माघ गुप्त नवरात्रि: कालरात्रि पूजा
माघ गुप्त नवरात्रि का सातवाँ दिन
माघ शुक्ल सप्तमी को माघ गुप्त नवरात्रि का सातवाँ दिन होता है, जिस दिन नवदुर्गा के सातवें रूप माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। यह रात साधकों के लिए पूरी नवरात्रि की सबसे गहरी रात मानी जाती है। इसी तिथि को रथ सप्तमी यानी सूर्य जयंती भी पड़ती है, इसलिए दिन में सूर्य को अर्घ्य और रात में देवी की साधना, दोनों साथ चलते हैं।
माँ कालरात्रि का स्वरूप
घने अँधेरे जैसा काला रंग, बिखरे केश, तीन नेत्र, साँस से निकलती ज्वाला और वाहन गधा — रूप भयानक है, पर भक्तों के लिए शुभ फल देने वाला, इसलिए माँ का एक नाम शुभंकरी है। हाथों में लोहे का काँटा और खड्ग, बाकी दो हाथ अभय और वरद मुद्रा में। प्रचलित ध्यान श्लोक की पहली पंक्तियाँ:
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
गुप्त नवरात्रि में यह दिन क्यों अलग है
चैत्र और शारदीय नवरात्रि में पंडाल, जागरण और कन्या-भोज की धूम रहती है। माघ और आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि शांत रहती है — "गुप्त" इसलिए कि साधना का दिखावा नहीं किया जाता। तंत्र परंपरा के साधक इन नौ दिनों में दस महाविद्याओं — काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी (षोडशी), भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला — की उपासना गुरु के बताए क्रम से करते हैं। कालरात्रि का स्वभाव महाविद्या काली के निकट है, इसलिए बहुत से साधक सप्तमी की रात काली साधना करते हैं।
गृहस्थ क्या करें
- शाम को कलश के पास सरसों के तेल का दीपक जलाकर "ॐ देवी कालरात्र्यै नमः" की माला करें।
- गुड़ का भोग लगाएँ और दुर्गा चालीसा या सप्तशती का सातवाँ अध्याय पढ़ें।
- तांत्रिक प्रयोग गुरु-दीक्षा के बिना न करें; घर में सीधी, सात्विक पूजा ही काफ़ी है।
अगले दिन महागौरी पूजा है। शारदीय नवरात्रि में यही दिन कैसे मनाया जाता है, यह कालरात्रि पूजा पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माघ गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन किसकी पूजा होती है?
गुप्त नवरात्रि को गुप्त क्यों कहते हैं?
क्या गृहस्थ गुप्त नवरात्रि में पूजा कर सकते हैं?
माँ कालरात्रि को क्या भोग लगाएं?
क्या इसी दिन रथ सप्तमी भी होती है?
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