- ॐ श्री चामुंडायै नमः
- ॐ महामायायै नमः
- ॐ श्री मत्सिंहासनेश्वर्यै नमः
- ॐ श्री विद्यावेद्य महिमायै नमः
- ॐ श्री चक्रपुरवासिन्यै नमः
- ॐ श्रीकंठ दयितायै नमः
- ॐ गौर्यै नमः
- ॐ गिरिजायै नमः
- ॐ भुवनेश्वर्यै नमः
- ॐ महाकाळ्यै नमः
- ॐ महालक्ष्म्यै नमः
- ॐ माहावाण्यै नमः
- ॐ मनोन्मन्यै नमः
- ॐ सहस्रशीर्षसंयुक्तायै नमः
- ॐ सहस्रकरमंडितायै नमः
- ॐ कौस्तुभवसनोपेतायै नमः
- ॐ रत्नकंचुकधारिण्यै नमः
- ॐ गणेशस्कंध जनन्यै नमः
- ॐ जपाकुसुमभासुरायै नमः
- ॐ उमायै नमः
- ॐ कात्यायन्यै नमः
- ॐ दुर्गायैनमः
- ॐ मंत्रिण्यै नमः
- ॐ दंडिन्यै नमः
- ॐ जयायै नमः
- ॐ करांगुळिनखोत्पन्न नारायण दळाकृत्यै नमः
- ॐ वररमावाणीसव्य दक्षिण सेवितायै नमः
- ॐ इंद्राक्ष्यै नमः
- ॐ बगळायै नमः
- ॐ बालायै नमः
- ॐ चक्रेश्यै नमः
- ॐ विजयांबिकायै नमः
- ॐ पंचप्रेतासनारूढायै नमः
- ॐ हरिद्राकुंकुमप्रियायै नमः
- ॐ महाबलाद्रि निलयायै नमः
- ॐ महिषासुर मर्धिन्यै नमः
- ॐ मधुकैटभ संहर्त्र्यै नमः
- ॐ मधुरापुरनायकायै नमः
- ॐ कामेश्वर्यै नमः
- ॐ योगनिद्रायै नमः
- ॐ भवान्यै नमः
- ॐ चंडिकायैनमः
- ॐ सत्यै नमः
- ॐ कराजरथारूढायै नमः
- ॐ सृष्टिस्थित्यंतकारिण्यैनमः
- ॐ अन्नपूर्णायै नमः
- ॐ ज्वलि जिह्वायै नमः
- ॐ काळरात्रि स्वरूपिण्यै नमः
- ॐ निशुंभ शुंभमदन्यै नमः
- ॐ रक्तबीज विषूदिन्यै नमः
- ॐ ब्रह्मादि मातृकारूपायै नमः
- ॐ शुभायै नमः
- ॐ षट्चक्रदेवतायै नमः
- ॐ मूलप्रकृतिरूपायै नमः
- ॐ पार्वत्यै नमः
- ओंपरमेश्वर्यै नमः
- ॐ इंदुपीठ कृतावासायै नमः
- ॐ चंद्रमंडल मध्यगायै नमः
- ॐ चिदग्निकुंड संभूतायै नमः
- ॐ विंध्याचल निवासिन्यै नमः
- ॐ हयग्रीवास्त पूज्यायै नमः
- ॐ सूर्यचंद्राग्निलोचनायै नमः
- ॐ जलांधरायै नमः
- ॐ सुपीठस्थायै नमः
- ॐ शिवायै नमः
- ॐ दाक्षायण्यै नमः
- ॐ ईश्वर्यै नमः
- ॐ नवावरण संपूज्यायै नमः
- ॐ नवाक्षर मनुस्तुतायै नमः
- ॐ नवलावण्य रूपाध्यायै नमः
- ॐ द्वात्रिंशज्ञलदायुधायै नमः
- ॐ कामेशबद्ध मांगल्यायै नमः
- ॐ चंद्ररेखा विभूषितायै नमः
- ॐ चराचर जगद्रूपायै नमः
- ॐ नित्यक्लिन्नायै नमः
- ॐ पराजितायै नमः
- ॐ ओड्याणपीठ निलयायै नमः
- ॐ ललितायै नमः
- ॐ विष्णुसोदर्यै नमः
- ॐ दंष्ट्रकराळ वदनायै नमः
- ॐ वज्रेश्यै नमः
- ॐ वह्निवाहिन्यै नमः
- ॐ सर्वमंगळ रूपाड्यायै नमः
- ॐ सच्चिदानंद विग्रहायै नमः
- ॐ अष्टादश सुपीरस्थायै नमः
- ॐ भेरुंडायै नमः
- ॐ भैरव्यै नमः
- ॐ परायै नमः
- ॐ रुंडमाल लस्कंठायै नमः
- ॐ चंडासुर विमर्दिन्यै नमः
- ॐ पुंड्रेक्षुकांड कोदंडायै नमः
- ॐ पुष्पबाण लसत्करायै नमः
- ॐ शिवदूत्यै नमः
- ॐ वेदमात्रे नमः
- ॐ शांकर्यै नमः
- ॐ सिंहवाहिन्यै नमः
- ॐ चतुष्टपु पचाराध्यायै नमः
- ॐ योगिनीगण सेवितायै नमः
- ॐ वनदुर्गायै नमः
- ॐ भद्रकाळ्यै नमः
- ॐ कदंबवनितायै नमः
- ॐ चंडमुंड शिरश्चेत्यै नमः
- ॐ महाराज्यै नमः
- ॐ सुधानामायै नमः
- ॐ श्री चक्रवरताटंकायै नमः
- ॐ श्रीशैल भ्रमरांबिकायै नमः
- ॐ श्री राजराजवरदायै नमः
- ॐ श्री मत्रिपुर सुंदर्यै नमः
|| इति श्री चामुंडेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री चामुंडेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावलिः आदिशक्ति मां चामुंडेश्वरी के 108 पवित्र नामों का एक शक्तिशाली स्तोत्र है। यह नामावलि देवी के विभिन्न गुणों, शक्तियों, रूपों और उनकी महिमा का गुणगान करती है। भक्तगण पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ इन नामों का जप करके मां की कृपा प्राप्त करते हैं। यह अष्टोत्तर देवी के दिव्य स्वरूप को गहराई से समझने और उनके साथ एक आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
