गृह प्रवेश मुहूर्त और पूजा विधि

गृह प्रवेश माघ, फाल्गुन, वैशाख या ज्येष्ठ में स्थिर या कोमल नक्षत्र देखकर किया जाता है; चातुर्मास, खरमास और अधिक मास में नहीं। विधि में द्वार पूजन, कलश के साथ दाहिना पैर पहले रखकर प्रवेश, गणेश-वास्तु पूजा, दूध उबालना और हवन होता है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 6 मिनट का पाठ
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गृह प्रवेश के लिए माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ सबसे अच्छे महीने माने जाते हैं, और रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, चित्रा, अनुराधा व रेवती जैसे स्थिर या कोमल नक्षत्रों में मुहूर्त निकाला जाता है। पूजा का मूल क्रम है: द्वार पूजन, कलश लेकर दाहिना पैर पहले रखते हुए प्रवेश, गणेश और वास्तु पूजा, हवन, और रसोई में दूध उबालना। नीचे पूरी सामग्री और विधि क्रम से दी गई है।

गृह प्रवेश के तीन प्रकार

वास्तु और मुहूर्त ग्रंथ गृह प्रवेश को तीन तरह का बताते हैं, और हर एक में पूजा का विस्तार थोड़ा अलग होता है:

  • अपूर्व गृह प्रवेश: नया बना या नया खरीदा घर, जिसमें आप पहली बार रहने जा रहे हैं। इसमें पूरी विधि, वास्तु शांति और हवन होता है, और मुहूर्त सबसे सख्ती से देखा जाता है।
  • सपूर्व गृह प्रवेश: अपने ही घर में लंबे समय बाद लौटना, जैसे विदेश या दूसरे शहर में कुछ साल रहने के बाद। इसमें सादी पूजा पर्याप्त है।
  • द्वंद्व गृह प्रवेश: बड़ी मरम्मत, दोबारा निर्माण, या आग-बाढ़ जैसी किसी आपदा के बाद घर में फिर से रहना। इसमें वास्तु शांति करवाने की सलाह दी जाती है।

किराए के घर में शिफ्ट होते समय ज़्यादातर परिवार पूरा गृह प्रवेश नहीं करते; बस कलश, गणेश पूजा और दूध उबालने की रस्म कर लेते हैं। यह भी पूरी तरह ठीक है।

शुभ महीने और मुहूर्त

महीने

माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ गृह प्रवेश के लिए उत्तम हैं। कार्तिक और मार्गशीर्ष को मध्यम माना जाता है। आषाढ़ से कार्तिक की देवउठनी एकादशी तक चातुर्मास में, खरमास में और अधिक मास में गृह प्रवेश नहीं किया जाता। पितृ पक्ष और होलाष्टक भी टाले जाते हैं।

तिथि, वार, नक्षत्र

  • तिथि: शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी अच्छी हैं। चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी (रिक्ता) और अमावस्या छोड़ी जाती हैं।
  • वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार उत्तम; मंगलवार को ज़्यादातर लोग टालते हैं। रविवार और शनिवार पर अलग-अलग परंपराओं में अलग राय है।
  • नक्षत्र: ध्रुव नक्षत्र (रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद) और मृदु नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती) सबसे अच्छे माने जाते हैं।
  • लग्न: स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि घर में स्थिरता रहे।

रोज़ की तिथि और नक्षत्र आप आज के पंचांग में देख सकते हैं, पर अंतिम मुहूर्त गृहस्वामी की कुंडली के साथ पुरोहित से ही निकलवाएँ।

गृह प्रवेश सामग्री लिस्ट

  • कलश (ताँबे या मिट्टी का), आम के पत्ते, नारियल, लाल कपड़ा, मौली
  • गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति या तस्वीर, चौकी
  • रोली, हल्दी, अक्षत, सिंदूर, कपूर, धूप, घी का दीपक
  • फूल, फूलमाला, आम के पत्तों का तोरण (बंदनवार)
  • पंचामृत: दूध, दही, घी, शहद, शक्कर; गंगाजल
  • पान, सुपारी, लौंग, इलायची, जनेऊ, सिक्के
  • हवन कुंड, आम की लकड़ी, हवन सामग्री, घी, नवग्रह समिधा (अगर पुरोहित कहें)
  • नया बर्तन (पतीला) और दूध उबालने के लिए गाय का दूध, चावल, चीनी — खीर के लिए
  • मिठाई, फल, भोग के लिए प्रसाद
  • रंगोली के रंग या आटा-हल्दी, स्वस्तिक बनाने के लिए
  • सत्यनारायण कथा करनी हो तो उसकी अलग सामग्री

हवन सामग्री की पूरी सूची घर पर हवन कैसे करें में दी गई है। अगर कोई चीज़ न मिले तो घबराएँ नहीं: आम के पत्ते न हों तो अशोक के पत्ते, पंचामृत न बने तो गंगाजल मिला दूध, और हवन कुंड न हो तो ईंटों से छोटी वेदी बना सकते हैं।

