कार्तिक मास: स्नान, दीपदान और तुलसी पूजा के नियम

उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में कार्तिक मास आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) के अगले दिन से कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। इस महीने सूर्योदय से पहले स्नान, रोज़ दीपदान, तुलसी पूजा और सात्विक भोजन का नियम रखा जाता है; करवा चौथ से देव दीपावली तक के बड़े पर्व इसी महीने आते हैं।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 5 मिनट का पाठ
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कार्तिक मास हिंदू वर्ष का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। उत्तर भारत में यह शरद पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होकर कार्तिक पूर्णिमा पर पूरा होता है, और इन तीस दिनों में भोर का स्नान, रोज़ का दीपदान और तुलसी पूजा इसके तीन मुख्य नियम हैं। स्कन्द पुराण और पद्म पुराण के कार्तिक माहात्म्य में इस महीने को भगवान विष्णु को सबसे प्रिय बताया गया है, इसलिए इसे दामोदर मास भी कहते हैं।

कार्तिक कब से कब (पूर्णिमांत गणना)

उत्तर भारत में महीने पूर्णिमांत चलते हैं, यानी महीना पूर्णिमा पर ख़त्म होता है। इस गणना में कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा (शरद पूर्णिमा के अगले दिन) से कार्तिक पूर्णिमा तक कार्तिक मास है। गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की अमांत गणना में कार्तिक दिवाली के अगले दिन से शुरू होता है, इसलिए वहाँ करवा चौथ आश्विन में गिनी जाती है। तिथियाँ वही रहती हैं, सिर्फ़ महीने का नाम बदलता है।

परंपरा में कार्तिक स्नान का संकल्प आश्विन पूर्णिमा से ही ले लिया जाता है। 2026 में यह क्रम 26 अक्टूबर (आश्विन पूर्णिमा) से 24 नवंबर (कार्तिक पूर्णिमा) तक रहेगा। आगे के सालों की तिथियाँ त्योहार कैलेंडर में देखें।

कार्तिक स्नान: समय और नियम

कार्तिक स्नान का सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त है, यानी सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पहले। गाँवों में महिलाएँ टोली बनाकर भोर में नदी या तालाब जाती हैं और लौटते हुए कार्तिक के गीत गाती हैं। शहर में घर पर स्नान करें तो नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें।

  1. पहले दिन स्नान करके हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूरे महीने के नियम का संकल्प लें। जितना निभा सकें, उतना ही संकल्प लें।
  2. रोज़ सूर्योदय से पहले स्नान करें। नदी में स्नान हो तो डुबकी लगाते समय भगवान विष्णु और गंगा का स्मरण करें।
  3. स्नान के बाद ताँबे के लोटे से सूर्य को जल दें।
  4. फिर तुलसी को जल चढ़ाकर दीया जलाएँ और विष्णु या कृष्ण का नाम जपें।
  5. पूरे महीने ब्रह्मचर्य, सच बोलना और किसी की निंदा न करना भी नियम का हिस्सा माना जाता है।

जो रोज़ भोर में न उठ सकें, वे कम से कम महीने की तीन ख़ास तिथियों पर स्नान ज़रूर करते हैं: कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी), देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा। बीमार या बुज़ुर्ग लोग ठंडे पानी की ज़िद न करें; गुनगुने पानी से स्नान करके नियम निभाना भी पूरा माना जाता है।

दीपदान और आकाशदीप

कार्तिक को दीपों का महीना कहें तो ग़लत नहीं होगा। इस पूरे महीने शाम को घी या तिल के तेल का दीया जलाने का नियम है।

  • तुलसी के पास: हर शाम तुलसी के नीचे एक दीया। यह कार्तिक का सबसे आम नियम है।
  • मंदिर में: घर के मंदिर में और पास के विष्णु या शिव मंदिर में।
  • नदी में: पत्ते के दोने में दीया रखकर बहाना, ख़ासकर पूर्णिमा पर।
  • आकाशदीप: बाँस के ऊँचे डंडे पर रस्सी से कंडील या दीया बाँधकर पूरे महीने रात में ऊपर टाँगा जाता है। मान्यता है कि यह पितरों को रास्ता दिखाता है। बनारस और पूर्वांचल में घाटों पर आज भी आकाशदीप दिखते हैं।

दीया हमेशा साफ़ जगह पर रखें, बुझ जाए तो फूँक मारकर नहीं, हाथ की हवा से या अपने आप बुझने दें, और बचा तेल पौधों में न डालें।

तुलसी पूजा और तुलसी के पास दीया

कार्तिक में तुलसी को माता लक्ष्मी का रूप मानकर विशेष पूजा होती है। सुबह स्नान के बाद तुलसी को जल दें, हल्दी-रोली लगाएँ और परिक्रमा करें। शाम को तुलसी के नीचे दीया जलाएँ और तुलसी माता की आरती गाएँ। रविवार और एकादशी को तुलसी को जल नहीं दिया जाता और पत्ते नहीं तोड़े जाते, यह नियम कार्तिक में भी रहता है।

