2026

होलिका दहन 2026

…

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

होलिका दहन

होलिका दहन होली से पहले की रात जलाई जाने वाली होली है, जो भक्त प्रह्लाद की रक्षा और होलिका के अंत की याद में मनाई जाती है। यह फाल्गुन पूर्णिमा की शाम प्रदोष काल में, भद्रा का ध्यान रखकर किया जाता है। अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है।

कथा संक्षेप में

दैत्यराज हिरण्यकशिपु अपने बेटे प्रह्लाद की विष्णु भक्ति से नाराज़ था। उसकी बहन होलिका को वरदान था कि आग उसे नहीं जलाएगी, इसलिए वह प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठ गई। भगवान की कृपा से प्रह्लाद बच गए और होलिका जल गई। बाद में विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकशिपु का अंत किया। पूरी कथा होलिका दहन की कथा में पढ़ें।

किस तिथि और समय पर

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, जो सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में हो। सबसे ज़रूरी नियम यह है कि दहन भद्रा में न हो। अगर भद्रा आधी रात से पहले खत्म हो जाए तो उसके बाद दहन होता है; अगर पूरी रात रहे तो भद्रा के पुच्छ भाग में किया जा सकता है, पर भद्रा मुख में कभी नहीं। भद्रा क्या है, यह भद्रा क्या है में समझें। पूर्णिमांत पंचांग में अगले दिन की होली चैत्र कृष्ण प्रतिपदा कहलाती है, जबकि अमांत में वह फाल्गुन कृष्ण प्रतिपदा है।

पूजा कैसे होती है

होली से आठ दिन पहले होलाष्टक लगता है और चौराहों पर लकड़ी-उपले जमा होने लगते हैं। दहन वाले दिन महिलाएँ थाली में रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, गुड़, बताशे, नारियल, गुलाल और जल का लोटा लेकर होलिका पूजती हैं और कच्चे सूत को तीन या सात परिक्रमा में लपेटती हैं। गाय के गोबर से बने बड़कुल्ले (गुलरियों) की मालाएँ चढ़ाई जाती हैं। आग जलने पर गेहूँ और जौ की नई बालियाँ भूनी जाती हैं और प्रसाद के रूप में बाँटी जाती हैं। अगली सुबह होलिका की राख का तिलक लगाने की परंपरा है। सामग्री की पूरी सूची होलिका दहन पूजा विधि में है।

क्षेत्रीय परंपराएँ

भोजपुरी इलाकों में इसे सम्मत जलाना कहते हैं। मथुरा के पास फालैन गाँव में पंडा जलती होली के बीच से निकलता है, जिसे प्रह्लाद की रक्षा की याद माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होलिका दहन किस तिथि को होता है?
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को, सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में, भद्रा रहित समय देखकर।
क्या भद्रा में होलिका दहन कर सकते हैं?
भद्रा मुख में दहन बिल्कुल नहीं किया जाता। भद्रा पूरी रात रहे तो उसके पुच्छ भाग में दहन किया जा सकता है।
होलिका पूजा में क्या चढ़ाते हैं?
रोली, अक्षत, फूल, कच्चा सूत, गुड़, बताशे, नारियल, गुलाल, जल और गोबर के बड़कुल्ले; आग में गेहूँ-जौ की बालियाँ भूनी जाती हैं।
होलाष्टक क्या है?
होलिका दहन से पहले के आठ दिन, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक, जिनमें विवाह जैसे शुभ काम नहीं किए जाते।
होलिका की राख का क्या करते हैं?
अगली सुबह राख का तिलक लगाया जाता है और कुछ लोग थोड़ी राख घर ले जाकर शुभ मानकर रखते हैं।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...