होली
होली रंगों का त्योहार है, जो फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन के अगले दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को गुलाल और रंग लगाते हैं, गले मिलते हैं और गुझिया खिलाते हैं। उत्तर भारत में इसे धुलेंडी या धुलंडी भी कहते हैं।
क्या है और क्यों मनाते हैं
होली की जड़ में प्रह्लाद की कथा है: हिरण्यकशिपु की बहन होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठी, पर होलिका जल गई और भक्त प्रह्लाद बच गए। यह कहानी होलिका दहन की कथा में पढ़ें। ब्रज में होली राधा-कृष्ण के प्रेम से जुड़ी है, और खेतों में पकी गेहूँ-जौ की नई फसल का स्वागत भी इसी समय होता है।
किस तिथि को
रंगों की होली पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को होती है; अमांत पंचांग में यही दिन फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा कहलाता है। इससे एक रात पहले, फाल्गुन पूर्णिमा को प्रदोष काल में और भद्रा समाप्त होने पर होलिका दहन होता है।
कैसे मनाते हैं
- सुबह होलिका की राख का तिलक, फिर सूखे गुलाल और गीले रंगों से खेलना।
- घर में गुझिया, दही-बड़े, मठरी, कांजी और ठंडाई।
- दोपहर बाद नहाकर नए कपड़े पहनकर रिश्तेदारों और पड़ोसियों से मिलना।
- फाग और चौताल गाना, ढोलक के साथ।
होलिका पूजन की सामग्री और विधि होलिका दहन पूजा विधि में है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
ब्रज में होली कई दिन चलती है: बरसाना की लट्ठमार होली, नंदगाँव की होली, वृंदावन में फूलों की होली और मथुरा-गोकुल के आयोजन। बिहार में फगुआ गाया जाता है, कुमाऊँ में बैठकी और खड़ी होली होती है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में पाँच दिन बाद रंग पंचमी पर फिर रंग खेला जाता है। सुरक्षित, प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
होली किस तिथि को होती है?
होलिका दहन और होली में क्या अंतर है?
होली पर क्या बनाया जाता है?
लट्ठमार होली कहाँ होती है?
रंग पंचमी क्या है?
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