वा

श्री वाराहि देवि स्तुति

संपादन: अद्यतन
स्तोत्र
0 व्यूज़

ध्यानं:
कृष्ण वर्णां तु वाराहीं महिषस्तां महोदरीम्
वरदां दंडिनीं खड्गं बिभ्रतीम् दक्षिणे करे
खेट पात्रा2भयान वामे सूकरास्यां भजाम्यहं

स्तुति:

नमोस्तु देवि वाराहि जयैकार स्वरूपिणि
जपित्वा भूमिरूपेण नमो भगवतः प्रिये || 1 ||

जयक्रोडास्तु वाराहि देवित्वांच नामाम्यहं
जयवाराहि विश्वेशि मुख्य वाराहिते नमः || 2 ||

मुख्य वाराहि वंदेत्वां अंधे अंधिनिते नमः
सर्व दुष्ट प्रदुष्टानं वाक् स्थंबनकरी नमः || 3 ||

नमस्तंभिनि स्तंभेत्वां जृंभे जृंभिणिते नमः
रंधेरंधिनि वंदेत्वां नमो देवीतु मोहिनी || 4 ||

स्वभक्तानांहि सर्वेषां सर्व काम प्रदे नमः
बाह्वा स्तंभकरी वंदे चित्त स्तंभिनिते नमः || 5 ||

चक्षु स्तंभिनि त्वां मुख्य स्तंभिनीते नमो नमः
जगत् स्तंभिनि वंदेत्ववं जिह्वव स्तंभन कारिणि || 6 ||

स्तंभनं कुरु शत्रूणां कुरमे शत्रु नाशनं
शीघ्रं वश्यंच कुरते योग्ने वाचात्मके नमः || 7 ||

ट चतुष्टय रूपेत्वां शरणं सर्वदाभजे
होमात्मके फट् रूपेण जयाद्यान केशिवे || 8 ||

देहिमे सकलान् कामान् वाराहि जगदीश्वरी
नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमस्तुभ्यं नमोनमः || 9 ||

अनुग्रह स्तुति:

किं दुष्करं त्वयि मनो विष्यं गतायां
किं दुर्लभं त्वयि विधानव दार्चितायां
किं दुष्करं त्वयि पकृतसृति मागतायां
किं दुर्जयं त्वयि  कृतस्तुति वादपुंसां

अर्थ

श्री वाराही देवी स्तुति देवी शक्ति के उग्र रूप श्री वाराही देवी को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र स्तोत्र है। वाराही देवी सप्त मातृकाओं में से एक हैं और भगवान विष्णु के वराह अवतार की शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह स्तोत्र भक्तों के लिए आंतरिक और बाहरी शत्रुओं से सुरक्षा, बाधाओं को दूर करने और सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए उनकी प्रार्थना करने का एक शक्तिशाली साधन है। इस स्तुति के निरंतर पाठ से भक्त देवी की कृपा प्राप्त करते हैं और जीवन में स्थिरता, साहस और विजय प्राप्त करते हैं।

स्तोत्र के आरंभ में आने वाला ध्यान श्लोक देवी के मनोहर और शक्तिशाली रूप का वर्णन करता है। वह कृष्ण वर्ण वाली (काले रंग की) हैं, महिष (भैंस) पर विराजमान हैं, और बड़े उदर वाली (महोदरी) हैं। उनके दाहिने हाथ में वरद मुद्रा, दंड (छड़ी) और खड्ग (तलवार) हैं, जबकि बाएं हाथ में खेट (ढाल), पात्र (बर्तन) और अभय मुद्रा है। उनका मुख वराह (सूअर) के समान है (सूकरास्याम्)। यह रूप पृथ्वी की रक्षा करने और दुष्ट शक्तियों का नाश करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है। वराह मुख ज्ञान, शक्ति और पृथ्वी से उनके संबंध का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि महिष अहंकार और अज्ञान पर उनकी विजय का प्रतीक है।