"ॐ श्री चामुंडायै नमः" के मूल मंत्र से शुरू होकर, यह नामावलि देवी को "महामाया," "श्रीमत्सिंहासनेश्वरी" (सिंहासन की अधिष्ठात्री देवी), "श्री विद्यावेद्य महिमा" (श्री विद्या द्वारा ज्ञात महिमा वाली), "श्री चक्रपुरवासिनी" (श्री चक्र में निवास करने वाली) के रूप में प्रतिष्ठित करती है। वह भगवान शिव की प्रियतमा के रूप में "श्रीकंठ दयिता," "गौरी," "गिरिजा" और ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री के रूप में "भुवनेश्वरी" के रूप में स्तुति की जाती हैं। ये नाम दर्शाते हैं कि देवी ही सृष्टि, स्थिति और संहार की मूल शक्ति हैं।
देवी अपने विभिन्न स्वरूपों में "महाकाली," "महालक्ष्मी," और "महावाणी" (सरस्वती) के रूप में प्रकट होती हैं, जो उनकी त्रिशक्ति स्वरूप को दर्शाता है। "मनोन्मनी" नाम उनके मन पर नियंत्रण और दिव्य ज्ञान को इंगित करता है। "सहस्र शीर्ष संयुक्ता" और "सहस्र कर मंडिता" नाम उनकी सर्वव्यापकता और असीमित शक्ति को दर्शाते हैं, जो ब्रह्मांड में उनकी उपस्थिति का प्रतीक है। "कौस्तुभ वसनोपेता" और "रत्न कंचुक धारिणी" नाम देवी के दिव्य सौंदर्य और शाही वैभव का वर्णन करते हैं।
यह नामावलि देवी को "गणेश स्कंध जननी" (गणेश और कार्तिकेय की माता) के रूप में चित्रित करती है, जो उनके मातृत्व को उजागर करता है। "जपाकुसुम भासुरा" नाम उनकी दीप्ति और सुंदरता की तुलना करता है। "उमा," "कात्यायनी," "दुर्गा," "मंत्रिणी," "दण्डिनी," "जया" जैसे नाम उनके विभिन्न स्वरूपों और कार्यों को दर्शाते हैं। "करांगुलि नखोत्पन्न नारायण दलाकृत्यै" नाम उनकी उंगलियों के नाखूनों से नारायण जैसी शक्तियों को उत्पन्न करने की क्षमता को दर्शाता है, जो उनकी अद्वितीय शक्ति का प्रतीक है। "वर रमावाणी सव्य दक्षिण सेवितायै" नाम बताता है कि लक्ष्मी और सरस्वती देवी की बाईं और दाईं ओर सेवा करती हैं, जो देवी के सर्वोच्च स्थान को पुष्ट करता है।
लाभ (Benefits):
- आध्यात्मिक सुरक्षा: इस नामावलि का निरंतर पाठ भक्तों को शत्रुओं, नकारात्मक ऊर्जाओं और सभी प्रकार के शारीरिक तथा मानसिक खतरों से रक्षा प्रदान करता है।
- इच्छापूर्ति: शुद्ध मन और भक्ति के साथ इसका पाठ करने से भक्तों की सद्भावनापूर्ण इच्छाएं और प्रार्थनाएं पूर्ण होती हैं।
- स्वास्थ्य और समृद्धि: देवी के आशीर्वाद से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। घर में समृद्धि, धन लाभ और ऐश्वर्य का वास होता है।
- ज्ञान और विवेक: यह अज्ञानता को दूर करती है और आत्मज्ञान, विवेक तथा आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ाती है। सही निर्णय लेने में सहायता करती है।
- मानसिक शांति: मन को शांति, साहस और स्थिरता प्रदान करती है। तनाव, चिंता और भय को कम करके आंतरिक शांति प्रदान करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री चामुंडेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावलिः क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री चामुंडेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावलिः के प्रमुख लाभ क्या हैं?
इस नामावलि का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री चामुंडेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावलिः का उद्गम क्या है?
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