2026

माघ गुप्त नवरात्रि: सिद्धिदात्री पूजा 2026

मंगलवार, जनवरी 27, 2026

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माघ गुप्त नवरात्रि: सिद्धिदात्री पूजा

माघ गुप्त नवरात्रि की नवमी

माघ शुक्ल नवमी माघ गुप्त नवरात्रि का आख़िरी दिन है। इस दिन नवदुर्गा के नौवें रूप माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है और नौ दिन की साधना हवन के साथ पूरी की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधना का असली फल इसी दिन माना जाता है, इसलिए साधक इसे पूर्णाहुति का दिन कहते हैं।

माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप

माँ कमल पर विराजती हैं, वाहन सिंह है, और चार भुजाओं में चक्र, गदा, शंख और कमल हैं। अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व — ये आठ सिद्धियाँ उन्हीं की देन मानी जाती हैं। मान्यता है कि शिव ने भी इन्हीं की कृपा से सिद्धियाँ पाईं और अर्धनारीश्वर बने।

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

गुप्त नवरात्रि में नवमी का अर्थ

गुप्त नवरात्रि शोर-शराबे से दूर, भीतर की साधना का समय है। तंत्र मार्ग के साधक इन दिनों दस महाविद्याओं — काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी (षोडशी), भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला — में से किसी एक या सबकी उपासना करते हैं, और नवमी को जप का दशांश हवन करके अनुष्ठान पूरा करते हैं। झारखंड के रजरप्पा (छिन्नमस्तिका) और मध्य प्रदेश के दतिया (पीतांबरा पीठ) जैसे स्थानों पर इन दिनों साधकों की आवाजाही बढ़ जाती है। गृहस्थ के लिए नियम सीधा है: नवमी तिथि में सुबह पूजा, तिल या हलवे का भोग, और सप्तशती या नवार्ण मंत्र से छोटा हवन।

घर पर हवन

हवन की सामग्री और क्रम घर पर हवन विधि में दिया है। हवन के बाद जय अम्बे गौरी आरती करें और क्षमा प्रार्थना से पूजा पूरी करें। व्रत अगले दिन खोला जाता है — माघ गुप्त नवरात्रि पारण देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माघ गुप्त नवरात्रि की नवमी को किसकी पूजा होती है?
माघ शुक्ल नवमी को माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है और हवन से नौ दिन की साधना पूरी की जाती है।
गुप्त नवरात्रि की नवमी को हवन कैसे करें?
सुबह पूजा के बाद दुर्गा सप्तशती या नवार्ण मंत्र से आहुतियाँ दें। साधक अपने जप की संख्या का दशांश हवन करते हैं।
सिद्धिदात्री को क्या भोग लगाएं?
तिल का भोग परंपरागत है; कई घरों में हलवा-पूरी भी चढ़ाई जाती है।
गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याएँ कौन सी हैं?
काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी (षोडशी), भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला।
क्या नवमी को ही व्रत खोल लें?
शास्त्रीय नियम से पारण दशमी को होता है। फिर भी कुछ परिवार नवमी के हवन के बाद व्रत खोलते हैं; अपनी परंपरा के अनुसार करें।

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