राम नवमी
राम नवमी भगवान श्रीराम के जन्म का उत्सव है, जो चैत्र शुक्ल नवमी को मनाया जाता है। राम जी का जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा मध्याह्न में होती है। यही दिन चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन भी है।
क्या है और क्यों मनाते हैं
वाल्मीकि रामायण के अनुसार अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के यहाँ चैत्र शुक्ल नवमी को, पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में, ठीक दोपहर के समय श्रीराम का जन्म हुआ। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में इसी क्षण को "भए प्रगट कृपाला दीनदयाला" से गाया है। राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है, और उत्तर भारत के घर-घर में यह दिन बेटे के जन्म जैसी खुशी से मनाया जाता है।
किस तिथि को
चैत्र शुक्ल नवमी। जिस दिन मध्याह्न (दिन का बीच का भाग) में नवमी हो, वही दिन राम नवमी माना जाता है। अगर दोनों दिन या किसी भी दिन मध्याह्न में नवमी न मिले, तो पंचांग के नियम से निर्णय होता है, इसलिए तिथि की पुष्टि पंचांग से कर लें।
कैसे मनाते हैं
- सुबह से व्रत; कई लोग नवरात्रि के नौ दिन रामचरितमानस का नवाह्न पाठ करते हैं जो आज पूरा होता है।
- दोपहर में राम लला को पालने में झुलाकर जन्मोत्सव, पंचामृत स्नान, पीले वस्त्र, तुलसी और धनिये की पंजीरी का भोग।
- श्री रामचंद्र जी की आरती और श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन का गायन।
- कन्या पूजन, और कई शहरों में रामजी की शोभा यात्रा।
अयोध्या में सरयू स्नान और राम जन्मभूमि दर्शन के लिए भारी भीड़ रहती है। घर पर पूरी पूजा कैसे करें, यह राम नवमी पूजा विधि में बताया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राम नवमी किस तिथि को होती है?
राम जी के जन्म का समय क्या माना जाता है?
राम नवमी पर क्या भोग लगाते हैं?
क्या राम नवमी पर कन्या पूजन होता है?
राम नवमी का व्रत कब खोलें?
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