महानवमी
महानवमी शारदीय नवरात्रि का नौवाँ और अंतिम दिन है, जो आश्विन शुक्ल नवमी को पड़ता है। इस दिन माँ दुर्गा के नौवें रूप सिद्धिदात्री की पूजा, कन्या पूजन और हवन किया जाता है, और बहुत से परिवार इसी दिन नवरात्रि का व्रत खोलते हैं।
क्या है और क्यों मनाते हैं
देवी माहात्म्य की परंपरा में नवमी वह दिन है जब महिषासुर से देवी का युद्ध निर्णायक मोड़ पर था, और अगले दिन विजयादशमी पर विजय पूरी हुई। माँ सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान, चार भुजाओं वाली देवी हैं, जो भक्तों को सिद्धियाँ और सफलता देती हैं; मान्यता है कि शिव जी को अर्धनारीश्वर रूप इन्हीं की कृपा से मिला।
किस तिथि को
आश्विन शुक्ल नवमी। कई बार अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ जाती हैं या तिथि दो दिनों में बँट जाती है; ऐसे में पंचांग के अनुसार जिस दिन नवमी हो, उसी दिन नवमी पूजा होती है। दक्षिण भारत में इसी दिन आयुध पूजा होती है।
कैसे मनाते हैं
- सुबह माँ सिद्धिदात्री की पूजा, लाल चुनरी, फूल और हलवा-पूड़ी-चने का भोग।
- दो से दस वर्ष की नौ कन्याओं और एक बालक (लांगुर या भैरव) को बुलाकर पैर धोना, तिलक, भोजन और दक्षिणा; विधि कन्या पूजन विधि में देखें।
- नवरात्रि की पूर्णाहुति के लिए हवन; सामग्री हवन विधि और सामग्री में।
- जय अम्बे गौरी आरती के बाद व्रत का पारण।
क्षेत्रीय परंपराएँ
बंगाल और बिहार के पंडालों में महानवमी पर विशेष भोग और संध्या आरती होती है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब में कंजक पूजन इस दिन का सबसे बड़ा दृश्य है। अगले दिन विजयादशमी पर देवी विसर्जन होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महानवमी कब होती है?
महानवमी पर किस देवी की पूजा होती है?
कन्या पूजन में कितनी कन्याएँ बुलाएँ?
कन्या पूजन में क्या भोजन बनता है?
नवरात्रि का पारण कब करें?
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