माघ गुप्त नवरात्रि: कूष्मांडा पूजा
चौथे दिन की देवी: माँ कूष्मांडा
माघ गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा होती है। मान्यता है कि जब सृष्टि नहीं थी और चारों ओर अंधकार था, तब माँ ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की, इसलिए उन्हें आदिशक्ति कहा जाता है। उनका निवास सूर्य मंडल के भीतर माना गया है और उनके तेज से ही दसों दिशाएँ प्रकाशित होती हैं। आठ भुजाएँ होने से वे अष्टभुजा देवी भी कहलाती हैं; उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जप माला है, और वाहन सिंह है।
किस तिथि को
माघ शुक्ल चतुर्थी को। संयोग से माघ शुक्ल चतुर्थी को उत्तर भारत में गणेश जयंती (तिलकुंद चतुर्थी) भी मनाई जाती है, इसलिए कई घरों में इस दिन गणेश और देवी दोनों की पूजा होती है।
पूजा और भोग
माँ को लाल या पीले फूल, सिंदूर, अक्षत और हरी इलायची चढ़ाएँ। परंपरा में माँ कूष्मांडा को मालपुए का भोग लगाया जाता है, जिसे बाद में ब्राह्मण या कन्याओं में बाँटा जाता है। "कूष्मांड" का अर्थ कुम्हड़ा (पेठा) भी है, इसलिए कुछ परिवारों में कुम्हड़े या पेठे का भोग और दान भी किया जाता है। योग परंपरा में यह दिन अनाहत चक्र से जुड़ा माना जाता है।
गुप्त नवरात्रि का भाव
सूर्य से जुड़ी देवी होने के कारण इस दिन साधक सुबह सूर्य को अर्घ्य देकर जप शुरू करते हैं; विधि सूर्य को जल कैसे चढ़ाएँ में है। दस महाविद्याओं की साधना करने वाले अपने गुरु-क्रम से चलते हैं, जबकि हमारी साइट दिनों को नवदुर्गा रूपों के अनुसार दिखाती है। शाम को जय अम्बे गौरी की आरती करें। नौ रूपों का पूरा परिचय नवदुर्गा के नौ रूप में है, और अगला दिन स्कंदमाता पूजा का है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन किसकी पूजा होती है?
माँ कूष्मांडा को क्या भोग लगाएँ?
उन्हें अष्टभुजा क्यों कहते हैं?
क्या इसी दिन गणेश जयंती भी होती है?
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