रंग पंचमी
रंग पंचमी होली के पाँच दिन बाद मनाया जाने वाला रंगों का त्योहार है। उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में यह चैत्र कृष्ण पंचमी को पड़ती है। मध्य प्रदेश के मालवा, महाराष्ट्र और ब्रज के कई मंदिरों में इस दिन होली जितनी ही धूम रहती है।
क्या है और क्यों मनाते हैं
मान्यता है कि रंग पंचमी पर हवा में उड़ाया गया गुलाल देवताओं तक पहुँचता है, इसलिए इसे देवताओं की होली भी कहा जाता है। जहाँ होली घर-मोहल्ले का त्योहार है, वहीं रंग पंचमी पर सार्वजनिक जुलूस और मंदिरों में राधा-कृष्ण को रंग चढ़ाने का भाव ज़्यादा है। कई जगह यह होली उत्सव का समापन माना जाता है, जो होलिका दहन से शुरू होता है।
किस तिथि को
होली के बाद आने वाली कृष्ण पंचमी। पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) में होली के अगले दिन से चैत्र शुरू हो जाता है, इसलिए यह चैत्र कृष्ण पंचमी है; अमांत पंचांग (महाराष्ट्र, गुजरात) में यही फाल्गुन कृष्ण पंचमी कहलाती है। जिस दिन सूर्योदय पर पंचमी हो, वह दिन लिया जाता है।
कहाँ और कैसे मनाते हैं
- इंदौर की गेर प्रसिद्ध है, जिसमें शहर के बीच से रंग और पानी उड़ाते हुए बड़ा जुलूस निकलता है।
- उज्जैन और मालवा के मंदिरों में भगवान को गुलाल चढ़ाया जाता है।
- ब्रज के कई मंदिरों में होली का रंग रंग पंचमी तक चलता है।
- महाराष्ट्र में मछुआरा समाज और ग्रामीण इलाकों में नाच-गाने के साथ रंग खेला जाता है।
घरों में राधा-कृष्ण को गुलाल और पीले फूल चढ़ाकर, सूखे या प्राकृतिक रंगों से खेलना ही सबसे सादा तरीका है। होली की कथा होलिका दहन की कथा में पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रंग पंचमी कब मनाई जाती है?
रंग पंचमी कहाँ सबसे ज़्यादा मनाई जाती है?
इंदौर की गेर क्या है?
रंग पंचमी को देवताओं की होली क्यों कहते हैं?
रंग पंचमी और होली में क्या अंतर है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
