सरगी करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले खाया जाने वाला भोजन है, जिसके बाद चाँद निकलने तक न कुछ खाया जाता है, न पानी पिया जाता है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में यह थाली सास अपनी बहू को देती है, और इसमें मीठा, मेवे, फल और श्रृंगार का सामान रहता है। सरगी का असली काम यही है कि लंबे निर्जल दिन के लिए शरीर तैयार रहे और व्रत आशीर्वाद के साथ शुरू हो।
करवा चौथ कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को पड़ता है। 2026 में यह व्रत 29 अक्टूबर को है; चंद्रोदय का समय और पूजा मुहूर्त करवा चौथ पृष्ठ पर देखें।
सरगी क्या है और सास ही क्यों देती हैं
पुराने समय में बहू ससुराल में रहती थी और व्रत के दिन उसका ध्यान रखने की ज़िम्मेदारी सास की होती थी। सरगी उसी स्नेह की निशानी है। सास अपनी बहू के लिए थाली सजाती है, उसमें सुहाग की चीज़ें रखती है और आशीर्वाद देती है कि उसका सुहाग बना रहे। बदले में शाम की पूजा के बाद बहू सास को बायना देती है, जिसमें मिठाई, मेवे, कपड़े या पैसे होते हैं, और पैर छूकर आशीर्वाद लेती है।
यह लेन-देन सिर्फ़ रस्म नहीं है। कई घरों में यही वह दिन होता है जब सास-बहू साथ बैठकर पुरानी बातें करती हैं, और नई बहू को घर की परंपराएँ सिखाई जाती हैं।
सरगी कब खाएं: सूर्योदय से पहले का समय
सरगी ब्रह्म मुहूर्त से सूर्योदय के बीच खाई जाती है, यानी आमतौर पर सुबह चार से साढ़े पाँच बजे के बीच। अपने शहर का सही सूर्योदय आज के पंचांग में देख लें और उससे कम से कम आधा घंटा पहले खाना खत्म कर लें। सूर्योदय के बाद पानी का एक घूँट भी नहीं लिया जाता।
- उठकर पहले मुँह-हाथ धोएँ, फिर स्नान करके या कम से कम साफ़ कपड़े पहनकर सरगी लें। कई परिवारों में स्नान के बाद ही सरगी खाने का नियम है।
- जल्दबाज़ी में न खाएँ। आराम से बैठकर 20–25 मिनट में खाएँ ताकि पेट भारी न लगे।
- खाने के बाद थोड़ा पानी पी लें, फिर सूर्योदय से पहले भगवान को प्रणाम करके व्रत का संकल्प लें।
सरगी की थाली में क्या-क्या रखें
हर घर की थाली थोड़ी अलग होती है, पर ज़्यादातर पंजाबी और दिल्ली के परिवारों में ये चीज़ें मिलती हैं:
- फेनी या सेवइयाँ: दूध में भिगोई या पकाई हुई फेनी सरगी की पहचान है। यह पेट भरती है और देर तक ऊर्जा देती है।
- मेवे: बादाम (रात भर भिगोए हुए), काजू, अखरोट, किशमिश, छुहारे।
- फल: केला, सेब, अनार, पपीता, नाशपाती। मौसम के फल सबसे अच्छे रहते हैं।
- मठरी और मीठी चीज़: मठरी, खीर या घर की बनी कोई हल्की मिठाई।
- नमकीन भोजन: कई घरों में आलू या पनीर का परांठा, या दही के साथ हल्की सब्ज़ी रोटी।
- पानी वाली चीज़ें: नारियल पानी, छाछ या लस्सी, खीरा।
- सुहाग का सामान: चूड़ियाँ, बिंदी, सिंदूर, मेहंदी, और कई बार नई साड़ी या सूट। यह खाया नहीं जाता, पर थाली का हिस्सा माना जाता है। पूरी सूची के लिए सोलह श्रृंगार वाला लेख देखें।
दिनभर निर्जल रहने के लिए क्या खाएं, क्या टालें