महीने के बीच देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु जागते हैं और अगले दिन से तुलसी विवाह होता है। पूरी विधि और सामग्री के लिए तुलसी विवाह विधि और सामग्री देखें, और देव जगाने का घरेलू तरीका देवउठनी एकादशी पूजा विधि में है।

क्या खाएं, क्या न खाएं

कार्तिक में खान-पान के नियम घर-घर की परंपरा पर निर्भर हैं। जो आम तौर पर माने जाते हैं, वे ये हैं:

सामान्य तौर पर खाते हैंजिनसे बचते हैं
दूध, दही, घी, मौसमी फलमांस, मछली, अंडा, शराब
गेहूँ, चावल, मूँग की दालप्याज़ और लहसुन (नियम रखने वाले)
आँवला, सिंघाड़ा, शकरकंद, गुड़बैंगन, और कई घरों में उड़द की दाल
तिल और गुड़ की चीज़ेंबासी और दोबारा गरम किया खाना

बहुत से लोग पूरे महीने एक समय भोजन (एकभुक्त) करते हैं, कुछ ज़मीन पर सोते हैं। आँवले का इस महीने ख़ास महत्व है; अक्षय नवमी (आँवला नवमी) पर आँवले के पेड़ के नीचे भोजन बनाने और खाने की परंपरा है।

घर में छोटे बदलाव, जो कार्तिक को आसान बनाते हैं

पूरा महीना नियम निभाना शुरू में भारी लगता है। कई परिवार इसे बाँट लेते हैं: दादी भोर का स्नान और कथा संभालती हैं, बहू शाम का दीपदान, और बच्चे तुलसी को जल देने का काम। रसोई में महीने भर के लिए प्याज़-लहसुन अलग डिब्बे में रख दें, ताकि नियम वाले का खाना अलग बन सके। दीयों के लिए एक बार में बत्तियाँ बनाकर रख लें। ऐसे छोटे इंतज़ाम से नियम बोझ नहीं लगता और पूरे घर का माहौल अपने आप सात्विक हो जाता है।

इस महीने के प्रमुख व्रत-त्योहार

तिथि (पूर्णिमांत)पर्व
कृष्ण चतुर्थीकरवा चौथ
कृष्ण अष्टमीअहोई अष्टमी
कृष्ण एकादशीरमा एकादशी
कृष्ण त्रयोदशीधनतेरस, यम दीपदान
कृष्ण चतुर्दशीनरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)
अमावस्यादीपावली, लक्ष्मी पूजन
शुक्ल प्रतिपदागोवर्धन पूजा, अन्नकूट
शुक्ल द्वितीयाभाई दूज
शुक्ल चतुर्थी से सप्तमीछठ पूजा
शुक्ल अष्टमीगोपाष्टमी
शुक्ल नवमीअक्षय (आँवला) नवमी
शुक्ल एकादशीदेवउठनी एकादशी
शुक्ल द्वादशीतुलसी विवाह
शुक्ल चतुर्दशीवैकुण्ठ चतुर्दशी
पूर्णिमाकार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली, गुरु नानक जयंती

महीने का समापन कार्तिक पूर्णिमा के गंगा स्नान और दीपदान से होता है, जिसका पूरा विवरण कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली में है। जो लोग पूरे महीने नियम निभाते हैं, वे पूर्णिमा पर ब्राह्मण भोजन या किसी ज़रूरतमंद को अन्न-वस्त्र दान करके कार्तिक व्रत का समापन करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कार्तिक मास कब से कब तक होता है?

उत्तर भारत की पूर्णिमांत गणना में कार्तिक मास शरद पूर्णिमा के अगले दिन से कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। कार्तिक स्नान का संकल्प आश्विन पूर्णिमा से ही लिया जाता है।

कार्तिक स्नान किस समय करना चाहिए?

सूर्योदय से पहले, ब्रह्म मुहूर्त में स्नान सबसे अच्छा माना जाता है। नदी न हो तो घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

कार्तिक मास में क्या नहीं खाना चाहिए?

मांस, मछली, अंडा और शराब से पूरी तरह बचते हैं। नियम रखने वाले प्याज़-लहसुन भी छोड़ते हैं, और कई घरों में बैंगन व उड़द की दाल नहीं खाई जाती।

आकाशदीप क्या है?

कार्तिक में बाँस के ऊँचे डंडे पर टाँगा जाने वाला दीया या कंडील आकाशदीप कहलाता है। मान्यता है कि यह पितरों को रास्ता दिखाता है।

कार्तिक में तुलसी के पास दीया कब जलाएं?

हर शाम सूर्यास्त के बाद तुलसी के नीचे घी या तिल के तेल का दीया जलाया जाता है, साथ में तुलसी आरती गाई जाती है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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