घटस्थापना
घटस्थापना क्या है
घटस्थापना शारदीय नवरात्रि का पहला काम है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा की सुबह घर के पूजा-स्थान में जल से भरा कलश रखकर माँ दुर्गा का नौ दिनों के लिए आवाहन किया जाता है। नौ दिन की पूजा, पाठ और अखंड ज्योति इसी कलश के सामने चलती है, और दशमी को इसका विसर्जन होता है।
शास्त्रों में कलश को पूरे ब्रह्मांड का रूप कहा गया है — उसके मुख में विष्णु, कंठ में रुद्र और मूल में ब्रह्मा का वास माना जाता है। इसलिए घट रखना सिर्फ़ एक रस्म नहीं, देवी को घर बुलाने का संकल्प है।
किस तिथि और समय पर
नियम है आश्विन शुक्ल प्रतिपदा। शुक्ल पक्ष होने से पूर्णिमांत और अमांत दोनों पंचांगों में महीने का नाम यही रहता है। धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु दिन के पहले एक-तिहाई भाग, यानी सुबह, को सबसे अच्छा मानते हैं। अगर सुबह चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग हो, तो दोपहर का अभिजित मुहूर्त लिया जाता है। रात में घटस्थापना नहीं की जाती। इस बार का मुहूर्त इसी पृष्ठ पर ऊपर दिया है; दिन का पूरा हाल आज का पंचांग में देखें।
कैसे करें
- साफ़ मिट्टी की वेदी या चौड़े पात्र में जौ बोए जाते हैं। नौ दिन में यही हरे जवारे बनते हैं।
- कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का, अक्षत और दूब डालें; मुँह पर आम के पाँच पत्ते और ऊपर लाल चुनरी में लिपटा जटा वाला नारियल रखें।
- कलश पर रोली से स्वस्तिक बनाकर, पहले गणेश जी का स्मरण करें और हाथ में जल लेकर नौ दिन के व्रत या पूजा का संकल्प लें।
- बहुत से घरों में इसी समय अखंड ज्योति जलाई जाती है, जो नवमी-दशमी तक जलती रहती है।
सामग्री की पूरी सूची और क्रम कलश स्थापना विधि में है। इसी दिन देवी के पहले रूप की पूजा भी होती है — शैलपुत्री पूजा देखें।
उत्तर भारत की परंपराएँ
बिहार और पूर्वांचल में कलश के साथ ही दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू होता है, जो नवमी तक रोज़ चलता है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बोए गए जौ को "खेतरी" कहते हैं; दशहरे पर इसकी बालियाँ कान के पीछे या पगड़ी में लगाई जाती हैं। नौ दिनों का पूरा क्रम नवरात्रि कैलेंडर में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
घटस्थापना कब की जाती है?
क्या रात में घटस्थापना कर सकते हैं?
नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं?
अगर अखंड ज्योति बीच में बुझ जाए तो क्या करें?
कलश का विसर्जन कब होता है?
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