2026

रथ सप्तमी 2026

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मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

रथ सप्तमी

रथ सप्तमी माघ शुक्ल सप्तमी को सूर्य देव की पूजा का पर्व है। इसे सूर्य जयंती, अचला सप्तमी और आरोग्य सप्तमी भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर प्रकट हुए, और इस दिन सूर्योदय से पहले स्नान और अर्घ्य का विशेष महत्व है।

क्या है और क्यों मनाते हैं

सूर्य को प्रत्यक्ष देवता कहा जाता है, जिन्हें हम रोज़ आँखों से देखते हैं। माघ के शुक्ल पक्ष में दिन बड़े होने लगते हैं और ठंड ढलने लगती है, इसलिए यह सप्तमी सूर्य की बढ़ती शक्ति के स्वागत जैसी है। भविष्य पुराण में अचला सप्तमी के व्रत और स्नान का वर्णन मिलता है, और इसे साल भर के स्वास्थ्य से जोड़ा गया है।

किस तिथि को

माघ शुक्ल सप्तमी, बसंत पंचमी के दो दिन बाद। जिस दिन सूर्योदय पर सप्तमी हो, वही दिन लिया जाता है, और स्नान अरुणोदय यानी सूर्योदय से पहले की बेला में किया जाता है।

कैसे मनाते हैं

  • सूर्योदय से पहले नदी, तालाब या घर पर स्नान। कई जगह सिर पर आक (मदार) के सात पत्ते रखकर स्नान करने की परंपरा है।
  • तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, रोली और अक्षत डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य; आदित्य हृदय या सूर्य के बारह नामों का पाठ।
  • आँगन में रंगोली से सात घोड़ों वाला रथ बनाना, और दूध-चावल की खीर का भोग।
  • गुड़, तिल, गेहूँ, लाल कपड़ा या ताँबे का दान।

अर्घ्य की सही विधि सूर्य को जल कैसे चढ़ाएँ में दी गई है। रविवार को सूर्य व्रत रखने वाले रविवार व्रत कथा भी पढ़ सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रथ सप्तमी कब होती है?
रथ सप्तमी माघ शुक्ल सप्तमी को होती है, जो बसंत पंचमी के दो दिन बाद पड़ती है।
रथ सप्तमी को और किन नामों से जानते हैं?
इसे सूर्य जयंती, अचला सप्तमी, आरोग्य सप्तमी और भानु सप्तमी भी कहा जाता है।
रथ सप्तमी पर स्नान कब करें?
सूर्योदय से पहले, अरुणोदय काल में स्नान करना सबसे शुभ माना जाता है।
सूर्य को अर्घ्य में क्या डालें?
तांबे के लोटे में जल के साथ लाल फूल, रोली, अक्षत और थोड़ा गुड़ डालकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें।
रथ सप्तमी पर क्या दान करें?
गुड़, तिल, गेहूँ, लाल वस्त्र और ताँबे का बर्तन दान करना अच्छा माना जाता है।

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