बसंत पंचमी
बसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है और इसे वसंत ऋतु के आगमन का पर्व माना जाता है। इस दिन माँ सरस्वती की पूजा होती है, लोग पीले कपड़े पहनते हैं, पीले पकवान बनते हैं और खेतों में फूली सरसों इस रंग को और गहरा कर देती है।
क्या है और क्यों मनाते हैं
ठंड की विदाई और फसल के पकने का समय होने से यह दिन उल्लास का है। एक ओर विद्या की देवी सरस्वती की पूजा होती है, दूसरी ओर कामदेव और रति का स्मरण भी इसी ऋतु से जुड़ा है। ज्योतिष परंपरा में बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, इसलिए बहुत से विवाह, सगाई और गृह प्रवेश बिना अलग मुहूर्त देखे इसी दिन हो जाते हैं।
किस तिथि को
माघ शुक्ल पंचमी। जिस दिन पूर्वाह्न (सुबह से दोपहर से पहले तक) पंचमी हो, वही दिन लिया जाता है। शुक्ल पक्ष होने से अमांत और पूर्णिमांत में नाम एक ही है।
कैसे मनाते हैं
- पीले वस्त्र, पीले फूल और केसरिया मीठे चावल या बेसन के लड्डू का भोग।
- घर पर सरस्वती पूजा, बच्चों की किताबों-कलम की पूजा और सरस्वती माता की आरती।
- पंजाब और आसपास के इलाकों में पतंगबाज़ी का दिन।
- ब्रज में इसी दिन से होली का माहौल शुरू होता है: मंदिरों में गुलाल उड़ने लगता है और होलिका का डंडा गाड़ा जाता है, जो चालीस दिन बाद होली तक चलता है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
बिहार और बंगाल में पंडालों वाली सरस्वती पूजा, पंजाब में पतंगें और पीले पकवान, और उत्तराखंड में घरों के दरवाज़ों पर जौ की हरी बालियाँ रखने का चलन है। पूजा का पूरा क्रम वसंत पंचमी पूजा विधि में देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बसंत पंचमी कब होती है?
बसंत पंचमी पर पीला रंग क्यों पहनते हैं?
क्या बसंत पंचमी पर शादी कर सकते हैं?
बसंत पंचमी पर किसकी पूजा होती है?
ब्रज में बसंत पंचमी का क्या महत्व है?
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