संक्रान्ति तिथियाँ 2026
वर्ष 2026 की सभी तिथियाँ, New Delhi, India के समय सहित।
संक्रांति
संक्रांति वह दिन है जब सूर्य एक राशि से निकलकर अगली राशि में प्रवेश करता है। साल में बारह संक्रांतियाँ होती हैं, हर सौर मास की शुरुआत में एक। इन दिनों स्नान, दान, सूर्य को अर्घ्य और जप का विशेष महत्व है, और इनमें से मकर संक्रांति सबसे बड़ा पर्व है।
किस दिन मानी जाती है
संक्रांति चंद्र तिथि से नहीं, सूर्य की गति से तय होती है, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर में इसकी तारीख लगभग स्थिर रहती है। सूर्य के राशि बदलने के आसपास के कुछ घंटे पुण्य काल कहलाते हैं, जिनमें स्नान-दान किया जाता है। संक्रांति सूर्यास्त के बाद हो तो पुण्य काल अगले दिन सुबह माना जाता है।
बारह संक्रांतियाँ
- मेष: सौर नववर्ष; पंजाब में बैसाखी, बिहार में सतुआन।
- वृषभ, मिथुन: गर्मी में जल और सत्तू का दान।
- कर्क: दक्षिणायन की शुरुआत; उत्तराखंड में हरेला।
- सिंह: उत्तराखंड में घी संक्रांति।
- कन्या: विश्वकर्मा पूजा।
- तुला, वृश्चिक: कार्तिक स्नान और दीपदान का समय।
- धनु: खरमास शुरू।
- मकर: उत्तरायण, खिचड़ी और तिल का दान (मकर संक्रांति)।
- कुंभ: माघ स्नान का पुण्य।
- मीन: फिर से खरमास।
खरमास में विवाह जैसे मांगलिक काम नहीं होते; इसके नियम खरमास क्या है में पढ़ें। उत्तरायण-दक्षिणायन का अर्थ संक्रांति क्या है लेख में समझाया गया है।
क्या करें
सुबह स्नान कर तांबे के लोटे से सूर्य को जल दें (सूर्य को जल कैसे चढ़ाएं), मौसम के अनुसार अन्न, तिल, गुड़, कपड़े या जल-पात्र दान करें। नीचे की सूची में साल की हर संक्रांति की तारीख और सूर्य के राशि बदलने का समय है; ऊपर शहर चुनकर पुण्य काल देखें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संक्रांति क्या होती है?
संक्रांति की तारीख हर साल लगभग एक जैसी क्यों रहती है?
संक्रांति का पुण्य काल क्या है?
खरमास किन संक्रांतियों से जुड़ा है?
संक्रांति पर क्या दान करें?
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