तुला संक्रांति
तुला संक्रांति पर सूर्य कन्या से तुला राशि में प्रवेश करते हैं। सौर कैलेंडर में यहीं से कार्तिक (पंजाबी में कत्तक) महीना शुरू होता है। मेष की तरह यह भी विषुव संक्रांति है, इसलिए इसमें संक्रमण के पहले और बाद, दोनों ओर का समय पुण्य माना जाता है।
विषुव और सूर्य की स्थिति
विषुव का अर्थ है दिन और रात का बराबर होना। प्राचीन काल में तुला संक्रांति लगभग इसी खगोलीय घटना के साथ पड़ती थी; आज पृथ्वी की धुरी के धीमे खिसकाव के कारण असली विषुव कुछ हफ़्ते पहले आ जाता है, पर नाम पुराना ही चला आ रहा है। ज्योतिष में तुला सूर्य की नीच राशि मानी जाती है, इसलिए इस महीने सूर्य को अर्घ्य और आदित्य हृदय का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
क्या करें
स्नान, सूर्य पूजा और अन्न-दान इस दिन के मुख्य काम हैं। खरीफ़ की फसल पकने को होती है, इसलिए कई जगह नए अनाज और धान से जुड़ी पूजा होती है। सौर कार्तिक के साथ दीपदान और तुलसी के पास दीया जलाने का नियम भी कई परिवार शुरू करते हैं; कार्तिक के नियम कार्तिक मास स्नान और दीपदान में देखें।
क्षेत्रीय परंपराएँ
- कर्नाटक का कोडगु: तलकावेरी में कावेरी संक्रमण मनाया जाता है, जब कुंड में जल उमड़ने को देवी कावेरी का प्रकट होना माना जाता है।
- ओडिशा: गर्भाणा संक्रांति, जब धान की बालियाँ भरने लगती हैं।
- तमिलनाडु में ऐप्पसि महीने में कावेरी स्नान (तुला स्नान) का महत्व है; केरल में तुलाम।
महीनों के नाम हिंदू महीनों के नाम में और हर महीने की संक्रांति अलग पृष्ठ पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तुला संक्रांति से कौन सा महीना शुरू होता है?
तुला संक्रांति का पुण्य काल कब होता है?
क्या तुला संक्रांति पर दिन-रात बराबर होते हैं?
कावेरी संक्रमण क्या है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