यह स्तुति मुख्य रूप से वाराही देवी की 'स्तंभिनी' शक्ति की स्तुति करती है। स्तंभिनी का अर्थ है बाधाओं को रोकने वाली या निष्क्रिय करने वाली। भक्त अपने शत्रुओं की वाक् शक्ति, मन, आँखें और गतिविधियों को स्तंभित करने की प्रार्थना करते हैं, ताकि वे कोई हानि न पहुँचा सकें। यह केवल बाहरी शत्रुओं के बारे में नहीं है, बल्कि हमारे भीतर के नकारात्मक विचारों, भयों और दुर्गुणों को भी नियंत्रित करने की शक्ति को इंगित करता है। स्तोत्र यह स्पष्ट करता है कि देवी भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरा करने वाली एक दयालु माँ हैं।

प्रत्येक पद में, देवी को जयैकारा स्वरूपिणी (विजय का स्वरूप), भूमि रूप (पृथ्वी का रूप), विश्वेशी (विश्व की अधिपति), अंधि और अंधिनी (अज्ञान को अंधा करने वाली), मोहिनी (मोहित करने वाली) के रूप में संबोधित किया जाता है। वह दुष्टों के वाक् स्तंभन, मन स्तंभन, चक्षु स्तंभन और जिह्वा स्तंभन करने वाली हैं। अंत में, भक्त अपने शत्रुओं को नष्ट करने, उन्हें वश में करने और अपनी वाणी की शक्ति बढ़ाने के लिए देवी से प्रार्थना करते हैं। इस स्तोत्र का पाठ भक्तों को दिव्य सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करता है, और सभी कठिनाइयों से मुक्ति दिलाता है।

लाभ (Benefits):

  • शत्रुनाश और सुरक्षा: इस स्तोत्र के नियमित पाठ से वाराही देवी भक्तों को आंतरिक और बाहरी शत्रुओं से बचाती हैं। यह शत्रुओं के बुरे विचारों और कार्यों को निष्क्रिय करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • बाधाओं का निवारण: जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आने वाली बाधाओं को दूर करने और सफलता प्राप्त करने के लिए देवी की कृपा प्राप्त होती है। देवी अपनी 'स्तंभिनी' शक्ति से सभी विघ्नों को रोकती हैं।
  • सभी मनोकामनाओं की पूर्ति: भक्तों की सद्भावना से भरी सभी इच्छाओं को वाराही देवी पूरा करती हैं। धर्मसम्मत इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में समृद्धि प्राप्त होती है।
  • वाणी की शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि: यह स्तोत्र भक्तों की वाणी की शक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाता है, जिससे वे निर्भीक होकर अपने विचारों को व्यक्त करने और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होते हैं।
  • भूमि संबंधी समस्याओं का समाधान: चूंकि वाराही देवी पृथ्वी से संबंधित हैं, इसलिए भूमि, संपत्ति या कृषि संबंधी समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए यह स्तोत्र समाधान प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री वाराही देवी स्तुति क्या है?
श्री वाराही देवी स्तुति देवी शक्ति के उग्र रूप वाराही देवी को समर्पित एक शक्तिशाली प्रार्थना स्तोत्र है। यह भक्तों को सुरक्षा, विजय और इच्छाओं की पूर्ति के लिए देवी की स्तुति करता है।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह या शाम को स्नान करने के बाद शुद्ध मन से किया जा सकता है। देवी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर भक्तिपूर्वक पाठ करना उत्तम माना जाता है।
श्री वाराही देवी स्तुति के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस स्तोत्र का पाठ करने से शत्रुओं से सुरक्षा, बाधाओं का निवारण, सभी मनोकामनाओं की पूर्ति, वाणी की शक्ति में वृद्धि और आत्मविश्वास बढ़ता है। भूमि संबंधी समस्याओं का भी समाधान मिलता है।
श्री वाराही देवी स्तुति का पाठ कौन कर सकता है?
कोई भी भक्त, विशेष रूप से जो शत्रुओं से परेशान हैं, बाधाओं का सामना कर रहे हैं, या अपनी इच्छाओं को पूरा करना चाहते हैं, इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः, एक दिन में 11, 21, 51 या 108 बार पाठ करना शुभ माना जाता है। आप अपनी सुविधा और दृढ़ संकल्प के अनुसार पाठ कर सकते हैं।
श्री वाराही देवी स्तुति का मूल क्या है?
श्री वाराही देवी स्तुति प्राचीन शक्ति आगम ग्रंथों और तंत्र शास्त्र से ली गई है। वाराही देवी सप्त मातृकाओं में से एक हैं, और उनकी महिमा का उल्लेख कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...