हवन में पवित्र अग्नि जलाकर उसमें मंत्रों के साथ घी, जौ, तिल और हवन सामग्री की आहुति दी जाती है। घर पर छोटा हवन लगभग एक घंटे में हो जाता है: संकल्प, गणेश पूजन, अग्नि स्थापना, देवताओं के नाम से आहुतियाँ और फिर सूखे नारियल से पूर्णाहुति। नीचे पूरी सामग्री, क्रम से विधि और मुख्य मंत्र दिए गए हैं, ताकि पंडित जी न हों तब भी परिवार श्रद्धा से हवन कर सके।
हवन कब कराते हैं
- गृह प्रवेश पर, नए घर या दुकान में पहली बार। पूरी विधि गृह प्रवेश मुहूर्त और पूजा विधि में है।
- नवरात्रि की अष्टमी या नवमी पर, कन्या पूजन से पहले। देखें कन्या पूजन विधि।
- सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक या किसी अनुष्ठान के अंतिम चरण में
- मुंडन, नामकरण, जनेऊ, विवाह जैसे संस्कारों में
- जन्मदिन, विवाह की वर्षगाँठ या किसी मनोकामना के पूरे होने पर
- आर्य समाजी परिवारों में रोज़ या हर रविवार दैनिक यज्ञ के रूप में
हवन के लिए अलग मुहूर्त ज़रूरी नहीं, पर बड़े अवसर पर शुभ दिन देखना अच्छा है। भद्रा और राहुकाल टालें; दोनों आज के पंचांग में मिल जाएँगे।
हवन सामग्री लिस्ट
चार-पाँच लोगों के घरेलू हवन के लिए अंदाज़ से मात्रा दी गई है; ज़्यादा लोग हों या मंत्र-संख्या बड़ी हो तो बढ़ा लें।
| सामग्री | लगभग मात्रा | काम |
|---|---|---|
| हवन कुंड (ताँबे, लोहे या मिट्टी का) | एक | अग्नि के लिए |
| आम की सूखी लकड़ी (समिधा) | एक-दो किलो | अग्नि जलाए रखने के लिए |
| तैयार हवन सामग्री | आधा किलो | मुख्य आहुति |
| गाय का घी | 250-500 ग्राम | आहुति और अग्नि के लिए |
| काले तिल | 250 ग्राम | सामग्री में मिलाने के लिए |
| जौ | 125 ग्राम | सामग्री में मिलाने के लिए |
| चावल (अक्षत) | 100 ग्राम | सामग्री और पूजन के लिए |
| शक्कर, गुड़ या बूरा | थोड़ा | मीठी आहुति |
| सूखा नारियल (गोला) | एक | पूर्णाहुति |
| कपूर, माचिस | एक डिब्बी | अग्नि प्रज्वलन |
| लौंग, इलायची, पान, सुपारी | कुछ | पूजन और पूर्णाहुति |
| कलावा, लाल कपड़ा, रोली, फूल | थोड़ा | पूजन |
| स्रुवा (लकड़ी का चम्मच) या आम के पत्ते | एक | घी की आहुति |
| कलश, गंगाजल, आम के पत्ते | एक | कलश स्थापना |
| नवग्रह समिधा (आक, पलाश, खैर, अपामार्ग, पीपल, गूलर, शमी, दूब, कुशा) | ज़रूरत हो तो | ग्रह शांति हवन |
कई पंडित सामग्री मिलाने का यह घरेलू नियम बताते हैं: तिल सबसे अधिक, उससे कम जौ और उससे कम चावल, फिर इस मिश्रण में तैयार हवन सामग्री और थोड़ा घी-शक्कर मिलाकर हाथ से मसल लें, ताकि हर चुटकी में सब कुछ रहे।
कुछ न मिले तो: गाय का घी न हो तो कोई भी शुद्ध घी चलेगा। आम की लकड़ी न मिले तो पीपल, पलाश या कोई भी सूखी, बिना कीड़े वाली लकड़ी लें; बबूल और काँटेदार लकड़ी से बचें। स्रुवा न हो तो आम के पत्ते को मोड़कर घी डालें। तैयार सामग्री न मिले तो केवल तिल, जौ, चावल, घी और थोड़ा गुग्गुल-लोबान काफ़ी है।
हवन कुंड और समिधा
बाज़ार में ताँबे और लोहे के चौकोर हवन कुंड मिलते हैं, जो फ़्लैट में भी आराम से चल जाते हैं। मिट्टी या ईंटों से बनी वेदी पारंपरिक है। कुंड के नीचे मोटी ईंट, बालू की परत या लोहे का स्टैंड रखें, ताकि फ़र्श या टाइल गरम होकर न चटके। कुंड में नीचे थोड़ी बालू डालें।
समिधा अंगूठे जितनी मोटी और लगभग एक बित्ते लंबी हो, पूरी सूखी हो। गीली लकड़ी धुआँ देती है और अग्नि बार-बार बुझती है। लकड़ियाँ खड़ी करके हल्का शंकु बनाएँ, बीच में कपूर रखें, तो अग्नि आसानी से पकड़ती है।
घर पर हवन की विधि
