दूज | यम-यमुना के नाम का दीया | तिलक की थाली में दीया; कुछ घरों में शाम को दरवाज़े पर दीपक |
धनतेरस के दीये के पीछे राजा हिम के पुत्र की कथा है, जिसमें दीपों की रोशनी ने यमराज को लौटा दिया था। छोटी दिवाली के दीपों और रूप चौदस की पूरी विधि नरक चतुर्दशी यम दीपक विधि में पढ़ें।
दिवाली की रात कहाँ-कहाँ दीपक रखें
लक्ष्मी पूजन के बाद पहला दीया पूजा घर से लेकर बाकी दीये घर भर में रखे जाते हैं। यह सूची बहुत से घरों की परंपरा से मिलाकर बनाई गई है:
- पूजा घर: लक्ष्मी-गणेश के सामने बड़ा घी का दीपक, जो रात भर जले। इसी से बाकी दीये जलाने की रीत है।
- मुख्य द्वार: दरवाज़े के दोनों ओर एक-एक दीया। मान्यता है कि लक्ष्मी जी इसी रास्ते घर आती हैं।
- तुलसी: तुलसी के गमले या चौरे के पास एक दीया।
- रसोई: अन्नपूर्णा के नाम का दीया, चूल्हे से थोड़ा दूर।
- पानी की जगह: नल, हैंडपंप, कुआँ या पानी की टंकी के पास।
- तिजोरी या अलमारी: जहाँ घर का धन, गहने या बही-खाते रखते हों।
- आँगन और सीढ़ियाँ: आँगन के बीच और सीढ़ियों के हर मोड़ पर।
- छत और मुंडेर: छत की दीवार पर कतार से दीये; यही दूर से दिखने वाली दीपमाला है।
- घर के अँधेरे कोने: स्टोर, पिछला दरवाज़ा, गली की ओर की खिड़की।
- पास का पीपल या मंदिर: गाँवों में लोग पास के पीपल, मंदिर, चौराहे और कुएँ पर भी दीया रख आते हैं।
बाथरूम और जूते-चप्पल रखने की जगह पर पूजा के दीये नहीं रखे जाते। वहाँ रोशनी चाहिए तो बिजली की लाइट काफ़ी है।
घी या सरसों का तेल
- घी का दीपक: भगवान के सामने, पूजा घर में और लक्ष्मी पूजन के मुख्य दीपक के लिए। देसी गाय का घी सबसे अच्छा माना जाता है।
- सरसों का तेल: दरवाज़े, छत, आँगन और बाहर के दीयों के लिए, और यम दीपक हमेशा सरसों के तेल का। उत्तर भारत में घर भर की दीपमाला ज़्यादातर सरसों के तेल से ही होती है।
- तिल का तेल: कई परिवार शनि और पितरों से जुड़े दीयों में तिल का तेल डालते हैं।
इस्तेमाल किया हुआ, बार-बार तला हुआ तेल दीयों में न डालें; धुआँ ज़्यादा होता है और भाव भी ठीक नहीं।
दीपक की दिशा और बत्ती
पूजा के दीपक की लौ पूर्व या उत्तर की ओर रहे, यह आम नियम है। सिर्फ़ यम दीपक की लौ दक्षिण की ओर रखी जाती है, क्योंकि दक्षिण यम की दिशा मानी जाती है। लक्ष्मी पूजन वाले दीपक को अपने दाहिनी ओर रखें।
बत्ती को लेकर भी घरों की अपनी रीत है:
- घी के दीपक में रुई की गोल फूलबत्ती या खड़ी बत्ती।
- तेल के दीयों में लंबी, बटी हुई बत्ती।
- लाल धागे या कलावे की बत्ती कई घरों में लक्ष्मी पूजन के लिए बनाई जाती है।
- चौमुखे दीये में चार बत्तियाँ, चारों दिशाओं की ओर।
अखंड दीपक
बहुत से परिवार लक्ष्मी पूजन का बड़ा घी का दीपक रात भर, यानी अगली सुबह तक, अखंड जलाते हैं। इसके लिए बड़ा दीया या पीतल का दीपक लें, घी ज़्यादा भरें और लंबी बत्ती रखें। रात में एक बार उठकर घी देख लें। हवा से बचाने के लिए काँच की चिमनी रखी जा सकती है।
सुरक्षा सबसे पहले: अखंड दीपक पर्दों, कागज़ की सजावट और पटाखों से दूर रखें, और बच्चों-पालतू जानवरों की पहुँच से भी। फ़्लैट में रहने वाले छोटा दीपक भी रख सकते हैं, भाव वही रहता है।
मिट्टी के दीयों की तैयारी
- नए दीये कुम्हार से या बाज़ार से एक-दो दिन पहले लाएँ।
- जलाने से पहले उन्हें 2 से 3 घंटे पानी में भिगो दें, ताकि मिट्टी तेल न सोखे।
- फिर निकालकर पूरी तरह सुखा लें; गीले दीये में तेल छिटकता है।
- बत्तियाँ एक दिन पहले बना लें और हल्का तेल में डुबो कर रखें।
- चाहें तो दीयों पर रोली या गेरू से हल्की सजावट कर लें।
मिट्टी के दीये खरीदना अपने आप में दिवाली का हिस्सा है, क्योंकि इससे कुम्हार के घर भी दिवाली मनती है। अगले दिन बचे दीये धोकर सँभाल लें; कार्तिक भर के दीपदान में काम आएँगे, जिसके नियम कार्तिक मास दीपदान में दिए गए हैं।
लक्ष्मी पूजन का पूरा क्रम दिवाली लक्ष्मी पूजन विधि में और दीयों समेत पूरी सामग्री दिवाली पूजा सामग्री लिस्ट में है। इस साल का शुभ मुहूर्त दिवाली पृष्ठ पर देखें।

