नवरात्रि व्रत में क्या खाएं, क्या नहीं

नवरात्रि व्रत में अनाज, दाल, सादा नमक, प्याज़ और लहसुन नहीं खाए जाते। इनकी जगह कुट्टू, सिंघाड़ा और राजगिरा का आटा, समा के चावल, साबूदाना, आलू-शकरकंद, फल, दूध-दही, मखाना और सेंधा नमक लिया जाता है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 5 मिनट का पाठ
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नवरात्रि व्रत में अनाज, दालें, सादा नमक, प्याज़ और लहसुन छोड़ दिए जाते हैं, और उनकी जगह कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, समा के चावल, साबूदाना, आलू, फल, दूध-दही और सेंधा नमक से बना भोजन लिया जाता है। हर घर की थाली थोड़ी अलग होती है, क्योंकि कोई केवल फल पर रहता है तो कोई दिन में एक बार फलाहारी भोजन करता है। नीचे दी गई सूची उत्तर भारत के घरों में सबसे ज़्यादा मानी जाने वाली परंपरा पर आधारित है।

व्रत के तरीके

नवरात्रि का व्रत सब एक तरह नहीं रखते। अपनी सेहत, उम्र और काम के हिसाब से तरीका चुनें:

  • नौ दिन फलाहार: सबसे आम तरीका। दिन में फल-दूध और शाम को एक बार कुट्टू, सिंघाड़ा या समा से बना भोजन।
  • केवल फल और दूध: कुछ लोग नौ दिन पका हुआ कुछ नहीं खाते।
  • एक समय भोजन (एकाशन): दिन में एक बार सात्विक फलाहारी भोजन।
  • पहला और आख़िरी व्रत: जो नौ दिन नहीं रख सकते, वे प्रतिपदा और अष्टमी या नवमी का व्रत रखते हैं, जिसे "जोड़े का व्रत" भी कहते हैं।
  • निर्जला: बहुत कम लोग, और वह भी आम तौर पर अष्टमी जैसे एक दिन ही, बिना पानी के रहते हैं।

व्रत का संकल्प घटस्थापना के समय लिया जाता है, जिसकी विधि कलश स्थापना विधि में है। नौ दिनों का कैलेंडर नवरात्रि पृष्ठ पर देखें।

क्या खाएं

श्रेणीक्या ले सकते हैंकैसे बनाएं
आटाकुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा (रामदाना), समा का आटापूरी, पराठा, पकौड़ी, चीला
चावल की जगहसमा (सांवा/मोरधन) के चावल, साबूदानाखिचड़ी, पुलाव, खीर, साबूदाना वड़ा
सब्ज़ियाँआलू, शकरकंद, अरबी, कच्चा केला, कद्दू, लौकी, खीरा, टमाटरसूखी सब्ज़ी, रायता, टिक्की
दूध से बनादूध, दही, छाछ, पनीर, मावा, घीलस्सी, रायता, मखाने की खीर
फलकेला, सेब, पपीता, अनार, अंगूर, संतरा, नारियलफ्रूट चाट (सेंधा नमक से)
मेवे और बीजमखाना, मूँगफली, बादाम, काजू, अखरोट, खजूर, किशमिशभुना मखाना, मूँगफली की चटनी
मसालेसेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हरी मिर्च, अदरक, इलायची, धनिया पत्तीतड़का घी में
मीठागुड़, शहद, चीनी, मिश्रीहलवा, खीर

कुछ घरों में टमाटर, जीरा या हरी मिर्च भी नहीं ली जाती, और कुछ में मूँगफली नहीं। ऐसे फ़र्क़ आम हैं; अपनी माँ या सास की रसोई की परंपरा मानें।

क्या नहीं खाना चाहिए

  • गेहूँ, चावल, मैदा, सूजी, बेसन और सारी दालें
  • सादा (आयोडीन वाला) नमक
  • प्याज़ और लहसुन
  • हल्दी, हींग, राई, मेथी दाना और गरम मसाला (ज़्यादातर घरों में)
  • मांस, अंडा, शराब और तंबाकू
  • बाज़ार के पैकेट वाले नमकीन और चिप्स, जिनमें अक्सर सादा नमक या अनाज का आटा मिला होता है
  • बाज़ार की हींग, क्योंकि उसमें आम तौर पर गेहूँ या चावल का आटा मिला होता है

एक दिन की फलाहारी थाली का उदाहरण

नौ दिन रोज़ "आज क्या बनाऊँ" सोचना थका देता है। जो लोग फलाहार के साथ एक बार भोजन करते हैं, उनके लिए एक आसान दिनचर्या ऐसी हो सकती है:

  • सुबह पूजा के बाद: एक गिलास दूध या चाय, साथ में चार-पाँच भीगे बादाम और एक केला।
  • दोपहर: सेब, पपीता और अनार की फ्रूट चाट, ऊपर से सेंधा नमक और भुना जीरा; साथ में एक कटोरी दही या छाछ।
  • शाम: घी में भुना मखाना या मूँगफली, नारियल पानी या नींबू पानी।
  • रात का भोजन: कुट्टू या सिंघाड़े की दो-तीन रोटियाँ या पराठे, आलू-टमाटर की सूखी सब्ज़ी या लौकी, खीरे का रायता।
  • मीठे के लिए: हफ़्ते में एक-दो दिन साबूदाने या मखाने की खीर, या सिंघाड़े के आटे का हलवा।