करवा चौथ का व्रत 13–14 घंटे का निर्जल व्रत होता है, इसलिए सरगी में स्वाद से ज़्यादा समझदारी काम आती है।
क्या ज़रूर खाएँ
- दूध-फेनी, दलिया या ओट्स जैसी चीज़ें जो धीरे-धीरे पचती हैं।
- भिगोए बादाम और अखरोट, थोड़ी मात्रा में।
- पानी से भरे फल और नारियल पानी, ताकि शरीर में पानी की कमी देर से महसूस हो।
- दही या छाछ, अगर आपको सूट करती हो।
क्या टालें
- बहुत नमक, अचार और तली-भुनी चीज़ें। इनसे दोपहर तक प्यास बहुत लगती है।
- ज़्यादा चाय या कॉफ़ी। कई महिलाएँ सरगी में चाय लेती हैं, पर दो कप से ज़्यादा लेने पर बाद में सिरदर्द और प्यास दोनों बढ़ सकते हैं।
- बहुत ज़्यादा मिठाई, जिससे थोड़ी देर बाद ही भूख लगने लगती है।
- ज़रूरत से ज़्यादा खाना। पेट भारी होगा तो सुबह की नींद और दिन दोनों खराब होंगे।
अगर आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं या कोई दवा रोज़ लेती हैं, तो व्रत के तरीके पर अपने डॉक्टर से पहले बात कर लें। कई परिवारों में ऐसी स्थिति में फल या पानी के साथ व्रत रखने की छूट दी जाती है, और इसे व्रत भंग नहीं माना जाता।
पहली बार व्रत रखने वाली बहू और सास न हो तो सरगी
पहला करवा चौथ ज़्यादा धूम से मनाया जाता है। नई बहू के लिए सास की थाली में कपड़े, गहने और पूरा श्रृंगार रहता है, और कई घरों में मायके से भी करवा, मिठाई और कपड़े आते हैं। शाम की पूजा की पूरी तैयारी करवा चौथ पूजा विधि और सामग्री वाले लेख में दी गई है।
अगर सास नहीं हैं या आप उनसे दूर रहती हैं, तो सरगी जेठानी, ननद, बड़ी बहन या माँ दे सकती हैं। कई महिलाएँ सास की तस्वीर के सामने थाली रखकर उन्हें याद करती हैं और फिर खुद सरगी लेती हैं। नौकरी के लिए अकेले रहने वाले जोड़ों में पति भी सरगी तैयार कर देते हैं। परंपरा का मूल भाव आशीर्वाद है, इसलिए कौन थाली दे रहा है, इसे लेकर परेशान होने की ज़रूरत नहीं।
पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और यूपी के रिवाज़ों में अंतर
| क्षेत्र | सरगी का रिवाज़ |
|---|---|
| पंजाब | सास की सरगी सबसे ज़रूरी रस्म है। दूध-फेनी, मठरी, मेवे और श्रृंगार का सामान। शाम को थाली फेरने की रस्म। |
| हरियाणा और दिल्ली | पंजाब जैसी ही सरगी, कई घरों में सुबह परांठा या हलवा भी। शाम को सास को बायना। |
| पश्चिमी यूपी | सरगी कई परिवारों में होती है, कई में नहीं। जहाँ नहीं होती, वहाँ महिलाएँ सूर्योदय से पहले हल्का कुछ खा लेती हैं। मायके से करवा और मिठाई आने का चलन ज़्यादा है। |
| राजस्थान और मध्य प्रदेश | व्रत की सुबह का भोजन घर की बड़ी महिलाएँ तय करती हैं। चौथ माता की पूजा पर ज़्यादा ज़ोर रहता है। |
पूर्वी यूपी और बिहार में करवा चौथ का चलन पहले कम था, पर अब शहरों में यह खूब मनाया जाता है और वहाँ भी सरगी की थाली का चलन बढ़ा है।
सरगी के बाद दिनभर का समय कथा, पूजा की तैयारी और आराम में बिताएँ। शाम को वीरावती की कहानी सुनी जाती है, जो करवा चौथ व्रत कथा पृष्ठ पर पूरी दी गई है। चाँद दिखने पर अर्घ्य देकर और पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला जाता है।