- पूजा की जगह साफ़ करें। हवन कुंड को पूर्व दिशा की ओर रखें और यजमान पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके आसन पर बैठें। पत्नी यजमान के दाहिनी ओर बैठती हैं।
- आचमन और पवित्रीकरण: तीन बार जल पीकर हाथ धोएँ और अपने ऊपर व सामग्री पर गंगाजल छिड़कें।
- संकल्प: हाथ में जल, अक्षत, फूल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान, तिथि और हवन का उद्देश्य बोलें।
- गणेश पूजन और कलश पूजन: रोली, अक्षत, फूल चढ़ाकर गणेश जी का स्मरण करें। कलश की स्थापना की विधि कलश स्थापना लेख में देखें।
- कुंड पूजन: हवन कुंड पर रोली से स्वस्तिक बनाकर कलावा बाँधें और अक्षत-फूल चढ़ाएँ।
- अग्नि स्थापना: कपूर जलाकर समिधा के बीच रखें और ‘ॐ भूर्भुवः स्वः’ बोलते हुए अग्नि प्रज्वलित करें। अग्नि को कभी फूँक मारकर न जलाएँ; पंखे या हाथ से हवा दें।
- घी की आहुतियाँ: पहले स्रुवा से केवल घी की आहुतियाँ प्रजापति, इंद्र, अग्नि और सोम के नाम से दें।
- मुख्य आहुतियाँ: सामग्री की चुटकी लेकर, दाहिने हाथ की मध्यमा, अनामिका और अंगूठे से, हर मंत्र के ‘स्वाहा’ पर अग्नि में डालें। हथेली उलटी न करें और सामग्री अग्नि के बीच में डालें।
- पूर्णाहुति: नीचे दी गई विधि से।
- आरती और भस्म: हवन के बाद आरती करें, क्षमा प्रार्थना करें और ठंडी होने पर थोड़ी भस्म का तिलक लगाएँ।
आहुति के मंत्र
हर आहुति के बाद ‘इदं न मम’ (यह मेरा नहीं) कहने का चलन है, जो त्याग का भाव है। घर के हवन में ये मंत्र आमतौर पर बोले जाते हैं:
- ॐ प्रजापतये स्वाहा। इदं प्रजापतये इदं न मम॥
- ॐ इन्द्राय स्वाहा। इदं इन्द्राय इदं न मम॥
- ॐ अग्नये स्वाहा। इदं अग्नये इदं न मम॥
- ॐ सोमाय स्वाहा। इदं सोमाय इदं न मम॥
- ॐ भूः स्वाहा। ॐ भुवः स्वाहा। ॐ स्वः स्वाहा॥
- ॐ गं गणपतये नमः स्वाहा॥
- नवग्रह: ॐ सूर्याय नमः स्वाहा, ॐ चन्द्रमसे नमः स्वाहा, ॐ भौमाय नमः स्वाहा, ॐ बुधाय नमः स्वाहा, ॐ बृहस्पतये नमः स्वाहा, ॐ शुक्राय नमः स्वाहा, ॐ शनैश्चराय नमः स्वाहा, ॐ राहवे नमः स्वाहा, ॐ केतवे नमः स्वाहा
- गायत्री मंत्र के बाद स्वाहा जोड़कर 11, 21 या 108 आहुतियाँ
गायत्री मंत्र का सही उच्चारण और अर्थ गायत्री मंत्र लेख में है। नवरात्रि के हवन में दुर्गा सप्तशती के मंत्र या ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा’ से आहुति देते हैं, और शिव से जुड़े अनुष्ठान में ‘ॐ नमः शिवाय स्वाहा’ से। मंत्र न आते हों तो केवल भगवान का नाम लेकर ‘स्वाहा’ कहकर आहुति दें; भाव सच्चा हो तो हवन अधूरा नहीं होता।
पूर्णाहुति
- सूखे नारियल (गोले) के ऊपर का हिस्सा थोड़ा काटकर उसमें घी, थोड़ी सामग्री, लौंग, इलायची, सुपारी भरें।
- नारियल पर लाल कपड़ा या कलावा लपेटें और रोली लगाएँ।
- परिवार के सभी लोग खड़े होकर नारियल को छूते हैं। मंत्र बोला जाता है: ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ ॐ सर्वं वै पूर्णं स्वाहा॥
- नारियल को धीरे से अग्नि के बीच रखें।
- बचे हुए घी की पतली धार स्रुवा से अग्नि में गिराएँ; इसे वसोर्धारा कहते हैं।
- सब मिलकर हवन कुंड की तीन परिक्रमा करें या बैठे-बैठे प्रणाम करें।
सावधानियाँ
- खिड़कियाँ खुली रखें, धुएँ का अलार्म हो तो पहले ध्यान दें।
- पास में पानी की बाल्टी रखें, और बच्चों व पालतू जानवरों को कुंड से दूर रखें।
- मिट्टी के तेल या पेट्रोल से कभी आग न जलाएँ।
- अग्नि को अपने आप शांत होने दें। ठंडी भस्म अगले दिन पेड़ की जड़ में या बहते पानी में डाल दें।