अगले दिन रोटियों की जगह समा के चावल की खिचड़ी, फिर साबूदाना खिचड़ी, फिर अरबी या शकरकंद की चाट रखें। इस तरह बदल-बदलकर खाने से न तो पेट भारी होता है और न ही व्रत बोझ लगता है।

सेंधा नमक क्यों

व्रत में सेंधा नमक इसलिए लिया जाता है क्योंकि इसे शुद्ध और अपरिष्कृत माना गया है। यह खदान से निकला चट्टानी नमक है, जबकि सादा नमक समुद्र के पानी से बनाकर कारखाने में साफ़ किया जाता है। पुरानी परंपरा में व्रत का भोजन वह माना गया जो "कच्चा" न हो, यानी अनाज और सामान्य रसोई के नमक से अलग हो। सेंधा नमक को आयुर्वेद में भी सात्विक माना जाता है। एक बात याद रखें: सेंधा नमक में आयोडीन नहीं होता, इसलिए व्रत ख़त्म होते ही सामान्य नमक पर लौट आएँ।

नौ दिन ऊर्जा बनाए रखने के सुझाव

  • पानी पीते रहें: नारियल पानी, नींबू पानी (सेंधा नमक और मिश्री के साथ), छाछ और लस्सी दिन भर लें।
  • तला हुआ कम करें: रोज़ कुट्टू की पूरी और साबूदाने के पकौड़े भारी पड़ते हैं। समा की खिचड़ी, लौकी की सब्ज़ी और दही बेहतर विकल्प हैं।
  • प्रोटीन का ध्यान रखें: पनीर, दही, मखाना, मूँगफली और राजगिरा से पेट देर तक भरा रहता है।
  • थोड़ा-थोड़ा खाएँ: एक बार भारी खाने से बेहतर है दिन में दो-तीन बार फल या दूध।
  • कुट्टू का आटा ताज़ा लें: पुराना या खुला बिकने वाला कुट्टू का आटा जल्दी ख़राब होता है। सील पैकेट ही लें और उसकी तारीख़ देखें।
  • बीमारी में सावधानी: गर्भवती महिलाएँ, बुज़ुर्ग, डायबिटीज़ या ब्लड प्रेशर के मरीज़ व्रत का तरीका अपने डॉक्टर से पूछकर तय करें। फलाहार में भी श्रद्धा उतनी ही है।

जो लोग एकादशी का व्रत भी रखते हैं, उनके लिए नियम लगभग यही हैं; अंतर जानने के लिए एकादशी में क्या खाएं, क्या नहीं देखें।

पारण

नवरात्रि व्रत का पारण आम तौर पर नवमी को हवन और कन्या पूजन के बाद किया जाता है; कई परिवार दशमी की सुबह पारण करते हैं। अष्टमी तक व्रत रखने वाले अष्टमी पूजन के बाद व्रत खोलते हैं। पारण में सबसे पहले देवी का प्रसाद, यानी हलवा, पूरी और काले चने, लिया जाता है। नौ दिन हल्का खाने के बाद पेट को एकदम भारी भोजन न दें; पहले दिन सादा दाल-चावल या खिचड़ी अच्छी रहती है। हर दिन देवी को क्या भोग लगता है, यह नवदुर्गा के नौ रूप और भोग में दिया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि व्रत में क्या खा सकते हैं?

कुट्टू, सिंघाड़ा और राजगिरा का आटा, समा के चावल, साबूदाना, आलू, शकरकंद, लौकी, फल, दूध-दही, पनीर, मखाना, मेवे और सेंधा नमक खाया जा सकता है।

नवरात्रि व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?

गेहूँ, चावल, दालें, बेसन, सादा नमक, प्याज़, लहसुन और ज़्यादातर घरों में हल्दी, हींग व गरम मसाला नहीं खाए जाते। मांस और शराब पूरी तरह वर्जित हैं।

क्या नवरात्रि व्रत में चाय पी सकते हैं?

हाँ, ज़्यादातर लोग दूध वाली चाय पीते हैं। बस खाली पेट बहुत ज़्यादा चाय से बचें और साथ में फल या मखाना लें।

व्रत में सेंधा नमक ही क्यों खाते हैं?

सेंधा नमक खदान से निकला अपरिष्कृत नमक है, जिसे परंपरा में शुद्ध और सात्विक माना गया है। सादा नमक प्रोसेस किया हुआ होता है, इसलिए व्रत में नहीं लिया जाता।

क्या नवरात्रि व्रत में टमाटर खा सकते हैं?

ज़्यादातर घरों में टमाटर खाया जाता है, लेकिन कुछ परिवार इसे व्रत में नहीं लेते। अपने घर की परंपरा मानें।

नवरात्रि व्रत का पारण कब करें?

आम तौर पर नवमी को कन्या पूजन और हवन के बाद, या दशमी की सुबह। अष्टमी तक व्रत रखने वाले अष्टमी पूजन के बाद पारण करते हैं।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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