गृह प्रवेश पूजा विधि

  1. एक दिन पहले: घर की पूरी सफाई करें, गंगाजल छिड़कें। मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण बाँधें और दोनों ओर रोली-हल्दी से स्वस्तिक बनाएँ।
  2. द्वार पूजन: मुहूर्त के समय परिवार द्वार के बाहर इकट्ठा हो। चौखट (देहरी) पर रोली, अक्षत और फूल चढ़ाएँ, दीपक दिखाएँ। कई घरों में देहरी पर चावल से भरा कलश रखकर गृहलक्ष्मी उसे पैर से अंदर की ओर गिराती है।
  3. कलश के साथ प्रवेश: गृहस्वामी या गृहस्वामिनी सिर पर या हाथ में जल भरा कलश लेकर, शंख या घंटी की आवाज़ के बीच, दाहिना पैर पहले रखकर घर में प्रवेश करें। उनके पीछे बाकी परिवार गणेश जी की मूर्ति, पूजा की थाली और अनाज लेकर आए।
  4. कलश स्थापना: पूजा स्थान पर, जो हो सके तो ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में, चौकी पर कलश स्थापित करें। विधि कलश स्थापना वाली ही है: कलश में जल, सिक्का, सुपारी, अक्षत, आम के पत्ते और ऊपर नारियल।
  5. गणेश पूजन और संकल्प: सबसे पहले गणेश जी की पूजा, फिर हाथ में जल लेकर संकल्प कि "इस घर में सुख-शांति और समृद्धि के लिए गृह प्रवेश पूजा कर रहे हैं"।
  6. वास्तु पूजा: वास्तु पुरुष, नवग्रह और कुल देवता की पूजा पुरोहित करवाते हैं।
  7. दूध उबालना: रसोई में नए चूल्हे या गैस पर पहली बार नए पतीले में दूध उबालें, और उसे थोड़ा उफनने दें। उफनता दूध घर में भरपूर अन्न-धन का प्रतीक माना जाता है। उसी दूध से खीर बनाकर पहला भोग भगवान को लगाएँ।
  8. हवन: गणेश, नवग्रह और वास्तु के मंत्रों से आहुति। पूर्णाहुति में नारियल चढ़ता है।
  9. कथा और आरती: बहुत से परिवार उसी दिन सत्यनारायण व्रत कथा करवाते हैं। फिर आरती, प्रसाद और ब्राह्मण-भोजन या पड़ोसियों को भोजन।

वास्तु शांति और हवन

नया घर बनाते समय ज़मीन खोदी जाती है, पेड़ कटते हैं, और कई तरह की तोड़-फोड़ होती है। परंपरा में वास्तु शांति इसी के लिए क्षमा-प्रार्थना और घर के देवता वास्तु पुरुष को प्रसन्न करने का कर्म है। अपूर्व और द्वंद्व गृह प्रवेश में यह ज़रूर करवाई जाती है। छोटे फ्लैट में कई परिवार सिर्फ गणेश-नवग्रह हवन करवा लेते हैं, जो पर्याप्त माना जाता है।

बंद फ्लैट में हवन का धुआँ जल्दी भर जाता है, इसलिए हवन के समय खिड़कियाँ खुली रखें और सोसाइटी में धुआँ अलार्म लगा हो तो पहले से ध्यान रखें।

नए घर में पहले दिन के नियम

  • गृह प्रवेश के दिन घर खाली न छोड़ें; उस रात परिवार का कोई सदस्य वहीं सोए।
  • पहला भोजन घर की रसोई में बनी खीर या मीठे से शुरू करें।
  • पूजा स्थान में दीपक पहली रात जलता रहे, जहाँ सुरक्षित हो।
  • पहले दिन घर से उधार या कोई सामान बाहर न दें, ऐसी लोक-मान्यता है।
  • पड़ोसियों को प्रसाद ज़रूर दें; नए घर की असली शुरुआत अच्छे संबंधों से होती है।
  • कलश का जल अगले दिन तुलसी या पौधों में डाल दें और नारियल प्रसाद के रूप में बाँट दें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गृह प्रवेश के लिए सबसे शुभ महीना कौन-सा है?

माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ गृह प्रवेश के लिए सबसे उत्तम माने जाते हैं। चातुर्मास, खरमास और अधिक मास में गृह प्रवेश नहीं किया जाता।

गृह प्रवेश में दूध क्यों उबालते हैं?

नई रसोई में पहली बार दूध उबालकर उफनने देना घर में अन्न और समृद्धि भरपूर रहने का प्रतीक माना जाता है। उसी दूध की खीर से पहला भोग लगाया जाता है।

गृह प्रवेश में पहले कौन-सा पैर रखें?

परंपरा के अनुसार गृहस्वामी या गृहस्वामिनी कलश लेकर दाहिना पैर पहले रखकर घर में प्रवेश करते हैं।

किराए के घर में गृह प्रवेश ज़रूरी है?

पूरी विधि ज़रूरी नहीं है। ज़्यादातर परिवार कलश स्थापना, गणेश पूजा और दूध उबालने की रस्म करके किराए के घर में रहना शुरू करते हैं।

गृह प्रवेश के दिन घर खाली छोड़ सकते हैं?

परंपरा में गृह प्रवेश की रात घर खाली नहीं छोड़ा जाता; परिवार का कोई सदस्य वहीं सोता है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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