माघ गुप्त नवरात्रि तिथियाँ 2026

वर्ष 2026 की सभी तिथियाँ, New Delhi, India के समय सहित।

2026 में माघ गुप्त नवरात्रि सोमवार, जनवरी 19, 2026 को प्रारम्भ होकर बुधवार, जनवरी 28, 2026 को समाप्त होंगी (कुल 10 दिन)। ये तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय (IST) के आधार पर गणना की गई हैं; अपने शहर के लिए स्थान बदलें।

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2026
  1. दिन 1: माघ गुप्त नवरात्रि: घटस्थापना, माघ गुप्त नवरात्रि: शैलपुत्री पूजा
  2. दिन 2: माघ गुप्त नवरात्रि: ब्रह्मचारिणी पूजा
  3. दिन 3: माघ गुप्त नवरात्रि: चंद्रघंटा पूजा
  4. दिन 4: माघ गुप्त नवरात्रि: कूष्मांडा पूजा
  5. दिन 5: माघ गुप्त नवरात्रि: स्कंदमाता पूजा
  6. दिन 6: माघ गुप्त नवरात्रि: कात्यायनी पूजा
  7. दिन 7: माघ गुप्त नवरात्रि: कालरात्रि पूजा
  8. दिन 8: माघ गुप्त नवरात्रि: महागौरी पूजा
  9. दिन 9: माघ गुप्त नवरात्रि: सिद्धिदात्री पूजा
  10. दिन 10: माघ गुप्त नवरात्रि: पारण

माघ गुप्त नवरात्रि

माघ गुप्त नवरात्रि माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाली नवरात्रि है। साल में चार नवरात्रियाँ होती हैं: चैत्र और आश्विन की प्रकट नवरात्रि, और माघ व आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि। गुप्त नवरात्रि को साधना की नवरात्रि माना जाता है, जो सार्वजनिक उत्सव से ज़्यादा घर और मन के भीतर की पूजा है।

क्या है और क्यों मनाते हैं

"गुप्त" इसलिए कि इन दिनों की उपासना शांत और निजी रखी जाती है। शाक्त और तांत्रिक परंपरा में इन नौ दिनों में दस महाविद्याओं, काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला, की साधना की जाती है। गृहस्थ इन दिनों में नवदुर्गा की सामान्य पूजा, दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ और संयम रखते हैं। इसी नवरात्रि की पंचमी को बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती की पूजा होती है।

नौ दिन

  1. प्रतिपदा: शैलपुत्री
  2. द्वितीया: ब्रह्मचारिणी
  3. तृतीया: चंद्रघंटा
  4. चतुर्थी: कूष्मांडा
  5. पंचमी: स्कंदमाता
  6. षष्ठी: कात्यायनी
  7. सप्तमी: कालरात्रि
  8. अष्टमी: महागौरी
  9. नवमी: सिद्धिदात्री

घरों में यही नवदुर्गा क्रम चलता है; हर रूप का भोग नवदुर्गा के नौ रूप में देखें।

घटस्थापना

घटस्थापना प्रतिपदा तिथि में, दिन के पहले एक-तिहाई भाग में की जाती है। उस समय चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग हो, या प्रतिपदा जल्दी खत्म हो रही हो, तो दोपहर का अभिजित मुहूर्त लिया जाता है। मिट्टी के पात्र में जौ बोकर उस पर जल भरा कलश, आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है और अखंड दीपक जलाया जाता है। पूरी विधि कलश स्थापना विधि में है।

मुहूर्त के लिए माघ गुप्त नवरात्रि घटस्थापना पृष्ठ देखें।

पारण

नवमी तिथि पूरी होने के बाद दशमी को व्रत खोला जाता है; कुछ घरों में नवमी के हवन और कन्या पूजन के बाद पारण होता है। समय पारण पृष्ठ पर दिया गया है। तंत्र साधना बिना योग्य गुरु के न करें; घर की पूजा सरल और सात्त्विक रखें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माघ गुप्त नवरात्रि कब होती है?
माघ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक। इस साल की तारीखें इसी पृष्ठ पर दी गई हैं।
गुप्त नवरात्रि को गुप्त क्यों कहते हैं?
क्योंकि इसमें उपासना सार्वजनिक उत्सव की तरह नहीं, बल्कि शांत और निजी साधना के रूप में की जाती है।
गुप्त नवरात्रि में किसकी पूजा होती है?
साधक दस महाविद्याओं की उपासना करते हैं, जबकि गृहस्थ नवदुर्गा की सामान्य पूजा और सप्तशती पाठ करते हैं।
क्या गृहस्थ गुप्त नवरात्रि का व्रत रख सकते हैं?
हाँ, घटस्थापना, अखंड दीपक, पाठ और सात्त्विक व्रत के साथ सामान्य नवरात्रि की तरह पूजा की जा सकती है।

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