2026

हनुमान जयंती 2026

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मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

हनुमान जयंती

उत्तर भारत में हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन माता अंजनी और केसरी के घर पवनपुत्र हनुमान का जन्म हुआ। इस दिन मंदिरों में सुंदरकांड, हनुमान चालीसा और भंडारे होते हैं।

क्या है और क्यों मनाते हैं

हनुमान जी को भगवान शिव का ग्यारहवाँ रुद्र अवतार और श्रीराम का सबसे बड़ा भक्त माना जाता है। मान्यता है कि वे चिरंजीवी हैं, यानी आज भी पृथ्वी पर हैं, इसलिए कई भक्त इस दिन को "जन्मोत्सव" कहना पसंद करते हैं। बल, बुद्धि और संकट से रक्षा के लिए उनकी पूजा की जाती है।

किस तिथि को

चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा, जिस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा हो। कुछ परंपराएँ, ख़ासकर अयोध्या में, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी) को भी हनुमान जयंती मनाती हैं। दक्षिण भारत में तारीख अलग होती है: आंध्र-तेलंगाना में वैशाख में और तमिलनाडु में मार्गशीर्ष अमावस्या को।

कैसे मनाते हैं

पूजा का क्रम हनुमान जी की पूजा विधि में दिया गया है। महिलाएँ हनुमान जी को स्पर्श किए बिना पूजा करती हैं, यह कई घरों की परंपरा है।

क्षेत्रीय परंपराएँ

अयोध्या के हनुमानगढ़ी, दिल्ली के कनॉट प्लेस वाले प्राचीन हनुमान मंदिर, राजस्थान के सालासर और मेहंदीपुर बालाजी में इस दिन बहुत भीड़ होती है। कई शहरों में शोभायात्राएँ निकलती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान जयंती कब होती है?
उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को। कुछ परंपराएँ कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को भी हनुमान जयंती मनाती हैं।
हनुमान जयंती को जन्मोत्सव क्यों कहते हैं?
क्योंकि हनुमान जी को चिरंजीवी माना जाता है, यानी वे आज भी जीवित हैं, इसलिए कई भक्त जयंती के बजाय जन्मोत्सव शब्द पसंद करते हैं।
हनुमान जी को क्या चढ़ाएं?
सिंदूर और चमेली का तेल, लाल फूल, जनेऊ, बूंदी या बेसन के लड्डू, गुड़-चना और पान का बीड़ा।
हनुमान जयंती पर कौन सा पाठ करें?
हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, बजरंग बाण या संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ किया जाता है।
दक्षिण भारत में हनुमान जयंती कब होती है?
आंध्र-तेलंगाना में वैशाख कृष्ण दशमी को और तमिलनाडु में मार्गशीर्ष अमावस्या को मनाई जाती है।

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