कार्तिक पूर्णिमा
कार्तिक पूर्णिमा क्या है
कार्तिक महीने की पूर्णिमा साल की सबसे पवित्र पूर्णिमाओं में गिनी जाती है। इस दिन गंगा स्नान, दीपदान और दान का विशेष महत्व है। काशी में शाम को घाटों पर लाखों दीये जलाकर देव दीपावली मनाई जाती है, और सिख समाज इसी दिन गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व मनाता है।
क्यों मनाते हैं
कथा है कि भगवान शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर के तीन नगरों का एक ही बाण से नाश किया था, इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। देवताओं ने इस जीत की खुशी में दीप जलाए, उसी की याद में देव दीपावली मनाई जाती है। भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार को भी इसी तिथि से जोड़ा जाता है। इसी दिन कार्तिक मास के स्नान और भीष्म पंचक के व्रत पूरे होते हैं।
किस तिथि को
कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा। गंगा स्नान और दान उदया तिथि में होते हैं; देव दीपावली का दीपदान उस शाम को होता है जब प्रदोष काल में पूर्णिमा हो, इसलिए कभी-कभी देव दीपावली एक दिन पहले मनाई जाती है।
कैसे मनाते हैं
- भोर में गंगा या किसी पवित्र नदी, सरोवर में स्नान और सूर्य को अर्घ्य।
- शाम को नदी, तुलसी, मंदिर और घर के दरवाज़े पर दीपदान; आटे के दीये पत्तों पर रखकर जल में बहाना।
- सत्यनारायण कथा, विष्णु और शिव पूजा; अन्न, कंबल, दीप और गुड़ का दान।
स्नान और दीपदान के नियम कार्तिक मास के नियम में और काशी के उत्सव का पूरा विवरण कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली में पढ़ें।
क्षेत्रीय मेले
गढ़मुक्तेश्वर, बिठूर और सोरों में गंगा मेले लगते हैं, राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा जी के सरोवर पर स्नान के साथ पुष्कर मेला अपने चरम पर होता है, और बिहार में सोनपुर का हरिहर क्षेत्र मेला इसी स्नान से शुरू होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कार्तिक पूर्णिमा पर क्या करना चाहिए?
देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा को ही क्यों होती है?
इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?
क्या इसी दिन गुरु नानक जयंती होती है?
घर पर गंगा स्नान का फल कैसे लें?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
