माघ गुप्त नवरात्रि: ब्रह्मचारिणी पूजा
दूसरे दिन की देवी: माँ ब्रह्मचारिणी
माघ गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। यह पार्वती का वह रूप है जिसने शिव को पति रूप में पाने के लिए हज़ारों वर्ष कठोर तप किया। कथा है कि उन्होंने पहले फल-फूल पर, फिर केवल बेलपत्र पर, और आख़िर में पत्ते तक छोड़कर तप किया, इसलिए उनका एक नाम अपर्णा भी है। उनके दाएँ हाथ में जप की माला और बाएँ में कमंडल है।
किस तिथि को
माघ शुक्ल द्वितीया को। यदि किसी साल तिथि घटने-बढ़ने से दो देवियों की पूजा एक दिन पड़ जाए, तो ऊपर पंचांग में दिखाई तिथि को मानें।
पूजा और भोग
सफेद या पीले फूल, अक्षत, चंदन और कमल गट्टे चढ़ाएँ। परंपरा में माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर या मिश्री का भोग लगाया जाता है, कई घरों में पंचामृत भी। मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों की आयु बढ़ती है। ध्यान मंत्र "दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥" का पाठ करें। योग परंपरा में यह दिन स्वाधिष्ठान चक्र से जोड़ा जाता है।
गुप्त नवरात्रि में इस दिन का भाव
ब्रह्मचारिणी तप और संयम की देवी हैं, इसलिए गुप्त साधना करने वालों के लिए यह दिन जप की संख्या पक्की करने और नियम दृढ़ करने का होता है। जो साधक दस महाविद्याओं की उपासना करते हैं, वे अपनी गुरु-परंपरा के क्रम से आगे बढ़ते हैं; हमारी साइट दिनों को नवदुर्गा क्रम से दिखाती है। विद्यार्थी और नया काम शुरू करने वाले इस दिन धैर्य और एकाग्रता के लिए प्रार्थना करते हैं। आरती के लिए जय अम्बे गौरी और पाठ के लिए दुर्गा चालीसा देखें। पिछला दिन शैलपुत्री पूजा और अगला चंद्रघंटा पूजा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन किसकी पूजा होती है?
माँ ब्रह्मचारिणी को क्या भोग लगाएँ?
उन्हें अपर्णा क्यों कहते हैं?
ब्रह्मचारिणी के हाथों में क्या है?
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